Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मताकि भारत का हर दूसरा गरीब शख्स आदिवासी और तीसरा सख्श दलित तथा मुस्लिम है । 27% बहुआयामी गरीबी ( जिसमें आय , स्वास्था , सुविधाएं आदि का पैमाना शामिल है ) के साथ भारत विश्व में पहले स्थान पर है ।

      हालांकि , संयुक्त राष्ट्र संघ( युएन ) की  ही एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि 2006 से लेकर 2016 के बीच भारत ने दुनिया में गरीबी दूर करने में सबसे ज्यादा तरक्की की । इस दौरान 27 . 1 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला निकाला गया । लेकिन , दूसरी तरफ जब यूएन भारत के भीतर जातीय आधार पर इसका आंकड़ा पेश कर रहा है , तो वह भी काफी परेशान करने बाला है । इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2018 में भारत का हर दुसरा बाहुआयामी गरीब व्यक्ति शेड्यूल कास्ट (एससी) तबके से है । इसी तरह हर मुस्लिम भी सभी प्रकार की गरीबी से घिरा हुआ है ।

सवर्ण जातियों की हालत बेहतर

भारत में सवर्ण जातियां हालांकि काफी बेहतर हालात में है। रिपोर्ट में एमपी के आधार सवर्ण जातियों में 15 फीसदी पर बहुआयामी गरीबी हावी है । हालांकि , देश में तरक़्क़ी का अकड़ा 2006 के मुकाबले आज बेहतर है । पहले जहाँ 80 फीसदी शेडयूल ट्राइब गरीबी रेखा से नीचे थे , वह अब 50 फीसदी है ।

दुनियाभर में 820 मिलियन से अधिक लोग भूख से हैं पीड़ित , 3 सालों में बड़ा आंकड़ा

इधर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है साल 2018 में दुनिया भर में 821 मिलियन से अधिक लोग भूख से पीड़ित थे । पिछले तीन सालों की तुलना में ये । आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ा है । संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन और डब्ल्यूएचओ सहित अन्यसंयुक्तराष्ट्र एजेंसियों द्वारा निर्मित द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड नामक रिपोर्ट जारी कर दी गई है । रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य की ओर शुन्य भूख के लिए । प्रगति पर नजर रखने का हिस्सा है ।

बिहार-झारखण्ड सबसे ज्यादा गरीब

राज्यों के आधार पर बात करें तो बिहार और झारखण्ड देश देश सबसे ज्यादा गरीब है। बिहार में 53 फीसदी बहुआयामी गरीब है , वहीं झारखंड में 45 फीसदी है । देश में केरल में गरीब काफी कम है । यहा पर सिर्फ 1 फीसदी लोग ही बहुआयामी गरीब चपेट में हैं ।

रिपोर्ट में किये ग है 640 जिले शामिल

देश के 640 जिलों को शामिल किया गया है और इसका 2006 से 2016 बीत बीते 10 सालों के साथ तुलना की गई है । रिपोर्ट मुताबिक देश की तकरीबन 50 फीसदी आदिवासी वर्ग गरीब है । जबकि . 33 फीसदी दलित और 33 फीसदी मुसलमान भी ऐसी श्रेणी में शामिल है । कुल मिला केर ईस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में दुनिया का सबसे ज्यादा गरीब आबादी रहती है इसका प्रतिसत 27है। सबसे ज्यादा चिंता वाली बात यह है की देश की 8.6 फीसदी बच्चों की आबादी भयंकर गरीबी की चपेट में हैं।

513.9 मिलियन। एशिया में भूखे लोगों की संख्या

रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 में 21 मिलियन से अधिक लोग भूख से पीड़ित थे । इस रिपोर्ट के अनुसार हर 9 में से 1 सख्स इस बीमारी से पीड़ित हैं। इसके अनुसार भूखे लोगों की संख्या एशिया में लगभग 513.9 मिलियन रही , जबकि अफ्रीका में 256.1 मिलियन और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में 42.5 मिलियन के आस पास थी

जलवायु परिवर्तन के कारण कुपोषण मे वृद्धिः

रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 में कुपोषण में वृदि हुई है । इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और युद्ध था । लेकिन , संयुक्तराष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के तहत साल 2030 इसे पूरी तरह से काबू में कर लिया जाएगा । रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में 811 मिलियन लोग कुपोषण का शिकार थे । इस संबंध में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के प्रमुख डेविड ब्यासले ने कहा कि हम 2030 तक इस बड़ी समस्या से निजात पा लेंगे । अफ्रीका में कुपोषण व्यापक रूप से बना हुआ है ।

**

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.