नितिन सिन्हा की रिपोर्ट

रायगढ:- एक ओर जहां एसईसीएल रायगढ़ एरिया मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त कर रखा है तो दूसरी तरफ secl अपने ही कंपनी एम्पलाई को पेयजल की व्यवस्था कराने में नाकामयाब रही है.


पूरा मामला रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र का है। जहां मिनी रत्न प्राप्त एसईसीएल कोयले का लगातार खनन तो करता आ रहा है,उसने खनन के लिए बकायदा कुशल अकुशल हर वर्ग के कर्मचारियों की नियुक्तियां भी कर रखी है। जहां इन कर्मचारी के निवास के लिए बकायदा तीन जगहों नवापारा,एडू,डोमनारा पर आवासीय परिसर भी बनवाया है। जहां एक परिसर में डेढ़ सौ से दो सौ मकान ग्रेडेशन के आधार पर B टाइप,C टाइप M टाइप के रूप में निर्माण करवाया गया है। नियमतः इन मकानों में बकायदा बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बिजली,पानी आदि का प्रबंध किया जाना चाहिए था।

किंतु आज तक पेयजल का प्रबंध कराने में एसईसीएल प्रबंधन नाकामयाब रहा है। वही 134 मकान के आवासीय परिसर धरम कॉलोनी में स्वच्छ पेयजल की किल्लत अभी भी बनी हुई है। कालोनी के 134 परिवार आए दिन पानी को लेकर प्रबंधन को कोसते दिखते हैं। इतना ही नहीं नवापारा कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारी परिवार के लोग 3 माह से पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। यहां रहने वाले लोगों को दो रोज से तीन रोज में एक बार ही पानी दिया जा रहा है।। एक बार मिलने वाले पानी में ही कर्मचारी परिवारों को 2 दिन से 3 दिन की आवश्यकता पूरी करनी पड़ती है। धरम कॉलोनी के निवासियों की बात करें तो उनका कहना है कि यहां कॉलोनी में पानी के विकराल समस्या काफी लंबे समय से बनी हुई है। पहले यहां धर्म खदान से पानी फिल्टर कर सप्लाई किया जा रहा था, किंतु धर्म खदान के बंद होते ही पेयजल के संकट गहरा हो गया है।। कालोनी में जो बोर हैं वह गर्मी के मौसम में वाटर लेवल घटने के कारण पानी देना बंद कर चुका है।। वहीं प्रबंधन द्वारा टैंकर में लात खुली खदान का दूषित कोयला युक्त पानी भरकर कॉलोनी में पानी सप्लाई का कार्य किया जा रहा है। सामान्य तौर पर यह पानी उपयोग के लायक बिल्कुल भी नहीं है ।। तब भी लात खुली खदान से कोयला युक्त पानी भरकर उसे पेय जल के लिए सप्लाई किया जा रहा है।। जबकि इस पानी से नहाने पर शरीर में खुजली होने लगती है।। अजीब से महक वाले इस दूषित पानी का उपयोग करना कालोनी वासियों की मजबूरी हो गई है।।

ज्योति कुमार अकेला महामंत्री हिंद मजदूर सभा:-


छाल धरम कॉलोनी में लगभग 3 माह से पेयजल के संकट छाया हुआ है यह संकट धरम खदान के बंद होने के बाद से ही हुआ है जहां एसईसीएल प्रबंधन पेयजल संकट निदान के लिए बोर खनन का कार्य कराया तो जरूर है, किंतु पानी नहीं निकला तब जाकर टैंकर से पानी लाया जा रहा है और उसे ग्राउंड टंकी में डाला जाता है और फिर ओवरहेड टंकी में सप्लाई कर दिया जाता है। जहां से कॉलोनी के लिए पानी सप्लाई किया जाता है। किंतु यह पानी फिल्ट्रड नहीं है। इस कारण यह पानी पीने के लायक तो बिल्कुल ही नहीं है।

बेनु गबेल:-

पेय जल की समस्या नवापारा कालोनी में कुछ महीने थी किन्तु अब उस पर काफी सुधार होने लगा है।

रामायण कुलदीप:-

गर्मी के दिनों में हर जगह पानी की मारा मारी लगी रहती है और यह समस्या पहले यहाँ भी थी।अभी तो स्थिति सामान्य है।

राजकुमार चंद्रा :-

पेय जल संकट को लेकर यूनियन के माध्य्म से आवाज उठाई गई थी।जिस पर प्रबंधन ने आज तक अमल नहीं किया। वही अभी कुछ दिन पहले जानकारी मिली थी कि बोर खनन कर धरम कालोनी में पेय जल संकट से निदान दिलाया जाने का कार्य किया जा रहा है।पेय जल संकट से धरम कालोनी के अलावा secl नवापारा के कालोनी में भी है।

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