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सुधा जी की गिरफ्तारी के पीछे फासीवादी ताकतें शामिल है जो अन्याय के विरुद्ध उठने वाली आवाजों को कुचल देना चाहती हैं – छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन

सुधा भारद्वाज की गिरफ़्तारी के विरोध में एवं उनकी रिहाई की मांग पर छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के द्वारा आज दिनांक 15 जुलाई 2019 को बुढा तालाब रायपुर में धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया .

ज्ञापन में इस सम्पूर्ण मामले में राज्य सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए सार्थक हस्तक्षेप की मांग की गईं l जैसा आपको ज्ञात हैं कि वरिष्ठ अधिवक्ता सुधा भारद्वाज पिछले चार दशकों से छत्तीसगढ़ के आदिवासी, मजदूर, किसान, दलित, अल्पसंख्यक एवं महिलाओं के पक्ष में उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हेतु संघर्ष करती रही हैं . कार्पोरेट लूट व नियम विरुद्ध औधोगिक परियोजनाओं के खिलाफ आदिवासी, किसानों के हितों में उन्होंने उच्च न्यायालय में सैकड़ो मामलों में पेरवी की .

बस्तर में नक्सल हिंसा के नाम पर राज्य प्रायोजित फर्जी मुठभेड़ो एवं महिलाओं पर लेंगिक हिंसा के मामलों को भी उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और न्यायलय के समक्ष उठाया l कई मामलो में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जाँच टीम का भी वो हिस्सा रही हैं l प्रदेश में अल्पसंख्यको और दलितों पर हुए हमलो के मामलो को भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया और उन्हें न्यायालय तक ले गई .

धरने को संवोधित करते हुए नंदकुमार कश्यप ने कहा कि ऐसी स्थिति में जब लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और सरकार कॉर्पोरेट परस्ती में लगी है तो समाज के वंचित समुदायों के उठने वाले विरोध के स्वर और आंदोलनों के साथ सुधा जी हमेशा जुड़ी रही है| मजदूरों की, महिलाओं की तथा मानव अधिकार की लड़ाई में सुधा जी का नेतृत्व सरकार की आँखों में चुभने लगा था इसलिए उन्हें इस तरह से फंसाया गया है| किन्तु सरकार और कॉर्पोरेट यह भूल जाते है की जब लोग एकजुट हो जाते है तो गुलामी की जंजीरे टूट जाती है उसी तरह हम भी अपने संघर्ष के बाल पर सुधा जी को रिहा कराएंगे

राजेन्द्र सायल ने कहा कि पार्टी चुनाव जीतती है और जनता लड़ाई जीतती है अतः पूँजीवाद के लिए सबसे बड़ा खतरा लोकतंत्र है जिसे यह सरकार ख़त्म करना चाहती है लेकिन हम अपनी लड़ाई लड़ेंगे और जीतेंगे भी .

तुहिन देव ने कहा कि सुधा भारद्वाज जिन्होंने जैसी संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद किसी लाभप्रद उच्च संस्थान में कार्य करने के बजाए मेहनतकशों के साथ एकजुट होकर उनके साथ उनके हकों की लड़ाई लड़ी l इस वक़्त देश में संविधान पर हो रहे लगातार हमले, कॉर्पोरेट हितों के लिए कानूनों में बदलाव, सरकारी शिक्षा तंत्र को कमजोर करना, PPP मॉडल के नाम पर देश के अमूल्य संसाधनों का शोषण यह दर्शाता है की देश में अघोषित आपातकाल की स्थिति बन गई है| सुधा दीदी की गिरफ्तारी के पीछे फासीवादी ताकतें शामिल है जो अन्याय के विरुद्ध उठने वाली आवाजों और क्रांति को दबाने की पुर जोर कोशिश कर रहे है| ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि जनता के अन्दर इस क्रातिकारी चेतना का विकास हो और अन्याय के विरुद्ध एक जुट होकर लड़ें |

भारत जन आन्दोलन के बिजय भाई ने कहा कि यह सरकार दावा करती है कि देश की अर्थव्यवस्था आने वाले पांच सालों में पांच लाख करोड़ की हो जाएगी जब कि देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब है और तो और जल जंगल जमीन सब कुछ कॉर्पोरेट को सौंपने के कार्य में लगी हुई है| जो लोग इस का विरोध कर रहे है उन्हें अर्बन नक्सल का नाम देकर साजिश करके झूठे केस में फंसाया जा रहा है| पुलिस की कार्यवाही और कोर्ट की प्रक्रिया ऐसे लोगों को दबाने का कार्य कर रही है जो लोगों के पक्ष में काम करते है|

जिला किसान संघ, राजनांदगांव से सुदेश टीकम जी, ने कहा कि आम लोगों के लिए काम करने वाले लोगों के दमन का यह सारा काम केवल भय पैदा करने के लिए किया जा रहा है| ऐसी स्थिति में मजदूर, किसान और आदिवासियों को अपने हक़ की लड़ाई और भी तेज़ करनी होगी |

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन से आलोक शुक्ला ने कहा कि भीमा कोरेगांव के मुख्य आरोपी संभाजी भिड़े आजाद हैं और निर्दोष लोगों को जेल में बंद किया हुआ हैं l निश्चित तौर पर सुधा भारद्वाज जिस तरह से वंचित वर्ग की आवाज रही और विशेष रूप से कार्पोरेट लूट, दमन और सांप्रदायिक हमलों के खिलाफ संवैधानिक दायरों में रहकर लोकतांत्रिक तरीकों से न्यायव्यवस्था के माध्यम से लड़ रही थी वह भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार के लिए चुनौती बन गईं थी l और मोदी सरकार अपने खिलाफ उठने वाली प्रत्येक लोकतान्त्रिक आवाजों को कुचल देना चाहती हैं l सरकार की यही मंशा स्पष्ट रूप से भीमा कोरेगाँव के केस में नज़र आती हैं और इसी कारण फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपी बनाकर उन्हें जेल भेज दिया गया l

धरने को वरिष्ठ समाजवादी नेता आनद मिश्रा, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ( मजदुर कार्यकर्त्ता समिति) से रमाकांत बंजारे, कलादास डहरिया, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति से बालसाय कोर्राम, नदी घाटी मोर्चा से गौतम बंधोपाध्याय, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम से अरुण पन्ना लाल, छत्तीसगढ़ पीयूसीएल डा. लाखन सिंह, निकिता अग्रवाल , ए पी जोसी, रिनचिन, दलित आदिवासी मंच से राजिम तांडी , संकेत ठाकुर , कला दास डेहरिया , प्रियंका शुक्ला ,एस आर नेताम भारत भूषण पांडे ,राज कुमार साहू,अंकुश परियेकर ,आदि ने संबोधित किया.

                                                     

                                            

                             
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