बस्तर: डरा धमकाकर मसीही आदिवासियों को राजीनामा का खेल बंद करो: छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम.

समस्त छत्तीसगढ़ प्रदेश में, मसीही समाज पर आक्रमण नहीं के बराबर हो गये हैं । सरकार की जागरूकता एव निष्पक्षता ठीक है । वही सिर्फ बस्तर सम्भाग में चर्चों पर हमले उफान पर है, थमने का नाम नहीं ले रहें हैं। मसीही समाज पुलिस विफलता मानता है ।

बस्तर सम्भाग में पिछले दो माह में छ: बड़े हमले हुवे है । जिसमे महिला के कपडे तक फाडे गये। बालात घरों मे धुस कर सारा सामान लूट लिया गया। आदिवासियों के मकानों तो तोड कर डहा दिया गया। फिर भी एक भी एफ आई आर, नहीं लिखी गयी। पुलिस थानो ने आवदन स्वीकार करने से ही मना कर दिया है । जिसके चलते सुकमा एव दोरनापाल क्षेत्रों में, उन्हीं परिवारो पर पिछले तीन वर्षों में हर साल हमले होते आ रहे हैं ।उनके घर मकान लगातार तोड जा रहे हैं, पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है ।

चौकाने वाली बात यह है कि, माननीय हाई कोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी पुलिस द्वारा की जा रही है । नारायपुर क्षेत्र में, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम ने, 17 प्रताडना एव पूलिस अनदेखी पीड़ितों, के पक्ष में हाईकोर्ट से राहत भरे आदेश प्राप्त किये थे, जिसमे पुलिस को एफ आई आर पंजीबद्ध करने आदेश दिये गये हैं । इसके बावजूद आज तक पुलिस ने विवेचना तो दूर, अपराध तक पंजीबद्ध नहीं किया है ।

एक नया राजीनामा-खेल बस्तर में चल रहा है । पीड़ित आदिवासियों को मारपीट, डरा-धमाके थाने में बैठाया जाता है, और जबरन राजीनामा पर हस्ताक्षर लेकर, मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। जिसमे तहसीलदार और एस डी ओ पी भी शामिल रहते हैं । दिलचस्प बात यह है कि, पुलिस पीड़ितों को घर बनवाने मोटी रकम भी देती है। कुच्छ पादरियों के थाने से रकम प्राप्त करने के वाईस रिकार्डिंग का पता चला है । पुलिस इतना पैसा किस फण्ड से बाँट रहीं है,कहा से इतनी बड़ी रकम मिल रही है रहस्यमय बना हुआ है । हाई कोर्ट अपराध पंजीबद्ध करने कहती है, पुलिस राजीनामा करवाती है, पैसे बाटती है, अगले साल फिर हमले होते हैं, और यह सिलसिला निरबाध्य चलता रहता है । आदिवासियों को न्याय नहीं मिल रहा है ।

छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरूण पन्नालाल, महासचिव अंकुश बरियेकर, रवि सोनकर, शत्रुघ्न सिन्हा, नरेन्द्र भवानी एव दीपक सिंह ने, पुलिस आई जी बस्तर, श्री विवेकानंद सिन्हा को ज्ञापन सौंप कर पूरे मामले की गहराई से जाँच करने ज्ञापन सौंपा है । कार्यवाई नहीं होने की स्थिति में हाईकोर्ट में गुहार लगाई जाएगी।

राजीनामा-गैंग का पर्दाफाश होना चाहिए। धार्मिक आजादी, एव शांतिपूर्ण जीवनयापन की आजादी स्थापित होनी चाहिए

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