भिलाई . भिलाई इस्पात संयंत्र में गुरुवार को जिंदल स्टील व पॉवर के चेयरमैन नवीन जिंदल पहुंचे । यहां उन्होंने संयंत्र की कुछ प्रमुख इकाइयों का अवलोकन किया । वे यूनिवर्सल रेल मिल में करीब 30 मिनट तक रहे और उत्पादन की प्रक्रिया को बारीकी से देखा । इस मौके पर बीएसपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनिवन दासगुप्ता , महाप्रबंधक प्रभारी , परियोजनाए एके भट्टा भी उनके साथ मौजूद थे ।

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क

     इस बीच बीएसपी के बाद भारतीय रेल को रेलपांत सप्लाई करने वाले नवीन जिंदल के संयंत्र दौरे को लेकर सोशल मीडिया में संयंत्र कर्मचारी सक्रिय हो गए । कर्मियों ने बीएसपी के निजीकरण , यूआरएम जैसा प्लांट दूसरे प्रदेश में लगाने जैसे तमाम सवाल खड़े किए । बीएसपी के रेल उत्पादन में एकाधिकार को झटका देने वाले जेएसपीसीएल के संचालक से क्या आदान - प्रदान किया जाएगा , यह सवाल भी सोशल मीडिया में जमकर चला । | चेयरमैन नवीन जिंदल ने अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित यूनिवर्सल रेल मिल को बारीकी से देखा , यहां लांग्स रेलपांत निर्माण किस तरह से किया जाता है , उसे देखने के बाद लांस रेलपांत को रेलवे के वैगन में किस तरह से लोडिंग किया जाता है , उस प्रक्रिया को देखा । लॉग्स रेलपांत के लिए चुम्बकीय सिस्टम का पूरा एक अलग युनिट है , जहां से रेलपांत को ऑटोमैटिक सिस्टम से विशेष वैगन में लोड किया जाता है ।

युआरएम स्थापित करने की लागत आई 1200 करोड़

बीएसपी में यूआरएम की स्थापना 1200 करोड़ रुपए की लागत से की गई है । बीएसपी के आधुनिकीकरण का यह हिस्सा है । यूआरएम की उत्पादन क्षमता 70 लाख टन सालाना तक है । अब बीएसपी नई यूनिवर्सल रेल मिल के सहारे दुनिया की सबसे लंबी रेल पटरियों का वाणिज्यिक स्तर पर उत्पादन शुरू कर चुका है । बीएसपी ही सेल की एकमात्र इकाई है ,

130 मीटर सिंगल रेलपांत करते हैं तैयार यूआरएम में

260 मीटर लंबी लॉन्स रेलपांत की सप्लाई की क्षमता

21 वैगन होते हैं , एक रैक में

48 नग लॉन्ग रेलपांत एक रैक में होती है लोड

260 मीटर लंबी रेलपांत का किया जा रहा उत्पादन

बीएसपी पुराने मिल ( आरएसएम ) से 65 मीटर लंबी पटरियों का उत्पादन कर उसे वेल्डिंग के जरिए जोड़कर भारतीय रेल की । मांग को पूरा करती रही है , लेकिन नए यूआरएम के शुरू होने से कपनी अब 130 मीटर । लंबी पटरी का उत्पादन करने में सक्षम हो गई है और अब उसे भारतीय रेल के लिए 260 मीटर लंबी पटरी की आपूर्ति केवल एक जोड़ ( वेल्डिंग ) के साथ कर सकती हैं । इसे खासकर जिंदल ने देखा .


महामाया को देखा

जिंदल ने देश की सक्से बड़े ब्लास्ट फर्नेस में शुमार महामाया ब्लास्ट फर्नेस – 8 , रेल मिल में एण्ड फोर्जिंग प्लांट , इस्पात गलन शाला – 1 को भी देखा । उन्होंने अधिकारियों के साथ ज्ञान व अनुभव को साझा कर इस्पात उत्पादन व उत्पादकता को बढ़ाने संबंधी प्रयासों पर चर्चा की ।

सुरक्षा का अवलोकन

चेयरमैन ने संयंत्र में सबसे पहले संयंत्र के मेनगेट के पास में स्थापित किए सेफ एरॉस सेंटर सुरक्षा कवच का अवलोकन किया । रामें अतिथियों को संयत्र भ्रमण में निहित सुरक्षा संबंधी जानकारी और अपेक्षित व्यवहार के विषय में विस्तार से बताया जाता है ।

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