महाराष्ट्र- पुणे पुलिस द्वारा आज अल-सुबह (१२ जून) ८३ वर्षीय फादर स्टेन स्वामी के नामकुम बगीचा प्रांगण, रांची में स्थित आवास पर छापामारी की घटना की पी.यू.सी.एल. घोर निंदा करता है. कथित तौर पर महाराष्ट्र पुलिस ने यह छापा और तलाशी बिना किसी न्यायायिक तलाशी वारंट हासिल किये संचालित की, और उनके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, इन्टरनेट मॉडेम, और अन्य भण्डारण उपकरणों को ज़प्त किया, और उन्हें बाध्य किया कि वे अपने जी-मेल और फेसबुक के पास वर्ड उन्हें बताएं. यहां यह बता देना ज़रूरी होगा कि महाराष्ट्र पुलिस ने पहले भी पिछले साल कई बार उनके आवास पर छापामारी की है.

महाराष्ट्र पुलिस द्वारा घोषित उदेश्य कि वे स्टेन स्वामी के खिलाफ सबूत जुटाने और ज़प्ती करने की कार्यवाई कर रहे हैं इसलिए कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता क्योंकि इसी पुलिस बल ने पिछले साल तलाशी के दौरान पहले से ही उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सबूत जमा और ज़प्त कर लिए थे.

इसलिए स्पष्ट तौर पर इसका उदेश्य अन्य उन सभी लोगों को डराने-धमकाने और उनमें भय पैदा करने के अलावा और कुछ नहीं है, जैसे कि मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, जनतांत्रिक विचार के समूहों और सम्बंधित नागरिकों को, ताकि वे स्टेन स्वामी और अन्य लोगों को किसी भी तरह का समर्थन देने से दूर रहे. यह कार्यकर्ता झारखंड में भ्रष्ट माफिया और भ्रष्ट पुलिस और सरकारी अधिकारियों, लालची राजनेताओं और कॉर्पोरेट निहित स्वार्थों द्वारा राज्य आतंकवाद के खिलाफ कुछ वर्षों से विरोध के स्वर बुलंद कर रहे हैं; जिनकी सांठ-गाँठ के चलते आदिवासियों की बहुमूल्य वन भूमि को हथियाने का घिनोना प्रयास किया जा रहा है, ताकि खनिज, वन सम्पदा, ज़मीन, पानी और अन्य सामान्य संसाधनों जैसी बहुत ही बेशकीमती वन और साझा संसाधनों की लूट-घसोट की जा सके.

राज्य पुलिस और सुरक्षा बालों द्वारा बड़ी बेदर्दी और बेशर्मी से सभी कानूनों का उल्लंघन करते हुए, सैकड़ों स्थानीय आदिवासियों को गिरफ्तार और कैद करने, अत्याचार और प्रताड़ित करने और तमाम दूसरे अधिकारों के घोर उल्लंघन का दस्तावेजीकरण कर प्रलेखित करने का काम फादर स्टेन स्वामी बहुत ही लगन और परिश्रम से कर रहे थे.

केंद्र सरकार की मदद से महारष्ट्र-पुणे पुलिस द्वारा फादर स्टेन स्वामी को लगातार प्रताड़ित करना, डरना-धमकाना और आतंकित करना उसी हथकंडे का हिस्सा हैं, जिसके तहत उन्होंने अन्य मनाव अधिकार कार्यकर्ताओं को गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार कर कैद में रखा है जैसे कि सुधा भरद्वाज, वेर्नों गोंसल्वेज़, अरुण फेरेरा, वरावर राव, और गौतम नौलखा, आनंद तेलतुम्बडे को हिरासत में रखा है, जो भीमा-कोरेगांव नामक प्रकरण से सम्बंधित है.

स्पष्ट तौर पर इसका उदेश्य है कि उन सभी नागरिकों के दिलों में भय और आतंक फैलाना जो केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा शासित सरकारों की और झारखंड में भी जन-वीरोधी, गैर-लोकतान्त्रिक, खुले-आम अवैध कार्यों की आलोचना करते हैं; ऐसे कार्यकर्ताओं पर “शहरी नक्सलियों” का ठप्पा लगाकर आम लोगों के बीच भय पैदा करना, ताकि वे पुलिस द्वारा कानून के खुले आम उल्लंघन और अपमानजनक दुरुपयोग के खिलाफ आवाज़ न उठा सकें.

महाराष्ट्र पुलिस द्वारा कानून के अपमानजनक उपयोग पर तत्काल रोक लगाने की पी.यू.सी.एल. मांग करता है; और पुलिस द्वारा कई और कार्यकर्ताओं को फ़र्ज़ी अपराधिक मुकदमों के जाल में फंसाने और उलझाने के लिए शिकार का व्यूह-रचना की जा रही है, उस पर भी तत्काल रोक लगे. पी.यू.सी.एल. मांग करता है कि भीमा-कोरेगांव प्रकरण में अभी तक हिरासत में लिए गए सभी-के-सभी नौ कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाये, और बाकी अन्य लोगों को गिरफ्तार की साजिश पर लगाम लगे.

रवि किरण जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, पी.यू.सी.एल.
डॉ. व्ही. सुरेश, राष्ट्रीय महासचिव, पी.यू.सी.एल.

12th June, 2019

*(अंग्रेजी मूल से अनुवादित – राजेंद्र सायल) rajendrasail@gmail.com


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