“मैं कोई मुक्तिदाता नहीं हूंं ,मुक्तिदाता का कोई अस्तित्व नहीं होता. लोग खुद को अपने आप मुक्त करते हैं . चे ग्वेरा

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प्रस्तुत प्रोम्थियस प्रताप सिंह.


ये शब्द हैं चे ग्वेरा के जिनको पूरी दुनिया में क्रांतिदूत के नाम से जाना जाता है।

चे ग्वेरा का जन्म अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में 14 जून 1928 में हुआ था। इनके पूर्वज आयरलैंड से अर्जेंटीना आए थे। माता पिता ने नाम एर्नेस्तो रखा। बचपन से ही चंचल स्वभाव का होने की वजह से उनके पिता कहते थे कि सबसे पहली चीज जो मेरे बेटे में नजर आती है वो है उसकी रगों में दौड़ रहा विद्रोही आयरिश खून। दमे की बीमारी होने के बावजूद चे ने अपने आपको एक अच्छे एथलिट के रूप में ढाल लिया था। वे स्विमिंग, गोल्फ, फुटबाल, शूटिंग और रग्बी के अच्छे खिलाड़ी थे। किशोरावस्था में काव्य के प्रति उनकी रुचि बनी जो जीवनपर्यंत रही। वे पाब्लो नेरुदा, लोर्का, जॉन कीट्स के बहुत बड़े प्रशंसक थे।

1948 में चे ग्वेरा ने डॉक्टरी की पढाई करने के लिए ब्यूनस एरिस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। 1950 में वे अपनी प्रसिद्ध मोटरसाइकिल यात्राओं में से पहली पर निकल पड़े जिस दौरान उन्होंने उत्तरी अर्जेंटीना का 4800 किलोमीटर का सफ़र अकेले मोटरसाइकिल पर तय किया। उसके बाद 1951 में लगभग पूरे दक्षिण अमेरिका की 9000 किलोमीटर की यात्रा मोटरसाइकिल पर तय की जो कि 9 महीने तक चली। इस दौरान उन्होंने चिली के खान श्रमिकों की दशा देखी जो पूंजीवादी शोषण की वजह से नारकीय जीवन बिता रहे थे। साथ में माचू पिचू के गरीब किसानों की दशा ने उनको झकझोर कर रख दिया था। यात्राओं से लौट कर जून 1953 में उन्होंने अपनी मेडिकल की डिग्री पूरी की। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने भूख, गरीबी और बीमारी देखी और देखा कैसे लोग पैसे की कमी के कारण अपने बीमार बच्चों का इलाज नहीं करवाते और कैसे अपने बच्चे की मौत को एक “महत्वहीन दुर्घटना” मान कर संतोष कर लेते हैं। इन अनुभवों से उनको एहसास हुआ कि अगर इन लोगों की सहायता करनी है तो उनको डॉक्टरी के साथ साथ क्रांति का भी रास्ता अख्तियार करना होगा।

जुलाई 1953 में वे फिर से यात्रा पर निकले पेरू, बोलीविया, अल सल्वाडोर, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, ग्वाटेमाला होते हुए। उसके बाद उन्होंने दिवंगत स्तालिन की तस्वीर के आगे शपथ कि वे तब तक चैन नहीं लेंगे जब तक पूंजीवाद रूपी इस ऑक्टोपस को खत्म न कर दें। 1953 में ही वे निर्वासित क्यूबाई विद्रोही फिदेल कास्त्रो के संपर्क में आये। इसी दौरान अर्नेस्टो ग्वेरा को उनका प्रसिद्ध नाम “चे” मिला। ग्वाटेमाला में उनकी मुलाकात हिल्डा गादेया से हुई जो एक अर्थशास्त्री और वामपंथी झुकाव वाली राजनीतिक कार्यकर्त्ता थी। हिल्डा ने उनकी मुलाकात ग्वाटेमाला की वामपंथी झुकाव वाली सरकार के उच्चाधिकारियों से करवाई। लेकिन इस सरकार का सी.आई.ए. की साजिश से तख्तापलट होने के बाद हिल्डा गादेया को गिरफ्तार कर लिया गया और चे को अर्जेंटीनी दूतावास में छिप कर जान बचानी पड़ी। उसके बाद वे मेक्सिको चले गए। मेक्सिको में ही सितम्बर

1955 में उन्होंने हिल्डा गादेया से विवाह किया।
ग्वाटेमाला में तख्तापलट के बाद चे का संयुक्त राज्य अमेरिका की साम्राज्यवादी नीतियों के प्रति विरोध तीव्र होता चला गया। गादेया ने बाद में लिखा कि ग्वाटेमाला के तख्तापलट से ही अंततः चे को पूर्ण विश्वास हो गया था कि साम्राज्यवाद के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष ही उपाय है।
उसके बाद क्यूबा की क्रांति में उनकी भूमिका इतिहास निर्मात्री साबित हुई जब उन्होंने 1959 में फिदेल कास्त्रो के साथ मिलकर बतिस्ता की अमेरिका परस्त तानाशाही को उखाड़ फेंका और जनता का राज्य कायम किया।
उसके बाद चे ने 1965 में क्यूबा को छोड़ दिया और दुनिया के दूसरे देशों में क्रांति के लिए निकल पड़े। पहले कांगो और फिर बोलीविया में कम्युनिस्ट विद्रोह का नेतृत्व किया। बोलीविया में विद्रोह के दौरान सी.आई.ए. ने बोलिवियन सरकार की मदद से उनको पकड़ लिया और 9 अक्टूबर 1967 को उन्हें गोली मार दी गई। शहीद होने से पहले उन्होंने गोली मारने वालों को ललकारा था कि “मुझे पता है तुम मुझे मारने आए हो। गोली चलाओ, कायरों। तुम सिर्फ एक व्यक्ति को मार रहे हो”। चे एक डॉक्टर थे। और एक क्रांतिकारी थे। इस क्रांतिकारी डॉक्टर ने मानवता की बीमारी, पूंजीवाद, को पहचान लिया था और इस बीमारी के खिलाफ जीवन पर्यन्त संघर्ष में लगे रहे थे।

उन्होंने कहा था — “एक क्रांतिकारी डॉक्टर बनने के लिए, या फिर कहें कि एक क्रांतिकारी ही बनने के लिए, एक क्रांति की जरूरत होती है। अलग थलग रह कर किये गए निजी प्रयास, अपने तमाम आदर्शों की पवित्रता के बावजूद, किसी काम के नहीं होते, और अगर कोई आदमी अकेले ही काम करते हुए, अमेरिका के किसी कोने में किसी बुरी सरकार और प्रगतिरोधी सामाजिक परिस्थितियों के खिलाफ लड़ते हुए, किसी महान आदर्श के लिए पूरी जिंदगी का बलिदान भी कर देता है तो भी उससे कोई फायदा नहीं होता। एक क्रांति को पैदा करने के लिए हमारे पास वह होना चाहिए, जो आज क्यूबा में है, यानि पूरी जनता की लामबंदी। और अंततः आज आपके सामने, अन्य सभी बातों से ऊपर, एक क्रांतिकारी डॉक्टर, यानि कहें तो वह डॉक्टर जो अपने पेशे से सम्बंधित तकनीकी ज्ञान को लोगों और क्रांति की सेवा में लगाता हो, बनने का अधिकार भी है और कर्तव्य भी।”

आज डॉ. अर्नेस्टो चे ग्वेरा का जन्म दिवस है हम उन्हें क्रांतिकारी सलाम करते हैं और उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प दोहराते हैं।

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