आकाश श्रीवास्तव patrika com कोरबा @ पत्रिका .

उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की तर्ज कोरबा जिले में ग्रामीण गिनती आंदोलन चला रहे हैं ग्रामीण जानते अगर गिनती की गई तो पेड़ कटाई अनुमति मिल जाएगी , इसलिए भी वन अमला गिनती करने पहुंच है, ग्रामीण काम बंद करवा दे रहे . अब वन विभाग ने भी हाथ खड़े दिए अब इन 500 ग्रामीणों को मनाने आंधप्रदेश सरकार आएगी । बता दें कि आंध्रप्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ( एपीएमडीसी ) 2015 में ही मदनपुर साउथ कोल माइंस का आवंटन हो चुका है ।

ई और एफ ग्रेड का कुल 183 . 38 मिलियन कोयले का है इसके लिए कुल 713 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है । एपीएमडीसी ने प्रति साल 5 . 40 मिलियन टन का उत्पादन का लक्ष्य रखा है । आंध्रप्रदेश सरकार इसे जनवरी 2020 तक शरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही थी । ग्रामीणों के विरोध के बाद इस प्रोजेक्ट के शुरू होने में 6 की देरी हो सकती है प्रस्तावित जमीन में अधिकांश वनभूमि है मदनपुर से लेकर मोरगा से लगी जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया होनी । एपीएमडीसी वन मंत्रालय अब तक क्लीयरेंस नहीं मिला है क्लीयरेंस के लिए विभाग को पहले पेड़ों गिनती रिपोर्ट भेजनी होगी ।

अनुमति मिलने के बाद पेड़ों की कटाई होनी है लेकिन मुख्यालय से 110 किमी दूर एक छोटे से गांव में पेड़ों को बचाने एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है । प्रभावित गांव मोरगा के 500 ग्रामीणों के विरोध की वजह आंध्रप्रदेश सरकार की नींद उड़ गई है ।.

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अब तक 28420 पेड़े की लगभग 15 हजार पेड़ों गिनती = गिनती पूरी की जा चुकी है । लिए हम कई माह से प्रयास कर रहे लेकिन ग्रामीणों के विरोध से काम रुका हुआ है । हमने एसडीएम को जानकारी दे दी हैं । एपीएमडीसी का कार्यालय जल्द ही कोरबा खुलने की सूचना ग्रामीणों की सहमति मिलने बाद अब गिनती कराई जाएगा .

के चौबे , रेंजर , मोरगा , कटघोरा वनमंडल