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भिलाई नगर


नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार संघ (ऐक्टू) ने बयान जारी कर कहा कि भिलाई नगर निगम में जून 2019 से जोन 1-2-3-4-6 के सभी वार्डों को ठेका पद्धति से सफाई कराने हेतू ठेका एजेंसी P V RAMAN को ठेका अनुबंध के अनुसार काम निगम प्रशासन स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिया गया था , इसके पुर्व अप्रैल 2017 से मई 2019 तक 26 माह निगम प्रशासन दावरा ठेका नहीं होने के कारण छग शासन के दिशा निर्देश पर अपने पूूरीी जिम्मेदारी पर सफाई कार्य संचालित किया जा रहा था, ठेका प्रथा को वापस लाने का कामगारों ने लगातार विरोध किया गया .

जिसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों महापौर, विधायक, सांसद ,प्रशासनिक अधिकारी जिला कलेक्टर, श्रम विभाग , पुर्व की भाजपा सरकार, वर्तमान कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौप कर ठेका पद्धति पर रोक लगाने की मांग की गयी थी . जिसमें स्पष्ट रुप से कहा गया था कि पिछले 2008 से श्रम संगठन दावरा ठेका प्रथा में कामगारों के श्रम अधिकारों के भीषणतम शोषण , मजदूरी मे लूट , वेतन कटौती, सहित भविष्य निधि ,ई एस आई मे घोटाले हो रहे हैं । लगातार शिकायत जांच ,कामबंदी के बाद भी निगम प्रशासन ठोस कार्रवाई करने में सक्षमता नहीं दिखा रही हैं.

निगम प्रशासन द्वारा जून 2019 से पुनः राज्य शासन का हवाला देकर एक ऐसे ऐजेंसी को सफाई कार्य का ठेका सभी नियमों को ताक में रखकर दिया गया जिसका पूर्व का सफाई कार्य में कामगारों के वेतन भुगतान को लेकर भारी विषमताएं और लूट का रिकॉर्ड रहा हैं, कामगारों के 2 दिनों के( 1-2 जून 2019 ) ठेका प्रथा के विरोध में हड़ताल को निगम प्रशासन और ठेका ऐजेंसी दावरा नये मजदूरों से काम करवाने की धमकी और नौकरी से निकाल देने का डर पैदा कर 3 जून से काम शुरू करवाया गया . इसको लेकर श्रम संगठन के काम पर लौटने के निर्णय को कामगारों के बीच बड़े ही सुनियोजित ढंग से यह कह कर फैलाया गया कि श्रम संगठन के नेता लोग रातों रात ठेका ऐजेंसी से कमीशन लेकर समझोता कर लिया गया हैं. इस साजिश में ठेका ऐजेंसी और जिम्मेदार अधिकारी के एक साथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता , कामगारों के मन में युनियन के नफरत और जहर डाल कर संगठन को तोड़ने का काम किस राजनीतिक उद्देश्य को लेकर की गई इसमें और किन राजनीतिक अदृश्य हाथ शामिल हैं.

मजदूर समझना शुरू कर दिया हैं, सफाई कामगार संघ के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा है कि 3 जून को लिए गये निर्णय कामगारों के रोजी रोटी को बचाने और काम करते हूए संघर्ष को जिंदा रखने के लिया गया था, इस पूरे मामले में 3 जून 2019 को निगम आयुक्त श्री. एस के सुंदरानी, स्वाच्छता अधिकारी ( प्रभारी) श्री धर्मेंद्र मिश्रा, श्री जावेद खान स्वास्थ्य प्रभारी के साथ युनियन पदाधिकारी जयप्रकाश नायर,नेमन साहू,मोतम भारती, लुर्दमेरी, दिलीप देवांगन, रामचन्द्र गंधर्व की बिंदु वार चर्चा मे स्पष्ट कहा गया था आयुक्त दावरा कि हम खुद ठेका पद्धति के खिलाफ हैं लेकिन शासन द्वारा हमे 31 मार्च तक ही अनुमति प्राप्त थी इसलिए निगम ने शासन के आदेशानुसार ठेका पध्दति के माध्यम से सफाई कार्य करवाने का निर्णय लिया और निगम पूरी तरह कामगारों के श्रम अधिकारों पर किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देगीं ,सभी नियमों को अनुबंध में लाया गया हैं . कामगारों का वेतन हर माह की 10 तारीख के पूर्व देने की जिम्मेदारी ऐजेंसी की हैं , नहीं होने की स्थिति में निगम अपनी कार्रवाई ऐजेंसी पर करेगी. कामगारों को वर्दी ,सुरक्षा उपकरण परिचय पत्र सभी सुविधाएं अनिवार्य हैं.

युनियन ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काम शुरू करवाने के किस राजनीतिक / प्रशासनिक दबाव और अपने हित साधने के कारण कामगारों के पक्ष में चिंतित होने वाली निगम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और आयुक्त महोदय वेतन भुगतान में हो रहे विलंब पर अपने जिम्मेदारी से भागते हुए ये कहते फिर रहे हैं कि हमारा काम हमने ठेके मे दे दिया हैं वेतन सहित सभी जिम्मेदारी अनुबंध के तहत ऐजेंसी की हैं . हमें सिर्फ़ देश मे नम्बर 1 पर आने के लिए काम करना हैं. युनियन ने आरोप लगाया कि वेतन भुगतान को लेकर जून माह में ही कहा गया था कि इतने बड़े संख्या में कामगारों के भुगतान प्रक्रिया के लिए एजेंसी ने क्या नीति बनाई गयी हैं इस पर ठेकेदार रमन ने कहा कि हमने उपस्थिति एंव वेतन गणना हेतु इंजीनियर पद नियुक्त किये जो प्रथम सप्ताह में ही हम कामगारों का वेतन देना शुरू कर देगें . लेकिन जमीनी हकीकत प्रधान नियोक्ता नगर निगम और नियोक्ता ठेका ऐजेंसी दोंनो ने कामगारों के साथ वादाखिलाफी किया हैं .

ठेका ऐजेंसी दावरा आज दिनांक 24 जुलाई तक कामगारों का जून माह का वेतन भुगतान पूरा नहीं किया गया और जहाँ भी किया गया कामगारों के वेतन से बड़ी साजिश के साथ हाजरी में 1से 10 दिनों तक की गैरकानूनी कटौती कर भुगतान किया गया जिसकी लिखित शिकायत निगम आयुक्त से की गई हैं .


युनियन ने कहा कि ठेका पद्धति का ये प्रयोग निगम प्रशासन का पूरी तरह अनेक संदेह को जन्म दे रहा हैं . वेतन में कटौती ,वेतन में देरी ,वेतन भुगतान की कोई ठोस नीति के बिना ऐसे ऐजेंसी को काम इतने बड़े स्तर पर देना और इसका पालन ना करने पर भी मेहेरबानी करना ,आज कामगारों का गुस्सा अंतिम स्थिति में पहुंच कर काम बंद आंदोलन के साथ निगम मुख्यालय तक पहुंच गया हैं.

अब ठेकेदार और निगम प्रशासन कामगारों की समस्या को सुलझाने के बजाय बिना सूचना के कामबंद करने और निगम गेट पर विरोध का आरोप लगाकर पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करेगी और अपने सुपरवाइजर और फोटो विजलेंस टीम से कामगारों का फोटो खींचकर काम से हटाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाइगी. कामगारों के दर्द उनके परिजनों के जीवन के एकमात्र साधन सफाई के मजदूरी की चिंता नहीं करेगी.


ऐसे में अपने हक और श्रम अधिकारों कै लिए एकजूट होकर मांग हेतू विरोध प्रदर्शन किस आधार पर गैरकानूनी हो सकता हैं .


युनियन मांग करती हैं कि कामगारों के वेतन भुगतान ना कर पाने वाली ऐजेंसी के खिलाफ विधिसम्मत कार्यवाही करते हुए कामगारों के वेतन तत्काल किया जाय. वेतन कटौती को लेकर एक निष्पक्ष समिति गठित किया जाय एंव बकाया वेतन का भुगतान किया जाय.


कामगारों पर बेवजह काम से हटाने . फोटो खींचकर वेतन कटौती पर रोक लगाई जाय.

जयप्रकाश नायर
कार्यकारी अध्यक्ष
नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार संघ ( ऐक्टू)
9329025734.

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