छत्तीसगढ़ में यूरेनियम की माइनिंग को लेकर केंद्र और राज्य आमने – सामने ; यूरेनियम कारपोरेशन आँफ इंडिया के प्रस्ताव पर विरोध कर सकती है छत्तीसगढ़ सरकार .

छत्तीसगढ़ के 3986 मीट्रिक टन यूरेनियम के भण्डार पर परमाणु ऊर्जा विभाग की निगाह.

पत्रिका न्यूज़

रायपुर . रूस , कजाकिस्तान और फ्रांस से बड़े पैमाने पर यूरेनियम की खरीदी को अंजाम देने के बाद भारत सरकार का परमाणु ऊर्जा विभाग यूरेनियम के उत्पादन में आत्मनिर्भर होने की कोशिशे कर रहा है । परमाणु ऊर्जा विभाग ने छत्तीसगढ़ समेत देश के 11 प्रदेशों की 44 खदानों में 3 लाख 34 टन यूरेनियम डिपाजिट खोज निकाला है अब इनकी माइनिंग की तैयारी चल रही है , वहीं सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने साफ तौर पर कहा है कि हम अपने स्थानीय नागरिकों के हितों और वन नियमों के साथ कत्तई समझौता नहीं करेंगे ।

गौरतलब है कि यूरेनियम कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड ने 2031 – 32 तक यूरेनियम के उत्पादन में 10 गुना वृद्धि का लक्ष्य रखा है जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की जात्रता खदान में भी माइनिग शुरू करनी है । डॉ जितेन्द्र सिंह ने पिछले वर्ष सदन को इस बात की जानकारी भी दी थी .इस बीच यूरेनियम कारपोरेशन आफ इंडिया ने छत्तीसगढ़ की जजावल परियोजना की फिजिबिलटी कर ली है । बताया जाता है कि इसे जल्द ही पर्यावरण मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा । राज्य में कुलनियम का कुल भण्डार 3986 मीट्रिक टन है .

प्रस्तावित प्रोजेक्ट में 600 हेक्टेयर भूमि सुरक्षित वन क्षेत्र प्राप्तीसगढ़ वन में मानिंग को लेकर यूरेनियम कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड द्वारा सर्वे करके जो पी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की गई हैं उसमे से तकरीबन 600 हेक्टेयर भूमि सुरक्षित वन क्षेत्र में है जिसको लेकर छत्तीसगढ़ वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी कंपनी द्वारा हमें कोई प्रस्ताव नहीं मिला है । लेकिन जो भी खनन या अन्वेषण का काम है वह वन अधिनियम के अंतर्गत ही होगा । गौरतलब है कि राज्य में कोयला खदानों को एलिफेट कारीडोर में दिए जाने पर प्रदेश में लगातार बवाल मचता रहा है । राज्य सरकार भी जंगल जमीन पर नई खदाने शुरू करने के पक्ष में नहीं है । विगत 22 मई को पड़ोसी तेलंगाना में पर्यावरण मंत्रालय ने परमाणु ऊर्जा विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी हैं जिसमें वहां के अमराबाद टाइगर रिजर्व के 82 वर्ग किलोमीटर में यूरेनियम की माइनिंग के लिए सर्वे और अन्वेषण का प्रस्ताव है । फारेस्ट एडवायजरी कमिटी ने प्रस्ताव को कुछ कमियों के बावजूद यह कहकर नीतिगत
मंजूरी दी गई है कि यह प्रस्ताव राष्ट्रीय महत्व का है ।

छत्तीसगढ़ में कहां कितना डिपाजिट

स्थान मात्र ( मीट्रिक टन में )

जजावल – 1530

बोदल – 1438

धूमत धाबी – 500

भंडारी टोला – 518

20 साल के लिए दी जाएगी माइनिंग लीज

बताया जा रहा है कि परमाणु ऊर्जा विभाग देश में 10 हजार 500 करोड़ की लागत से 13 परियोजनाओं में यूरेनियम के खनन की योजना बना रहा हैं इन परियोजना में छत्तीसगढ़ की । जजावल परियोजना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है । जजावल में माइनिग लीज 20 साल के लिए ही होगी इस परियोजना के लिए पानी जनावर नाले और महा नदी से लिया जाएगा वहीं छत्तीसगढ़ सरकार बिजली मुहैया कराएगी । लेकिन जो सबसे बड़ा खतरा है वह यह है कि समूची माइनिंग रिजर्व फारेस्ट में होनी है जहाँ जैव विविधता का भण्डार है कि सूरजपुर जिले में यूरेनियम की खोज 1969 में शुरू की गई थी । जो कि लगातार जारी रही । परमाणु ऊर्जा विभाग ने छत्तीसगढ़ में माइनिंग को आर्थिक दृष्टि से बेहद लाभप्रद माना है । हांलाकि यूसीआईएल का कहना है कि छत्तीसगढ़ में समूची माइनिंग अंडरग्राउंड होगी .

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राजनांदगांव में बंद हुआ अन्वेषण

परमाणु खनन महानिदेशालय द्वारा इसके पहले राजनांदगांव जिले के बोदल में भी कुछ वर्ष पूर्व सर्वे का काम शुरू किया गया था लेकिन अनार्थिक होने की क्जह से इसे बीच में ही बंद करना पड़ा । यूरेनियम कारपोरेशन फिलहाल जजाल परियोजना डीपीआर पर काम कर । रहा है । जल्द ही इनकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट परमाणु ऊर्जा से जुड़ी कमेटियों को और फिर पर्यावरण मंत्रालय को अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए भेजी जाएगी ।

छत्तीसगढ़ में वन नियमों का पालन हर कीमत पर होगा .अभी तक यूरेनियम कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है वनों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है । हम जो भी गाइड लाइन बनी है उस पर काम करेंगे .

राकेश चतुर्वेदी ,
मुख्य प्रधान वन संरक्षक , छत्तीसगढ़

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