ग्रामीणों ने मेटाबोदली में नहीं होने दिया लौह खनन का परिवहन.

patrika . com कांकेर / चारागांव / भैंसासुर .

चारगांव मेटाबोदेली माइंस से प्रभावित गांवों को वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने पर शुक्रवार को एक बार फिर परिवहन कार्य ग्रामीणों ने बंद करा दिया । ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए परिवहन कार्य में लगे सभी ट्रक लौट गए । माइंस प्रबंधन और पुलिस की टीम नाराज ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किए पर बात नहीं बनी । ग्रामीणों ने कहा हमारे बच्चों के लिए जब तक अंग्रेजी मीडियम स्कूल , लालपानी की निकासी के लिए नाली , बेरोजगारों को रोजगार और मूलभूत सुविधा नहीं दी जाएगी किसी भी कीमत पर चारगांव मेटाबोदेली माइंस से लौह अयस्क का परिवहन कार्य नहीं होने देंगे । माइंस प्रबंधन से नाराज ग्रामीणों कहा लालपानी हमारे खेतों में तबाही 15 टांकें नहीं बन पाया है । जबकि हर माह करोड़ों का खनन चारगांव मेटाबोदेली माइंस से किया जा रहा है । ग्रामीणों ने कहा कि सड़क का हाल खस्ता हो चुका है । कच्ची सड़क जगह – जगह दलदल में तब्दील होती जा रही है ।

माईस से प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को पढ़ने के लिए अंग्रेजी मीडियम स्कूल की स्थापना की जाएगी । वर्षों बाद भी माइंस प्रबंधन की ओर से स्कूल नहीं खोला गया । क्षेत्र में स्वास्थ्य की सुविधा देने का वादा किया गया था आज तक अस्पताल न
हीं बन पाया है । जबकि हर माह करोड़ों का खनन चारगांव मेटाबोदेली माइंस से किया जा रहा । ग्रामीणों ने कहा कि सड़क का हाल खस्ता हो चुका है । कच्ची सड़क जगह – जगह दलदल में तब्दील होती जा रही है ।

चलने वाले ट्रक तो इस दलदल में पार हो जाते हैं , पर ग्रामीणों का पैदल चलना संकट भरा हो गया है । मेटाबोदेली के गायता गजेंद्र धुवा , पटेल मनेसिंह , चैतराम , ऋतू नरेटी , राजवती , शकुंतला दुग्गा , लीला बाई दरों , मनिषा , बिदेसिन , सनाउराम , सुरेश , रामप्रसाद , दिनेश , रामजी लालसाय , देवराज , सोमावट्टी , अजय कुमार देहारी सरपंच चारगांव , सुरेश कुमार धुवा माटी गायता मेटाबोदेली , ललित नाग आदि ग्रामीणों ने कहा माइंस प्रबंधन हमारे साथ अन्याय कर रहा है । बार – बार मूलभूत सुविधाओं के नाम पर गुमराह किया जाता है ।

बोले – बच्चों का भविष्य हो रहाचौपट और सेहत के साथ प्रबंधन कर रहा है खिलवाड़

चारगांव और मेटाबोदेली के ग्रामीणों ने कहा वर्षों पहले हमें बच्चों को अंग्रेजी मीडियम में पढ़ने का सपना दिखाया गया था और गंभीर से गंभीर बीमारी का निःशुल्क इलाज कराने दावा किया गया था । आज तक न तो हमारे बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाया गया न ही अभी तक किसी प्रकार की पहल की जा रही है । स्वास्थ्य सुविधाएं तो भगवान भरोसे आज भी सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है । ऐसे में हमारे बच्चों के साथ और सेहत के साथ खिलवाड़ किया गया है ।


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