छत्तीसगढ़ पी0 यू0 सी0 एल0 राज्य में बिजली कटौती पर अफवाह फैलाने के आरोप में , जिसके पीछे सरकार और इन्वर्टर कंपनियों के मध्य गठजोड़ का आरोप लगाया गया है, के मामले में डोंगरगढ़ राजनांदगांव निवासी मांगेलाल अग्रवाल के खिलाफ राजद्रोह की धारा 124( अ ) और भा.द.वि. की धारा 505 जे तहत गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करता है । ज्ञात हो कि छ0 ग0 राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित के शिकायत पर एफ आई आर दर्ज किया गया था ।

विदीत हुआ है कि राजद्रोह की धारा 124( अ ) वापिस ले लिया गया है जो के स्वागतेय है, तथापि पी0 यू0 सी0 एल0 धारा 505 की वापसी के साथ ही मांगेलाल अग्रवाल के रिहाई की भी मांग करता है ।

राजद्रोह की धारा 124 ( अ ) के संबंध में स्थापित कानून के बावजूद छ0रा0वि0वि0 कं0 म0 और पुलिस द्वारा एफ आई आर की कार्यवाही का पी यू सी एल निंदा करता है । सुप्रीम कोर्ट ने साल 1962 में एक मामले की सुनवाई के बाद, जब धारा 124 ( अ ) की वैधानिकता को चुनौती दिया गया था, में अवधारित किया गया है कि राजद्रोह की प्रकृति तभी होगा जब वह वास्तविक रूप से हिंसा के लिए उत्प्रेरित करता हो और वह हिंसा का कारक हो । दुर्भाग्य से सरकारें राजद्रोह के कानून का दुरुपयोग भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के लिए कर रही हैं । गत दो वर्षों के भा ज पा शासन में छत्तीसगढ़ में राजद्रोह के कानून की धारा 124 ( अ ) का गंभीर दुरुपयोग किया गया था । पत्रकार कमल शुक्ला को उनके फेसबुक पोस्ट , जो कि किसी को हिंसा के लिए उत्प्रेरित नही किया था, के खिलाफ यह धारा लगाया गया था, यह धारा उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी लगाया गया था जिनके परिजन और नागरिक पुलिस के बेहतर कार्य की परिस्थितियों के लिए शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन आयोजित किये थे ।

इसके अलावा भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों को दबाने के लिए धारा 124( अ ) का दुरुपयोग किया जाता है, बहुतायत संख्या में निर्दोष आदिवासियों के खिलाफ राजद्रोह का अभियोग लगाया गया है, उनमे से अधिकतर को वर्षों जेलों में निरुद्ध रखने के बाद अंततः दोषमुक्त किया जाता है । राज्य की नयी सरकार ने इन अवैधानिक गिरफ्तारियों और अभियोग को मानते हुए आदिवासी विचाराधीन बंदियों के समस्त मामलों की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के भूतपूर्व न्यायाधीश ए0 के0 पटनायक के अध्यक्षता में एक एक कमेटी का गठन किया गया है ।

 मांगेलाल अग्रवाल के खिलाफ धारा 505 के तहत अपराध भी तथ्यहीन है । सरकार के खिलाफ इस विचारहीन अपराध में वह अकेले लिप्त है, जहां बिना किसी ठोस आधार पर आम  जनता द्वारा विश्वास किये जाने और उस अकेले के कहे अनुसार लोकशान्ति भांग होने की कोई गुंजाइश नही है ।

हालांकि मांगेलाल अगवाल द्वारा किये गए कथन का पी0यू0सी0एल0 कतई समर्थन नही करता है बावजूद इसके उसके रिहाई की हमारी मांग स्पष्ट है ।

पी0यू0सी0एल0 छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार को यह भी स्मरण कराना चाहता है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ( आई एन सी  ) ने राजद्रोह की धारा 124 ( अ  ) को वापिस लेने का स्पष्ट वायदा किया था । पी यू सी एल सरकार से यह अपील करती है कि सरकारी दफ्तर और पुलिसिया तंत्र कानून के नियमो के खिलाफ  कार्य नहीं करें .

 पी यू सी एल गत कई वर्षों से राजद्रोह कानून के दुरुपयोग का दस्तावेज़ीकरण और राजद्रोह के कठोरतम प्रावधानों को वापिस लेने अभियान करता रहा है । गत 30 अगस्त 2018 के भारतीय विधि आयोग के प्रतिवेदन के आलोक में हम भारत सरकार से धारा 124 ( अ ) को वापिस लेने आह्वान करते हैं ।

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रजनी सोरेन
संयुक्त सचिव
एवं
डिग्री प्रसाद चौहान
अध्यक्ष
छ0ग0 पी0 यू0 सी0 एल0