आदिवासी संस्कृति पर संघी हमले धारा 144 में सदियों पुराने सरना देव

बादल सरोज

फ़ोटो में दिखाई दे रही सफ़ेद पुती जगह छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में ओड़गी से 3 किमी दूर जंगल की एक बमुश्किल 50-60 वर्गमीटर जगह में दिख रही सदियों पुरानी इस पहाड़ी को इस इलाके की आबादी न जाने कितनी पीढ़ियों से आदिवासियों के सरना देव का स्थान मानती आई है । हर पर्व पर इकट्ठा होती है, नाचती गाती है । सुख दुःख साझे करती है ।


● पिछली शिवरात्री के पहले से पाल दलौनी ग्राम पंचायत में आने वाले सरना देव धारा 144 की चपेट में हैं ।


● कुछ हिंदुत्ववादी तत्वों ने अचानक रात के अँधेरे में यहाँ शंकर की प्रतिमा विराजने की कोशिश की । (पीले तिरपाल में लिपटे हुये)। अपने सरना देव पर इस अतिक्रमण की खबर मिलते ही आदिवासियों के झुण्ड के झुण्ड इकठ्ठा हो गए, उनके तेवर को देखते हुये प्रशासन हरकत में आया तो मगर बजाय अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के उसने सरना देव को शंकर समेत धारा 144 में धर दबोचा ।


● स्थानीय आदिवासियों ने बताया कि इन हिंदुत्ववादी तत्वों का न शंकर से कोई मतलब है न धर्म से, उनका असली मकसद यहां मन्दिरों की मॉल खड़ी करके उनके साथ दुकाने बनाकर धंधा शुरू करना है । इसके पहले भी ये तत्व इस तरह की कोशिश कर चुके हैं ।


● अकेले ओड़गी के सरना देव इन हिन्दुत्ववादियों के निशाने पर नहीं हैं । पूरे आदिवासी इलाकों में प्रकृतिपूजक आदिवासियों के पारंपरिक सांस्कृतिक स्थानों को नष्ट करने, उन पर कब्जा करने, उनके हिन्दूकरण में संघ परिवार पूरी धृष्टता से भिड़ा हुआ है ।

उस वर्णाश्रम को थोपने पर आमादा है जिसमे आदिवासियों का कोई स्थान ही नहीं है । आदिवासियों के बीच इसके खिलाफ आक्रोश भी मुखरता से उभर रहा है ।


(कोई डेढ़ साल पहले 22 फरवरी 2018 को संजय पराते Sanjay Parate के साथ @छ्ग की ओड़गी में)

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