वीर नारायण सिंह पर भ्रमित लेख पुस्तकों के लेखक पर कानूनी कार्यवाही की मांग.

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कतिपय लेखक – रचनाकारों द्वारा बहुप्रतिष्ठित सोनाखान के तत्कालिक शासक राजा रामराय व उनके पुत्र अमर शहीद वीर नारायण सिंह के खिलाफ अनऐतिहासिक झूठी , वैमनस्यतापूर्ण एवं अनुसूचति जनजाति / समुदाय को अपमानित करने प्रकाशित पुस्तक अंशों को प्रतिबंधित करने एवं दोषी लेखक – प्रकाशक वितरक पर कानूनी कार्यवाही करने FIR करने की मांग की है।.

समाज व राज्य द्वारा बहुवदनीय – ऐतिहासिक महापुरूष अमर शहीद वीर नारायण सिंह एवं उनके पिता श्री रामराय एवं उनके जाति / समुदाय के खिलाफ एक सोची समझी साजिश के तहत दुर्भावनापूर्ण चरित्र हत्या कर उन्हें जाति सूचक अपमानित करने आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित वर्णित किया गया है ।

इन लेखकों / कवियों ने आदिवासी समुदाय के प्रति सतनामी समुदाय के । बीच वैमनस्यता – कता पैदा करने का काम किये हैं । जबकि ऐतिहासिक सत्य यह है कि । सोनाखान के शासक राजा रामराय ( गुरूघासीदास के समकालीन ई 1770 1850 के करीब ) एत । उनके पुत्र अमर शहीद वीर नारायण सिंह ( अमर शहीद गुरूबालकदास के समकालीन ई 1805 1860 के करीब ) के मैत्रीपूर्ण सहयोग से छाता पहाड ( तत्कालीन सोनाखान राज के अधीनस्थ ! स्थान ) सोनाखान के मैत्रीपूर्ण सहयोग से आदिवासी व सतनाम आंदोलनकारियों के बीच वैचारिकी । एका एवं सैन्य प्रशिक्षण की संरचना विकसित हुई ।

इन पुस्तकों के दुषप्रचार के कारण सतनामियों के बरगलाये / भटकाये / भ्रमित किये गये गीत गायको , रचनाये एवं प्रायोजको जाने अनजाने वक्ता श्रोताओं ने सोनाखान के आदिवासी व समस्त लोक समाज के लिये संघर्षशील जननायक को खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है ।

इसलिए यह जरूरी है कि इन लेखको – प्रकाशको की रचनाओं के आपत्तिजनक गैरकानूनी अशो को प्रतिबंधित / विलोपित कराकर दोषियों पर FIR दर्ज किया जाये । इन पुस्तकों व रचनाओं के नाम एवं उनके लिखे आपत्तिजनक तथ्यों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है । पूरी पुस्तक के संदर्भित अशा को पुस्तक में खोजने देखने का काम विशेष
कमेटी द्वारा किया जा सकता है ।

1 . रचनाकार – मनोहरदास नृसिंह कृत ‘ ‘ श्री घासीदास नामायण ‘ से उद्धृत । नाम नारायण सिंह थे , सोनाखान सरदार । नया जवानी खून में उफनत ज़ला अपार । । हामी कुटिल अज्ञानी नप , सनि । के नात । घासीदास अपमान कर , वीणा लिया हाथ । पेज 72 ।

2 . पलित सखाराम बघेल सत्यवंशी कृत – ‘ अथ गुरू घासीदास चरित सत्यायण ‘ से उदृत ( छ . ग शासन से गुरू घासीदास सामाजिक चेतना पुरस्कार ई 2006 प्राप्त ) । कहनृप सुनहू वचन हमारा , घासी को लावह ऐहि मारा दंतेश्वरी में बंद कराया । सामदान मय सबही दिखाव । । जादौ सबै गिरौदपूरी अबही संग में घासी को लावी , अबहीं । दतेश्वरी मंदिर ले जावो अब घासी को बली चढायो .पेज 61 – 621.

3 राजमहत नोसर लाल टण्डन कृत ‘ सत्यवश सतनाम धर्मगध ‘ कहे सतदेव सुनहु संतदासा का पाठ के धरित्र प्रकाशा – – – सुनय नहीं गाते बिंझवारा मंदमास अनाचार व्यवहारा । रामराय पिता के जाये , रणवीर वीर नारायण आये लघु भाई तेरो वीर नारायणा । राजगहत कुछ करत परायणा । अंधकार में खूब तुम सोये । मदमारा अनाचार खोये । ( उक्त रचना के अंश सुनी नहीं माते बिंझवार केसरी आदिवासी विज्ञावार के लिये जाति सूचक अपमानित किया गया है ।

4 * सुकुलदास पृतलहरे कृत – ” गुरू घासीदास गंध समायण ” ( इस पुर । के । शुमाकांक्षी – प्रशशक गण – नरसिह मंडल , डॉ शंकरलाल टोडर डी बी . एस जोशी । । सोनाखान यसरी हवे जमीदार रामराय / / 20 / / गाय गिरीद उखर जमीदारी रयत म खूब दबदबा भारी । । , उन्हें चलो घासी बतलाव – देवी मंदिर बली चढ़वाबा । ।

5 नगत रविन्द्र कृत – प्रभात सागर से उदधृत पकरिबांह बल र रण बांध चल पथ दोक नर करि आगे । संधि काल झट नगर समाए । बलि हितु आनि को संध ना पाए । । पेज 533 .6 शंकर लाल टॉडर कृत – सतनामी और सतनान आंदोलन से उदघृत – राजा सोनाखान घासी को गिरफ्तार करने की मंशा बना लेता है । उस हालत में हाथी ही उसे मार डालेगा । पेज – 120 – 12 7 . लेखक संपादक प्रकाशक – राजहरा नमूराम मनहर – के पुस्तक से उदधृत.

गुरू घासीदास सेवादार संघ ने इसके खिलाफ मुखदमा दर्ज करने की मांग की है ताकि समाज में विद्वेष फैलाने वाले कथित लेखकों ,प्रकाशकों के विरुद्ध कार्रवाही हो सके.

मुंगेली थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाने के पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले .

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