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बुरहानपुर : आदिवासियों पर जानलेवा हमले के विरोध मे जागृत आदिवासी संगठन की राहदेल साई बोलते हुये.

सब साथी जिंदाबाद!
में राह्देल बाई, मान्मुडिया में रहती हूँ | हम जंगल में रहते है, खेती करते है | सरकार बोलती है हम पेड़ काट रहे है, ट्रकों में भर भर कर जो मोटे मोटे पेड़ ले जाए जा रहे है, कौन ले जा रहा है? हम खेती नहीं करेंगे तोह तुम खाओगे कैसे?
तुम (सरकार) हमारे ऊपर हमले क्यूँ कर रहे हो? हम भी इंसान है, तुम भी इंसान हो | हमें भी भगवान ने बनाया, तुम्हे भी | हम धरती को चीर के, अपनी मेहनत से अनाज पका के खाते है, तुम्हारे जैसे दूसरों से लूट के नहीं ! तुम (वन विभाग के रेंजर) हमारे घर, गाँव में आते हो, कभी मुर्गी मांगते हो, कभी बकरी मांगकर हमे लूटते हो! तुम्हारे बाप से कुछ मांग कर नहीं खाते हम! रेंजर आता है, बोलता है पैसे लाओ, एक हज़ार, दो हज़ार, तीन हज़ार! हमारे बाप दादा तीन पीडी से जिस ज़मीन से कमाई की है, हमारा अधिकार हम नहीं छोड़ेंगे! हम कर के रहेंगे! हम अभी मरेंगे, तो हमारे बच्चे अपने हक़ के लिए लड़ेंगे, पर हक़ नहीं छोड़ेंगे! सरकार बनने से पहले से आदिवासी जंगल में खेती कर रहे है, तब क्यों नहीं रोका आदिवासियों को? तब सरकार होती नहीं थी, अब हमें क्यों रोक रहे हो? हमें पता है कि कैसे ज़मीन पर क्या फसल लगानी है | नाकेदार हमसे बोलते है, मूंगफली दे दो, वह पेड़ की डाली पर मूंगफली ढूँढ़ते है | मूंगफली डाली में नहीं आता, ज़मीन के नीचे उगता है! दिवाली के बाद मिलता है मूंगफली | नाकेदार को न फसल कि जानकारी है, न पेड़ो कि, न जंगल की | हम सब मिलकर सरकार बनाई, आज वही सरकार किसके आदेश पर आदिवासियों को उजाड़ रही है, गोली चला रही है?! आदिवासियों की सरकार कहाँ है?

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