आज मसाला चाय कार्यक्रम में सुनिए रमाशंकर यादव “विद्रोही” की कविता “धर्म” दिलीप मंडल लिखते हैं, “प्रोफ़ेसरों. रमाशंकर यादव नाम का वह मासूम लड़का सुल्तानपुर, यूपी से पढ़ाई करने के लिए जेएनयू, दिल्ली आया था. तुमने रमाशंकर यादव को पढ़ाई पूरी नहीं करने दी. वह अपनी डिग्री कभी नहीं ले पाया. क्या विद्रोही प्रतिभा से डरते थे तुम? अपने निठल्लेपन का अहसास था तुम्हें? अपने बौद्धिक बौनेपन का भी? लेकिन यह तो तुम्हें दिख रहा होगा प्रोफेसर कि एक तरफ अपार लोकप्रियता बटोरे विद्रोही की रचनाएं हैं और दूसरी तरफ़ हैं तुम्हारी किताबें, जो सिलेबस में न हों, तो चार लोग उन्हें नहीं पढ़ेंगे. विद्रोही बिना डिग्री के तुमसे कोसों आगे निकल गया. छूकर दिखाओ. लिखो वैसी एक रचना.. है दम?”  अनुज श्रीवास्तव .

अनुज श्रीवास्तव ने मुबंई में.मसाला चाय की श्रंखला प्रारंभ की थी जिसमें वे देश के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार ,कवि और लेखकों की कहानी, कविता का पाठ करते है.यह श्रंखला बहुत लोकप्रिय हुई ,करीब 50,60 एपीसोड. जारी किये गये. सीजीबास्केट और यूट्यूब चैनल पर क्रमशः जारी करने की योजना हैं. हमें भरोसा है कि अनुज की लयबद्धत आवाज़ में आपको अपने प्रिय लेखकों की कहानी कविताएं जरूर पसंद आयेंगी…

मसाला चाय के इस अंक में सुनिए..