छत्तीसगढ मे जो हो जाये वो कम हैं , 20 लाख का बांध ही गॉव से गायब हो गया

छत्तीसगढ मे जो हो जाये वो कम हैं , 20 लाख का बांध ही गॉव से गायब हो गया , बांध बना , उसकी स्वकृति जारी हुई ,राशि रिलीज हुई , पूर्णता प्रणाम पत्र जारी हुआ , फोटो भी जमा हुये ,निरीक्षण भी हुआ , लेकिन जब गॉव मे गये तो बांध ही नहीं मिला ,है ना कमाल् .  चलो हम बताते है की किस्सा क्या हैं,
बलराम जिले के राजपुर ब्लॉक मे बांसदोह नाले पे मनरेगा के तहत 20 लाख 88 हजार की स्वीकृति से नाले पे बांध बनाने की स्वकृति रामानुगंज के सिंचाई विभाग डिविजन को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई .विभाग ने मास्टररोल [ फर्जी ] के आधार पे बांध बनाया ,14 मार्च 13 को बांध पूरा हो गया ,विभाग ने अन्य और कामो के साथ इस बांध की भी पूर्णता का प्रमाणपत्र जारी कर दिया .उपयोगिता प्रमाणपत्र ,निरीक्षण प्रतिवेदन और बांध के ढेर सारे फोटो भी विभाग ने जमा करा दिया . मतलब् सरकारी भाषा मे बांध का निर्माण पूरा कर दिया गया .
अब आया गॉव के लोगो की भूमिका ,जब पता चला तो गॉव के लोग बांध को ढूंडने लगे ,वे लोकपाल के पास गये तो सारा भंडा फोड़ हुआ .
अब लोकपाल विभाग से पूंछ रहे है की भई बांध कहाँ गया उसे ढूंड के लाओ , सारा मामला फर्जी वाड़े का हैं .
दिनेश त्रिवेदी ने इस सारे फर्जी वाड़े का खुलाशा किया है ,वो कह रहे है की हम पुलिस मे रिपोर्ट दर्ज़ कराएंगे,जब पूरे रेकार्ड बता रहे है की बांध बना है तो वो चला तो कहाँ चला गया ,

 

 

अब चलिये बांध के बाद नहर पे आते हैं , साड़े छ करोड़ का भुगतान लेकिन नहर जगह से नदारत , अभी अभी आपने हमारे राज्य मे बांध की कहानी सुनी अब आपको हम नहर की बात बताते हैं , हमारे छत्तीसगढ मे तो पिछले 12 साल से अच्छे दिन चल रहे है ,मोदी तो अभी ये बात करते है ,यहा रमन सिंह तो कब के रामराज्य ले आये हैं .
जांजगीर चांपा जिले के अड़भार क्षेत्र के 8-10 गॉव मे नहर का क़ाम होना था , नहर लायनिंग के लिये सिंचाई विभाग ने बिना जांचे परखे यानी बिना क़ाम देखे ठेकेदार को 6,5 करोड़ का भुगतान कर र्दिया , मगर जब गॉव वालो ने वहा जाके देखा तो वहां नहर ही नहीं थी .लायनिंग की जगह कुछ गढ़े नजर आ रहे थे .कही नहर का नामोनिशान ही नहीं था , अड़भार क्षेत्र के कटारी,माइनर ,सकरी माइनर ,मालखारोदा रोड ,भागोडीह माइनर ,ज़ोरबा माइनर ,ओड़ेकरा माइनर सहित 8-10 गॉव मे नहर लाइनिंग के लिये निविदा मंगाई गई थी ,जिसे शक्ति के अमर अग्रवाल के महामाया कंस्ट्रेक्‍शण कम्पनी को ठेका मिला , लेकिन उस्न एकं अपने पेटी ठेकेदार को दे दिया ,उस पेटी ठेकेदार ने क़ाम के नाम पे मटेरियल खपा दिया और क़ाम ना के बराबर किया ,सोचा होगा की सैया बने कोतवाल तो डर काहे का .
कमाल् की बात ये है की ठेकेदार ने आज तक कार्य पूर्णता की रिपोर्ट नहीं दी है ,लेकिन अमर अग्रवाल को पूरे 6,5 करोड़ का भुगतान हो गया ,
तुरंत फुरत मे जब पोल खुली तो सरकार ने 9 इंजीनियारो कोनिलंबित कर दिया , मामला ठेकेदार की धोकगढ़ी का है ,लेकिन भुग्त रहे है इंजीनियर , भई उस ठेकेदार को ब्लेक लिस्ट करो उससे पूरा पैसे वापस लो .दंड निर्धारित करो ,सिर्फ इंजीनियारो पे कुछ दिनो के लिये कार्यवाही से क्या होगा,

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