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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आंगनबाड़ी और मध्यान्ह भोजन में बच्चों व गर्भवती माताओं को पोषक आहार के रूप में अंडा देने के पक्ष में है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि खानपान की स्वतंत्रता का ध्यान रखा जाना चाहिए और जो लोग अंडा नहीं खाना चाहते, उन्हें उतनी ही कैलोरी का अन्य शाकाहारी पोषक आहार उपलब्ध कराया जाए.

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिवमंडल ने कहा है कि प्रदेश की आधी से ज्यादा महिलाएं और बच्चे कुपोषित है. इन कुपोषण से लड़ने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर अंडा एक सस्ता और सर्वोत्तम विकल्प है. जो लोग अंडा देने के विरोधी हैं, उनकी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा है कि शाकाहार या मांसाहार के नाम पर किसी भी समुदाय-विशेष को अन्य लोगों के खानपान पर प्रतिबंध लगाने का कोई अधिकार नहीं है और इसका हमारी संस्कृति से भी कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि इस प्रदेश की 80% जनता अपने भोजन में मांस का भी उपयोग करती है.

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि संघी गिरोह द्वारा हिंदुत्व के नाम पर अंडा देने का जो विरोध हो रहा है, वह दरअसल आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को कुपोषित बनाये रखने की साजिश ही है और वे सब लोगों पर खानपान के मामले में एकरूपता थोपना चाहते हैं, जो स्वीकार्य नहीं है.
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