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जंगल , जंगल क्यों हैं ,
किस लिये हैं –
किनके हैं .
जंगल गर जंगल हैं
तो वहां का बासिंदा – जंगली हुआ .
ये तय किसने किया …..
जंगल को –
क़ानून के जंगल में फांदने वाला – कौन था – है .
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ज़मीन को – अपने सघन अनगढ़ विस्तार के बाहुपाश में जकड़ने वाला ,
ज़मीन के जिस्म में प्राण प्रतिष्ठा करने वाला ब्रह्मा है – जंगल .
अपने पुरखों का निर्विवादित वारिस ,
जंगल की तहजीब से बाक़ायदा वाक़िब –
वाजिब मालिकाना हक़दार हैं – आदिवासी .
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आदिवासी वल्द जंगल , जाति – जंगली , मुक़ाम – जंगल , हाल मुक़ाम – जिला जेल से झोपड़ पट्टी से मरघट तक .
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बेजा कब्जा – अतिक्रमण – आक्रमण – पालतू बनाने का हुनर ,
बाहर से भीतर की तरफ़ घुसेड़ा गया सुदर्शन कुचक्र था –
है .

जंगल पोषित को पालतू फिर भक्त बनाने की गाथाओं के रचैताओं ,
जंगल के वारिसान को वानर घोषित करने वाले धर्माधिकारियों ,
जंगलों – पहाड़ों – नदियों – ज़मीनों को तीन डग में नाप कर
अश्वमेघों के , प्रभु लीलाओं के , पाखंड रच डालने वाले –
प्रभु सैनिक थे – हैं .
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प्रभु की सेना –
आदिवासिनों की छाती निचोड़ कर तय करती है – कौमार्य .
प्रभु की सेना –
आदिवासियों पर करती है – निशानेबाज़ी का अभ्यास .
प्रभु की अदालत –
आदिवासी के मार दिये जाने को – जीवन से मोक्ष मिलना तय करती है ,
आदमी की मौत मानने से इंकार करती है .
*

नवल शर्मा ।
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