बिलासपुर की एक नाबालिक दलित  बालिका  के साथ लगातार सफेदपोश गिरोह द्वारा  जबरन देह व्यापार और यौन हिंसा में धकेलने के प्रकरण में मुंगेली पुलिस का पक्षपात पूर्ण व्यवहार की शिकायत लेकर पीयूसीएल छत्तीसगढ़ की एक टीम पुलिस आई जी प्रदीप गुप्ता से मिला और उन्हें पुरे प्रकरण की तथ्य और व्योरेवार जानकारी दी तथा मांग की इस पुरे मामले के निष्पक्ष जाँच की जाये ,जिन लोगों ले नाम और स्थान की बात बालिका ने की है उसकी जाँच करें और उन्हें गिरफ्तार किया जाये ,साथ ही मुंगेली थाने में पक्षपात करने वाले पुलिस कर्मीयो के खिलाफ कार्यवाही करने एवं बालिका की सुरक्षा तथा उसको कानूनन मुआवजा की बात की आई जी प्रदीप गुप्ता ने बात गंभीरता से सुनी और प्रतिनिध मंडल को आश्वाशन दिया की पुरे मामले की निष्पक्ष जाँच की जाएगी ,मुंगेली के एस पी और सम्बंधित पुलिस अधिकारीयों को यहाँ बुला के उनसे बात करेंगे साथ ही बालिका की सुरक्षा तथा मुआवजा की कानूनन व्ययस्था की जाएगी.

प्रतिनिधि मंडल ने पुरे प्रकरण को ज्ञापन में निम्न तरीके से स्पष्ट किया है ,जिसमे सभी आरोपियों के नाम जो बालिका ने पियिसिएल की जाँच टीम को बताये और पुरे घटना क्रम का उल्लेख किया है ,वह निम्नानुसार है.

प्रतिनिधि मंडल में  छत्तीसगढ़ पीयूसीएल के अध्यक्ष डिग्री प्रसाद चौहान ,अधिवक्ता रजनी सौरेन ,आशीष बेक  ,सामाजिक कार्यकर्त्ता  .रिनचिन, विजय शंकर पात्रे ,डा. लाखन सिंह शामिल थे.

ज्ञापन में तथ्य निम्न हैं .

  1. यह कि वर्ष 2017 से बालिका अपनी सहेली रानी के साथ  बिलासपुर में रहती थी , और कपड़े की दुकान में काम करती थी । २०१७  में उसकी मुलाकात दीपक धमेजा  से हुई . दीपक धमेजा ने बालिका को अच्छा काम दिलवाने ने नाम से अपने साथ  मुगेली ले आया ।
  1.  मुगेली में बालिका अंशु  पाण्डेय ( दीपक धमेजा  की  पत्नी  ) , अनामिका पाण्डे ( अंशु पाण्डेय  की  बहन ) , एवं अन्य लोगों के  साथ रहती थी । मुंगेली में करीब एक हफ्ते के बाद दीपक धमेजा  ने बालिका के साथ बलात्कार किया .
  1. मुख्य घटना स्थल  मुंगेली  में जितने लोग रहते  थे ,सबको  अंशु पाण्डे अपने गोद लिये बच्चे कहती थी । मुंगेली स्थित निवास पर  कई पुरुष आते थे , एवं बालिका के साथ बलात्कार करते थे । अशु पाण्डे बालिका को मुंगेली में एवं बाहर अलग – अलग जगहों पर पुरुषों ” के पास ले जाती थी , जहां उसके साथ कई बार बलात्कार हुआ है .

४.  मुंगेली  में 6 महिने रहने के बाद बालिका को उसलापुर  स्थित गोखला नाला  के पास सरकारी स्कुल  के पीछे एक किराये  के मकान में अन्य लड़कियों के साथ रखा गया । यहां से बालिका  एक बार भागने का प्रयास किया पर असफल रही । बालिका को अपने घर वालों के पास मिलने नहीं जाने दिया जाता था ।

  1. गोखला नाले वाले घर को छोड़ सभी लोगों को फिर से अभिषेक विहार उस्लापुर में किराये के मकान में रखा  गया । संयोग से बालिका की रिश्तेदार भी वहां पड़ोस में रहती थी और दोनों की बातचीत होने लगी ,यह  देखकर अंशु पाण्डे और दीपक घमेज़ा ने अभिशेक विहार छोड़ दिया और वापस गोखले नाला  के पास वाले घर पर आ गये करीब तीन महिने पहले बालिका वहां से भाग कर अपने घर वापस आई ।
  1. इसके पश्चात – बालिका द्वारा पहली बार घटना की शिकायत 25 . 05 . 19 सरकंडा  , थाने में की गयीपरन्तु थाने के पुलिस कमियों ने शिकायत दर्ज नहीं करते हुए बालिका के चरित्र पर ही प्रश्न उठाया व उसे मुंगेली थाने में अपनी शिकायत दर्ज़ करवाने को कहा . पुलिस की इस असम्वेदन शीलता की  वजह से बालिका की माता का मनोबल टूट गया तथा परिणामस्वरुप   बालिका स्वयं अकेली मुंगेली थाना गयी ।
  1.  दिनांक  30 . 06 .20 19 को मुंगेली में  उसकी पुलिसकर्मी ( यादव मैडम ) से मुलाकात हुई जिन्होंने उससे पूछताछ की . पूछताछ के दौरान  जब बालिका ने आरोपी अंशु पाण्डेय के   बारे में बताया तो पुलिस कर्मी ने अंशु पाण्डेय का नंबर माँगा और बहार निकलकर अंशु पाण्डेय से आधा गनते बातचीत की ,वापस आकर उसने बालिका से कहा की वह झूठ बोल रही है और उसे बे वज़ह फंसा रही है.
  1. इस दौरान एक अन्य दो स्टार पुलिस कर्मी आया बालिका से बातचीत की और उसे मैडम यादव के पास ले गए ..और पूछा की अभी तक इस मामले के रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई .इस पर यादव मैडम भड़क गई और बालिका के बाल खिंच कर लाठी से कई बार मारा .इसके बाद थानेदार ने बालिका को बुलाकर 50-60 हज़ार रुपये लेकर मामले को रफा दफा करने की सलाह दी.बालिका ने अपनी माँ को फोन किया और जिस पर उनकी माँ ने कुछ और लोगों से सहायत मांगी और एक पत्रकार द्वारा हस्तक्षेप किया गया .फिर बालिका उस पत्रकार के साथ मुंगेली से बस में बैठकर बिलासपुर निकल गई. रस्ते में उसे सकरी थाने से फोन आया की उसके खिलाफ एक शकायत प्राप्त हुई है की वह अंशु पाण्डेय के पैसे लेकर फरार हो गई है और उसकी बहन को फर्जी केस में फंसने के बदले में पैसा मांग रही हैं.
  1. अगले दिन दिनांक 4.06.2019 को वह सकरी थाने गई तो वहां पुलिस राजीनामा की बात करने लगी .और कहा की केस 2-3 महीने पुराना होने के कारन कोर्ट केस नहीं बनेगा ,थाने में बालिका से कोरे कागज़ में हस्ताक्षर करवाए गए , उस समय कई आरोपी  [ अंशु पाण्डेय ,काजल और दीपक धनेजा ] थाने में उपस्थित थे तथा राजीनामा करने का दबाब बनाने लगे .
  1. दिनांक 27.06.2019 को बालिका का  मिडिया में  बयान आने के बाद अगले दिन सरकंडा थाने में उसे बुलाया गया एवं पुलिस कर्मी के साथ उसे मुंगेली थाने ले जाया गया .और  ऍफ़ आई आर दर्ज़ किया गया हैं.किन्तु बालिका के बताये अनुसार सभी आरोपियों के नाम रिपोर्ट में नहीं लिखे गए है तथा बालिका कुछ लोगों को केवल चेहरे से पहचानती है नाम नहीं जानती हैं ,उस आधार पर भी रिपोर्ट में आरोपियों के नाम दर्ज़ नहीं किया गया .
  1. बालिका ने स्पष्ट रूप से कुछ लोगों के नाम बताये थे ,एवं कुछ लोगों को पहचाने की बात की थी .  और कहा की वो उनका पता जानती है और पुलिस अगर उस ले जाये तो वह उन लोगों के ठिकानों का पहचान कर लोगों को पहचान कर सकती है । बालिका ने इन व्यक्तियों के बारे में बताया – बीज्जू आर्या , नरेन्द्र लूनिया , सरकण्डा का सरकारी वकील रेलवे कॉलोनी में रहता है .

12 . यह कि बिलासपुर सरकंडा स्थित बाल संरक्षण गृह / बाल गृह कल्याण समिति , जहाँ बालिका को आश्रय दिया गया था वहां उसके प्रभारी द्वारा मना करने के बाबजूद नहाते समय एवं अन्य समय वीडियो बनाया गया हैं .

  1.  पुलिस द्वारा पहचान परेड में भी जानबूझ कर पीड़िता को मुख्य आरोपी के रूप में मुन्ना खान की पहचान करने का दबाब बनाया गया , जबकि मुख्य आरोपी पहचान परेड में उपस्थित ही नहीं था । मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक भी यह अफवाह फैलाना प्रतीत होता है की   मामले के मुख्य आरोपियों को बचाने के लिये  दुर्घटना में मृत व्यक्तियों को आरोपियों के रूप में चिन्हित किया जा रहा है.

इन सभी तथ्यों को देखते हुए की यह मांग है

  1.  मुंगेली थाने में कार्यरत पुलिस कर्मियों एवं अधिकारियों के अपराधिक कृत्यों को देखते हुए मामले की जांच को एक  उच्चस्तरीय विशेष  जांच टीम को सौंपना उचित होगा एवं मुंगेली थाना में पदस्थ पुलिसकर्मियों पर उचित कार्यवाही सुनिश्चित करें .
  1.  अभी तक मामले के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है . उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि आरोपी देह व्यापार के धंधे में संलिप्त थे , एवं अन्य नाबालिग युवक – युवतियों को अपना शिकार बनाये हुए है । उचित कार्यवाही कर समस्त पीड़ितों को रेस्क्यू / बंधन मुक्त कर उनके उचित पुर्नवास के लिए कदम उठाया जाये ।

3..  जब से बालिका ने शिकायत की है वह असुरक्षित है । आरोपीगण ताकतवर और पैसे वाले है और बालिका पर नज रख रहे है । बालिका एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ता  और अधिवक्ता जो उसकी सहायता कर रहे है उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किया जाये .

  1. यह की बालिका को कानून और शाशन के योजनाओं के मुताबिक मुआवजा एवं पुनर्वास राहत तत्काल उपलभ्द कराई जाये .
  1. पिछले कुछ दिनों से बालिका के खिलाफ विभिन्न थानों में झूठे केस दर्ज़ करने की कोशिश की जा रही हैं.यह ध्यान देने की जरुरत है की वह एक नाबालिग और मानव तस्करी एवं जबरन देह व्यापार की शिकार हैं. ऐसी परिस्थति में दबाब पूर्वक उससे कराये गए  अवांक्षित कृत्य के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया नहीं जा सकता .

 यह भी उल्लेखनिय है की ऐसे  मामलों में अक्सर ऐसा देखा गया है कि पीडिता की विश्वसनीयता को कम करने और उसे डराने के  उदेश्य से ही  फर्जी आरोप लगाये जाते हैं.ऐसे फर्जी केस निरस्त किया जाये .

7 यह कि दर्ज़ की गई प्रथम सुचना पत्र में बलात्कार ,अपहरण ,मानव तस्करी के समुचित धाराओं के तहत कार्यवाही  की जाये . हमारी मांग है की भारतीय दंड विधान सहित  उक्त विशेष क़ानूनी  प्रावधानों के तहत भी धाराओं को जोड़ा जाना चाहिए .