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International Expert Team Expresses Concerns over the Independence and Functioning of the Indian National Human Rights Commission.

राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मानव अधिकार संस्थानों के साथ कार्यरत ‘ एशिया के गैर – सरकारी संगठनों और व्यक्तियों का नेटवर्क – एन्नी। ( Asian NGO Network on National Human Rights Institutions ( AINNI ) द्वारा भारत में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के काम पर मिशन रिपोर्ट [ ( Mission Report on the Performance of the National Human Rights Commission of India ‘ ( NHRCD ] का स्वागत किया गया है , जो एक अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम द्वारा जारी की गई है , और भारत में अधिकारों से सम्बंधित शीर्ष स्तर के संस्थान की कार्य प्रणाली को स्थापित अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों के अनुपालन के अनुरूप मज़बूती प्रदान करने की दिशा में कदम उठाने की जिसने मांग की है ; और इस कानून में ऐसे कोई भी संशोधन लाये जाने के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त की है , जिससे इस संस्थान की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर आगे किसी प्रकार का समझौता हो .

थाईलैंड देश के बैंकाक शहर में आधारित ‘ एशिया के गैर – सरकारी संगठनों और व्यक्तियों का नेटवर्क ‘ – एन्नी ( AiNNI ) द्वारा समन्वित , इस मिशन के सदस्यों में शामिल हैं : प्रोफ . द्वाक नोह्ययुन ( Prof . Kwak Nohyum ) , जो दक्षिण कोरिया देश के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के पूर्व आयुक्त एवं महासचिव पद पर रहे , सुश्री रोसेमरी डी . आर . जानो ( Ms . Rosemarie D . R . Trajano ) , जो एक जानी – मानी मानव अधिकार रक्षक हैं और फिलिपीन अलायन्स ऑफ़ ह्यूमन राइट्स एडवोकेट ( PAIRA ) की महासचिव हैं , और डॉ . खू यिंग हुई ( Dr . Khoo Ying Hooi ) , जो मलेशिया देश में मलाया विश्वविध्यालय के इंटरनेशनल और स्ट्रेटेजिक स्टडीज डिपार्टमेंट के वरिष्ट प्रख्याता हैं . इस मिशन का मूल उद्देश्य था : “ भारत के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की स्वतंत्रता और प्रभाव का मूल्यांकन और समीक्षा करें , जो समान चिंताओं के समाधान में एशिया के अन्य देशों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो सके .

इस मिशन का आयोजन नई दिल्ली में अगस्त 21 से 25 , 2018 कर किया गया था . इस मिशन के दौरान , इस टीम द्वारा 19 मीटिंग आयोजित की गयीं , जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ताओं , न्यायविदों , शिक्षाविदों , मानव अधिकार विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं और भारतीय राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के पूर्व कर्मचरियों से आन – लाइन फ़ोन और साक्षात्कार शामिल हैं . इस मिशन रिपोर्ट में तमाम सिफारिशें दी गयीं हैं , जो भारत सरकार , भारतीय संसद , भारतीय राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग , और भारतीय नगरीय समाज को संबोधित करती हैं , ताकि इन पर विचार – विमर्श कर भारतीय राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को स्वतंत्र और असरदार तरीके से कार्य करने हेतु ढाला जा सके .

रिपोर्ट में भारत सरकार से सिफारिश की गयी है कि वे एक संवाद शुरू कर एक समुचित उपाय करें कि एन . एच . आर . सी . आई . को एक वैधानिक निकाय की वर्तमान स्थिति से एक संवैधानिक संस्था के रूप में परिणित किया जाए . इसने भारतीय संसद से गुज़ारिश की है कि पी . एच . आर . ए . ( मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम ) में प्रस्तावित संशोधन जैसे गंभीर मुद्दे पर नगरीय समाज संगठनों को शामिल कर एक स्वस्थ बहज़ चलाने की पहल करे . सरकार द्वारा उठाये गए उपायों में यह सुनिश्चित करना होगा कि एन . एच . आर . सी . आई . पूर्णत : पेरिस प्रिंसिपल्स का अनुपालन करती है .

इसी दिशा में , एन . एच . आर . सी . आई . को एस . सी . ए . [ Committee on Accreditation ( SCA ) ] की उन सिफारिशों का अनुपालन करना चाहिए जो नियुक्ति प्रक्रिया , और एन . एच . आर . सी . आई . के अध्यक्ष पद और सदस्यों के लिए नामांकन हेतु , और सदन में वार्षिक रपटों पर बहज़ में पारदर्शिता का सिद्धांत अपनाने के बाबत हैं . एन . एच . आर . सी . में सुधार के मुद्दे पर इस रपट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि डी . जी . आई . और एस . जी . के पदों पर नियुक्ति के लिए भारत सरकार को प्रस्तावना नहीं देनी चाहिए , बल्कि इन पदों पर नियुक्ति हेतु एन . एच . आर . सी . द्वारा स्वतंत्र और पारदर्शित प्रक्रिया की पहल करनी चाहिए . एन . एच . आर . सी . आई . के सभी कर्मचारियों को एन . एच . आर . सी . आई . द्वारा स्वतंत्र रूप से नियुक्त करना चाहिए , न कि भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों द्वारा उन्हें प्रस्तावित करना चाहिए . एन . एच . आर . सी . को भारत सरकार से वकालत कर एन . एच . आर . सी . आई . में अधिक – से – अधिक सदस्यों को शामिल करने की पहल करनी चाहिए , ताकि उसमें बहुलतावाद और विविधता सुनिश्चित हो सके और इसके गठन में समावेशन का सिद्धांत प्रदर्शित हो .

एन . एच . आर . सी . आई . को उन अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए जो उसे पी . एच . आर . ए . के तहत मिले हुए हैं , और इसके ज़रिये उसे उन कानूनों की समीक्षा करनी चाहिए जिनका सरकार दुरूपयोग कर मानव अधिकार रक्षकों के काम को सीमित कर उनका अपराधीकरण करती हैं . अन्य कानूनों के अलावा इनमें ऍफ़ . सी . आर . ए . ( FCRA ) , विधिविरुद्ध क्रिया ( निवारण ) कलाप – अधिनियम , ( UAPA ) , राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( NSA ) ख़ास तौर पर शामिल हों . भारत में मानव अधिकारों से सम्बंधित लगातार बिगड़ती दशा और लोकतान्त्रिक स्थान के सिकुड़ते दायरे के मद्देनज़र , संविधान के बचाव की दिशा में , और मौलिक अधिकारों को नियंत्रित करने वाले उन सभी क़दमों की सार्वजानिक निंदा करने के लिए एन . एच . आर . सी . को त्वरित और माकूल कदम उठाने चाहिए .

रपट में आगे सिफारिश की गयी है की भारतीय नगरीय समाज को लगातार एन . एच . आर . सी . आई . के साथ विचारों और अनुभवों का आदान – प्रदान करते रहना चाहिए , और उसकी कार्यप्रणाली पर आलोचनात्मक निगरानी रखनी चाहिए . रपट इस बात की ज़ोरदार वकालत करती है कि भारतीय नगरीय समाज को अदालत का दरवाज़ा खटखटाकर एन . एच . आर . सी . आई . में सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए , और ‘ ग्लोबल अलायन्स ऑफ़ एन . एच . आर . आई . ‘ [ Global Alliance of NHRIS ( GANHRID ] , ‘ एशिया पेसिफिक फोरम ऑफ़ एन . एच . आर . आई . ‘ [ ( Asia Pacific Forum of NHRIS ( APF ) ] , ‘ संयुक्त राष्ट्र संघ और तमाम उपयुक्त अन्य संस्थानों के साथ मिलकर एन . एच . आर . सी . आई . में सुधार लाने की नीयत से जानकारी का आदान प्रदान और वकालत करनी चाहिए

इस रपट में बलपूर्वक ग्लोबल अलायन्स ऑफ़ एन . एच . आर . आई . ( GANHRI ) को सलाह दी गयी है कि वह ‘ अक्क्रेदिटेशन की उप – समिति ‘ [ Sub Committee on Accreditation ( SCA ) ] के नियम – कानूनों और प्रक्रियाओं के तहत एन . एच . आर . सी . आई . की विशेष समीक्षा की सम्भावना पर विचार करे . यहां यह बता देना ज़रूरी है कि भारतीय एन . एच . आर . सी . को ‘ पेरिस प्रिंसिपल्स के अनुपालन के दृष्टिकोण से “ अ ” स्तर का दर्जा प्रदान किया गया था , जो नवम्बर 2017 में उसकी समीक्षा के फलस्वरूप मिला था . इस “ अ ” स्तर का दर्जा प्राप्त होने के कारणों में यह शर्त भी शामिल थी कि वे मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम , 1993 को संशोधित कर उसे ‘ पेरिस प्रिंसिपल्स के अनुपालन हेतु बनायेंगे . ‘

ग्लोबल अलायन्स ऑफ़ एन . एच . आर . आई . ( GANHRI ) की एस . सी . ए . [ Sub – Committee on Accreditation ( SCA ) ] ने एक अपवाद के तहत ” अ ” स्तर का दर्जा सिर्फ प्रतिबद्धताओं के आधार पर प्रदान किया था . सन 1993 के कानून में संशोधनों को आज हम लोक सभा में देख – सुन रहे हैं , और इस मिशन रपट के विश्लेषण पर अगर हम ध्यान दें , तो जो भी संशोधन प्रस्तावित हैं वे एन . एच . आर . सी . आई . की स्वतंत्रता और स्वायत्तता को और भी अधिक समझौता करेंगे .

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