चे ग्वेरा के सुपर ब्रांड रूप और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल के विरोध में ‘चे’ के बच्चों उनके विचारों की रक्षा के लिए आगे आना पड़ा.

प्रोम्थियस प्रताप सिंह की प्रस्तुति

इसे विडम्बना ही कहेंगे कि अपनी मौत के चालीस वर्षों के बाद चे ग्वेरा का नाम सुपर ब्रांड के रूप में उभरा है इसके व्यावसायिक इस्तेमाल के विरोध में ‘चे’ के बच्चों उनके विचारों की रक्षा के लिए आगे आना पड़ा।


एक क्रांतिकारी के सुपर ब्रांड बनने के तथ्य को जिस दुःखद व मार्मिक ढंग से उनकी 47 वर्षीय बेटी अलेइदा ग्वेरा ने उजागर किया, उसने पूरी दुनिया के सामने बाजार के इस नए क्रूर चेहरे को उजागर कर दिया है। चे ग्वेरा हर दौर में नौजवानों के महानायक हैं परन्तु त्रासदी यह कि उनकी इस महानायक छवि को इस्तेमाल करने का लालच उनका सबसे बड़ा शत्रु पूँजीवाद भी नहीं छोड़ पाया। उनके तस्वीरों से छपी टी शर्टों से पूरी दुनिया के बाज़ार अटे पड़े हैं, वहीं इंग्लैंड की वोदका, फ्रांस की शीतल पेय व स्विट्जरलैंड के मोबाइल फोनों पर चे ग्वेरा के नाम का व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है। इसी व्यावसायिक इस्तेमाल को बंद करने की अपील चे गवेरा व क्यूबन क्रांतिकारी आलेदिया मार्क के चार बच्चों में से दो ने क्यूबन सरकार द्वारा आयोजित इंटरनेट प्रेस सम्मेलन के माध्यम से पिछले दिनों की। वह अत्यंत भावुक क्षण था, जब उनके बच्चों को कहना पड़ा कि ‘हमारे पिता का व्यावसायिक इस्तेमाल बन्द करो। हमें सम्मान चाहिए, पैसा नहीं।’


जिस प्रकार भारत में व्यापारिक कम्पनियाँ, दुकानदार घर आदि अपने ब्रांड उत्पादों, मकानों, दुकानों आदि के नाम पौराणिक मिथकों शिव, गणेश, पार्वती, राम, कृष्ण, हनुमान, दुर्गा, लक्ष्मी आदि के नाम पर भावनात्मक प्रतिबिम्बों का सहारा ले रही हैं ताकि उनके उत्पादों की मार्किट चमकती रहे तथा पूँजीवादी व्यवस्था में उनका व्यवसाय चमत्कार के रूप में बढ़ता रहे। यहां तो इन मिथकीय नामों का भंडार है। परन्तु पश्चिमी तथा यूरोपीय देशों में जहां इस प्रकार के मिथकीय नाम हैं ही नहीं वहां पर किसी ब्रांड या क्रांतिकारी का नाम आगे किया जाता है और इसी श्रृंखला में वहां पर ‘चे ग्वेरा’ का नाम भी सुपर मॉडल की तरह उभरा है। इस विषय पर महेश राठी के विचार कि आर्थिक विकास की नई संकल्पनाएँ, जहां समाज, अर्थ-व्यवस्था व राजनीतिक जीवन पर व्यापक प्रभाव छोड़ रही हैं वहीं बाजार म इस चमत्कार से विचारधारा, विचारधारात्मक आंदोलन व उनके प्रतीक भी आज अछूते नहीं रहे हैं। बाजार व बाजार की नियंत्रक शक्तियाँ पूँजी संचयन के लिए किसी भी व्यक्ति व नाम के प्रयोग से परहेज नहीं करना चाहती हैं। इसे लाभ के प्रति तृष्णा कहें, आधुनिकता का नया व्यापक ताना बाना, अवसरवादिता की पराकाष्ठा या लाभ की नई नैतिकताएँ-लाभ के लिए विश्व पूँजीवाद आज हमारी स्थापित परम्पराओं, लोक संस्कृति, इतिहास व भावनात्मक प्रतिबिम्बों का सहारा ले रहा है इसका सबसे बड़ा व विश्व व्यापी उदाहरण ‘चे ग्वेरा’ हैं। पूरी दुनिया में क्रांति, जुझारूपन व संघर्षों के प्रतीक ‘चे ग्वेरा’ आज पूँजीवादी उत्पादों का विश्व व्यापी चेहरा बनकर उभरा है।

  • शहीद भगतसिंह के क्रांति-विचारों के प्रकाश, किताब में से

CG Basket

Next Post

छत्तीसगढ़ सिनेमा के दस दुर्भाग्य .

Sat Jun 15 , 2019
Share on Facebook Tweet it Share on Google Pin it Share it Email अपना मोर्चा के लिये राजकुमार सोनी छत्तीसगढ़ […]