जनता के जीवन से खिलवाड़ है, सर्वे के बाद गम्भीर प्रदूषण वाले 100 की सूची से रायगढ़ जिले का नाम हटा . -गणेश कछवाहा

एनजीटी के सख्त कार्यवाही व निर्देश पर सर्वे के बाद गम्भीर प्रदूषण वाले 100 शहरों की सूची से रायगढ़ का नाम हटा ।यह अभी अखबार और सोशल मीडिया की सुर्खियों बनी हुई है।लोग आश्चर्य चकित हैं। बड़ी सख्ती से यह सवाल भी कर रहे हैं कि यह कौन सा जादुई सर्वे है कि “प्रदूषण की खतरनाक सीमा को पार कर डेंजर ज़ोन बन चुका शहर अचानक प्रदूषण की सूची से ही हट गया। क्या वास्तव में प्रदूषण खत्म हो गया है या यह अद्भुत होनहार प्रतिभा शाली अधिकारियों व संस्थाओं की अद्वितीय प्रतिभा का चमत्कार है।जिससे पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी भी अनभिज्ञ हैं। यह चमत्कार कैसे हो गया उनसे पूछने पर वे बहुत भोला सा जवाब देते हैं उन्हें नहीं मालूम है।

एनजीटी जैसी जिम्मेदार महत्वपूर्ण संस्था की कड़ी कार्यवाही के तहत पर्यावरण प्रदूषण का सर्वे हो रहा है और पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी को कुछ पता न होना यह भी काफी महत्वपूर्ण और चमत्कारिक है। क्या सरकार को ऐसे अधिकारियों का सार्वजनिक नागरिक अभिनंदन या किसी राज्य या राष्ट्रीय स्तर के सम्मान से नहीं नवाज़ा जाना चाहिए?

जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा रायगढ़ के सक्रिय सदस्य एवं ट्रेड यूनियन कौंसिल रायगढ़ के संयोजक गणेश कछवाहा ने कहा है कि यह जनता के जीवन से खिलवाड़ है।ऐसे संवेदनशील मामलों में जिला प्रशासन की भूमिका सुनिश्चित होनी चाहिए। जनसंगठनों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों, पत्रकारों एवं मीडिया के साथियों द्वारा बार बार प्रदूषण की भयावहता से सरकार को अवगत कराये जाने के बावजूद सरकार ने कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। लोगों का जीवन ही खतरे में पड़ गया है।पूरा जीवजगत संकट में है।जनता जिलाप्रशासन के असंवेदनशील एव गैरजिम्मेदाराना रवैये से चिंतित एवं आक्रोशित हैं।

उद्योगों के अपशिष्ट फ्लाईएस खेत खलिहान, नदी – नालों,तालाबों, जलाशयों, जल स्रोतों, यहां तक कि स्कूलों के आसपास ,यत्र तत्र मनमाने ढंग से फेंके जा रहे हैं। पेड़ ,पौधो, वनस्पतियों , नदी तालाबों, जलाशयों में काली काली परतें छाई रहती हैं,लोगों के घरों में डस्ट की काली काली परतें दिखाई पड़ रही है।कफ़ और फेफड़ों में काले काले कण पाए जा रहे हैं। केलो नदी अपना अस्तित्व खो चुकी है।चिकित्सकों का यह स्पष्ट मानना है कि-पर्यावरण प्रदूषण के कारण स्वास,लिव्हर,फेफड़े, हृदय,चर्म रोग एवं कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।छोटे-छोटे बच्चों और वृध्दों पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बीमारियों से ग्रसित मृतकों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। समूचा जन-जीवन ही खतरे में पड़ गया है।ऐसी गम्भीर और खतरनाक हालात में पर्यावरण संरक्षण की बात तो दूर प्रदूषण की सूची से ही नाम हटा देना यह घोर अमानवीय एव आपराधिक कृत्य है।जनता के जीवन से खिलवाड़ है।इसकी पूर्ण उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।और पर्यावरण संरक्षण की ठोस नीति बनाकर प्राणी जगत के प्राणों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा के सचिव बासुदेव शर्मा,समन्वयक कैलाश अग्रवाल, वरिष्ठ साथी शिव शरण पांडे,वरिष्ठ उपाध्यक्ष पी एस पंडा, ट्रेड यूनियन कौंसिल के संयोजक गणेश कछवाहा,सीनियर सिटीजन संघ के अध्यक्ष के के एस ठाकुर, के आर यादव,शिक्षा विद एन आर प्रधान, आनन्द प्रधान,डॉ सर्वेश्वर गुप्ता, पेंशनधारी कल्याण संघ के अध्यक्ष महादेव अग्रवाल, आर के शर्मा,प्रगतिशील पेंशनर संघ के अध्यक्ष राजीव रत्न चौबे, एकता परिषद के जिला समन्वयक रघुवीर प्रधान, सर्वोदय मंडल के संयोजक डॉ सुरेश शर्मा,सद्भावना सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष नीलकंठ साहू,सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप पारे,गणेश मिश्रा, मदन पटेल,विजय अग्रवाल ,बजरंग अग्रवाल,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संघ के साथी जय प्रकाश अग्रवाल, आल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी टी के घोष,बीएसएनएल एम्प्लाइज यूनियन के साथी एच एस दानी, एम एल साहनी,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ अध्यक्ष अनिता नायक, काजल विश्वास, तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शेख कलीमुल्ला, रतिदास महंत,लघुवेतन कर्मचारी संघ के साथी बिष्णु यादव, एम आर एसोसिएशन के साथी खगेश्वर पटेल,एस बी सिंह,लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन मो.एम शमीम,डी के सिंह,कोटवार संघ के अध्यक्ष समय लाल चौहान, बिलासपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्प्लाइज एसोसिएशन के सचिव प्रवीण तंबोली, किसान सभा के साथी लंबोदर साव,पीपुल्स फॉर इंडिया के साथी श्याम जायसवाल इत्यादि साथियों ने छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है एनजीटी के जांचदल की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करे।जनता के जीवन से खिलवाड़ करने बंद करे। प्रदूषण की भयावहता को देखते हुए रायगढ़ जिले को प्रदूषण मुक्त जिला बनाने हेतु ठोस कार्यनीति बनाये।

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