आज मसाला चाय कार्यक्रम में सुनिए व्यव्गाकार शरद जोशी की रचना “जिसके हम मामा हैं ” 
शरद जोशी का ये व्यंग्य बताता है कि लोकतंत्र के नाम पर राजशाही की तरह चल रही भारत की व्यवस्था में लोक कैसे ठगे जा रहे हैं.

अनुज श्रीवास्तव ने मुबंई में.मसाला चाय की श्रंखला प्रारंभ की थी जिसमें वे देश के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार ,कवि और लेखकों की कहानी, कविता का पाठ करते है.यह श्रंखला बहुत लोकप्रिय हुई ,करीब 50,60 एपीसोड. जारी किये गये. सीजीबास्केट और यूट्यूब चैनल पर क्रमशः जारी करने की योजना हैं. हमें भरोसा है कि अनुज की लयबद्धत आवाज़ में आपको अपने प्रिय लेखकों की कहानी कविताएं जरूर पसंद आयेंगी.

मसाला चाय के इस अंक में सुनिए.. शरद जोशी की व्यंग रचना जिसके हम मामा हैं.