मोहम्मद ज़ाकिर हुसैन की रिपोर्ट


भिलाई। भिलाई के इतिहास पर केंद्रित हाल ही में प्रकाशित किताब ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ पर बीती शाम मूलनिवासी कला साहित्य और फिल्म फेस्टिवल भिलाई, आल इंडिया एस.सी./ एस.टी. एम्प्लाईज फेडरेशन व जनवादी लेखक संघ भिलाई- दुर्ग ने संयुक्त रूप से एक चर्चा गोष्ठी सेक्टर-4 में आयोजित की।

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जिसमें भिलाई-दुर्ग के प्रबुद्ध वर्ग के साथ-साथ रूसी प्रतिनिधि ने भी अपनी बातें रखीं।
भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। अतिथियों का स्वागत छायादार पौधे भेंटकर किया गया। स्वागत उद्बोधन देते हुए छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के कार्यकर्ता और राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अफसर विश्वास मेश्राम ने आयोजन का मकसद बताया। उन्होंने रूसी लेखकों बोरिस पोलिवाई की ‘असली इंसान (रियल मैन), निकोलाई ओस्त्रोवस्की की ‘अग्निदीक्षा’ और मैक्सिम गोर्की की ‘मां’ का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि उसी परंपरा में यह किताब आगे की कड़ी लगती है। उन्होंने कहा कि इस किताब में सिर्फ औद्योगिक सहयोग से हुए सृजन की ही बात नहीं है बल्कि भारत और सोवियत दिलों के मेल से उपजे इंसानी रिश्तों का रूमानी जिक्र भी है, जो इस किताब को विशिष्ट बनाते है।


आल इंडिया एस.सी./ एस.टी. एम्प्लाइज फेडरेशन कार्यालय 7 डी, सड़क 8, सेक्टर 4, भिलाई में हुए इस आयोजन में आधार वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार विनोद साव ने कहा कि लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने भिलाई के अतीत से वर्तमान तक का खाका सरल शब्दों में खींचा है। वहीं दुर्लभ फोटोग्राफ्स की वजह से यह किताब और ज्यादा रोचक बन पड़ी है। उन्होंने कहा कि भिलाई की अंतरात्मा को छूती यह किताब पाठकों को अतीत से वर्तमान तक के रोमांचक सफर पर ले जाती है।
सेल एस.सी./एस.टी. एम्पलाइज फेडरेशन के चेयरमैन सुनील रामटेके ने कहा कि लेखक ने भिलाई की शुरूआत से लेकर अब तक का तथ्यात्मक ब्यौरा जुटाने में काबिले तारीफ मेहनत की है। पूरी किताब में लेखक का समर्पण और भिलाई के प्रति एक भावनात्मक लगाव झलकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस किताब को ना सिर्फ भिलाई बल्कि सेल की तमाम इकाइयों में भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मूल निवासी कला,साहित्य एवं फिल्म फेस्टिवल भिलाई के अध्यक्ष व भिलाई स्टील प्लांट के रिटायर महाप्रबंधक एल उमाकांत ने बताया कि आंध्र में कक्षा चौथी की स्कूली किताब में उन्होंने भिलाई के बारे में पढ़ा था और संयोग से सेवा का अवसर भी यहीं मिला। देश-विदेश के दौरे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे सेवाकाल में हम जहां भी गए भले ही मूल कंपनी सेल रही लेकिन हमारी पहचान हमेशा भिलाई से ही रही है। उन्होंने भिलाई के निर्माण में रूसी इंजीनियरों के योगदान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वह सारा समर्पण इस किताब में रोचक ढंग से नजर आता है।


रूसी प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे सेल रिफ्रैक्ट्रीज यूनिट (एसआरयू) के वरिष्ठ अफसर विवेक चतुर्वेदी और उनकी रूसी मूल की पत्नी इना ने भी इस मौके पर अपने विचार व्यक्त किए। विवेक ने भिलाई के रूसी परिवेश से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। वहीं इना ने बताया कि 34 साल पहले जब वह शादी के बाद भिलाई आई तो यहां कभी भी विदेशी होने का एहसास नहीं हुआ और अब तो वह भिलाई और यहां की संस्कृति में पूरी तरह रच-बस गई हैं।


इसके पूर्व शुरूआत में लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपनी किताब ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ में उल्लेखित तथ्यों के आधार पर पावर पाइंट प्रेजेंटेशन दिया। जिसमें उन्होंने भिलाई के इतिहास से जुड़ी कई रोचक जानकारी दी। उन्होंने इस किताब के लेखन की यात्रा से भी पाठकों को रूबरू कराया। इस अवसर पर अतिथियों के हाथों रूसी अनुवादक स्व. विष्णु प्रभाकर तोपखानेवाले की बेटी अंजली पैठनकर और इस किताब का कवर पेज डिजाइन करने वाले कमल सिंघोत्रा का विशेष रूप से सम्मान किया गया। वहीं आयोजन में बेगुसराय से विशेष तौर पर पहुंचे वामपंथी लेखक उमेश कुंवर ‘कवि’ की कृति ‘ डरावना सुराख ’ का विमोचन भी अतिथियों ने किया। आयोजन में मूल निवासी फिल्म फेस्टिवल के चित्रसेन कोसरे, अशोक ढवले, भीमराव पाटिल, प्रहलाद पाटिल, वासुदेव व लखन संगोड़े तथा जनवादी लेखक संघ की ओर से मिर्जा हफीज बेग, नासिर अहमद सिकंदर व मुमताज के अलावा ख्वाजा अजीमुद्दीन, आनंद अतृप्त, अल्तमश शेख, कबीर पैठनकर, मंथन निषाद, धर्मविजय सिंह, नवजोत सिंह, मुकेश उइके,विवेक सहारे व के. रूद्रमूर्ति सहित अनेक लोग उपस्थित थे। संचालन संजय मेश्राम ने और आभार प्रदर्शन जलेसं भिलाई-दुर्ग के अध्यक्ष राकेश बोम्बार्डे ने किया।

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