जगदलपुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

नगरनार स्थित एनएमडीसी ऑयरन एंड स्टील प्लांट के दौरे पर आई विदेशी कंपनी पास्को के निरीक्षण को लेकर मंगलवार को प्लांट में चार घंटे से अधिक समय तक हाइवोल्टेज ड्रामा चला । मजदूर संगठन और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बीच पास्को की टीम को सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक कमरे में बंद रहना पड़ा । कमरे के बाहर पुलिस की कड़ी सुरक्षा थी । वहां काफी संख्या में मौजूद मजदूर संगठनों के सदस्य और कांग्रेस के नेता पास्को वापस जाओ नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेशीकरण का प्रस्ताव रद्द करो , एनएमडीसी होश में आओ जैसे नारे लगाते रहे.

अचानक भड़की आंदोलन की चिंगारी देख एनएमडीसी और प्रशासन के अधिकारी भी हतप्रभ थे और बातचीत कर गतिरोध का हल निकालने का प्रयास सुबह से ही करते रहे पर सफलता नहीं मिली । दोपहर एक बजे तक आंदोलनकारियों के साथ एनएमडीसी , जिला एवं पुलिस प्रशासन की दो दौर की बैठक चली एनएमडीसी की ओर से हैदराबाद से पहुंचे अधिकारी ईडी पर्सनल सुमित देव महाप्रबंधक हिमांशु , ईडी नगरनार स्टील प्लांट प्रोजेक्ट प्रशांत दास व एसडीएम तथा सीएसपी आंदोलनकारियों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास करते रहे कि पाको की टीम के दौरे का स्टील प्लांट के विनिवेशीकरण से कोई लेना देना नहीं है । टीम प्लांट में बनने वाले एचआर क्वाइल खरीदने के पहले स्टील प्लांट का निरीक्षण करने आई है । इस बीच कलेक्टर ने भी आंदोलनकारियों को चर्चा के लिए बुलाया लेकिन मजदूर नेताओं ने कलेक्टोरेट जाने से इंकार कर दिया दूसरे दौर की बैठक के बाद आंदोलकारी प्रदर्शन समाप्त करने को राजी हुए

मजदूरों को समझाने में झूट रहा हैं पसीना .

दक्षिण कोरिया की स्टील निर्माता कंपनियों पास्को की टीम 13 जून तक प्लांट के दौरे पर आई है । कंपनी का 11 सदस्यीय दल नौ जून की रात यहां पहुचा है । टीम के दौरे को प्लांट के विनिवेशीकरण से जोडते हुए मदर संगठनों के साथ ही सत्ताधारी दल कांग्रेसका स्थानीय संगठन भी विरोध कर रहा है । पास्क़ो के पहुंचने के पहले दिन से ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था , जिसके बाद कलेक्टर डा. अय्याज तंबोली ने मजदुर संगठनों के पदाधिकारियों को बुलाकर स्थिति साफ करते बताया कि इस दौरे का विनिवेशीकरण से कोई लेना – देना नहीं है । इसके बाद मजदूर संगठन मान गए थे और विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम स्थगित कर दिया था ।
सोमवार की पास्को की टीम ने शांतिपूर्ण माहौल स्टील प्लांट का भ्रमण किया , सोमवार रात को मजदुर संगठन के नेता स्थानीय सांसद और विधायक से मिलने जगदलपुर पहुंचे और अपनी आशंका व्यक्त की . नेताओं से मिलने के बाद दूसरे दिन मंगलवार को अचानक सुबह नौ बजे मजदूर नेता महेन्द्र जाँन , संतराम सेठिया , प्रभुलाल , जितेन्द्र नाथ , महेश्वर नाग आदि मजदूर नेताओं और कांग्रेस नेता लखन बघेल के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता स्टील प्लांट परिसर के अंदर दाखिल होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे । इससे माहौल गरमा गया और पास्को की टीम को निरीक्षण शेड़ कमरे में जाना पड़ गया । इस बीच अफसरों को आंदोलनकारियों को समझाने में काफी पसीना बहाना पड़ा ।

आंदोलन से एन एम डीसी – रेलवे को दो सौ करोड़ का नुकसा

संयुक्त आंदोलन से एनएमडीसी किरदुल परियोजना में उत्खनन पांच दिन से ठप है । इससे प्रबंधन को प्रतिदिन करोड़ों रूपये का नुकसान हो रहा .पांच दिन में एनएमडीसी एक हजार करोड़ का नुकसान हो चुका आदिवासी डिपॉजिट 13 में उत्खनन अडानी ग्रुप का विरोध कर रहे पहाड़ को बचाने आदिवासी समुदाय सात जून किरंदुल चेक पोस्ट पर धरना प्रदर्शन रहा । इससे एमएडीसी के कर्मचारी खदानों तक नहीं जा रहे हैं । पांच दिन से किरंदुल परियोजना डिपॉजिट 14 11 उत्खनन व दीगर कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है । खदान में न उत्खनन हो रहा और ही लोडिग आदि के काम हो पा रहे हैं जानकारी के अनुसार किरंदुल के माइंनिग एरिया 11 सी , 11बी और डिपोजिट 14 में प्रतिदिन करीब 50 हजार टन लौह अयस्क का उत्खनन होता है । इस आंदोलन से अब तक करीब 200 करोड़ रूपये का नुकसान हो चुका है । यदि आंदोलन आगे जारी रहा तो नुकसान का आंकड़ा लगातार बढ़ता जाएगा ।

पांचवें दिन भी ठप्प रहा किरंदूल का उत्पादन .

संयुक्त आंदोलन से एनएमडीसी किरदुल परियोजना में उत्खनन पांच दिन से ठप है । इससे प्रबंधन को प्रतिदिन करोड़ों रूपये का नुकसान हो रहा । । पांच दिन में एनएमडीसी एक हजार करोड़ का नुकसान हो चुका आदिवासी डिपॉजिट 13 में उत्खनन अडानी ग्रुप का विरोध कर रहे पहाड़ को बचाने आदिवासी समुदाय सात जून किरंदुल चेकपोस्ट पर धरना प्रदर्शन रहा । इससे एमएडीसी के कर्मचारी खदानों तक नहीं जा रहे हैं । पांच दिन से किरंदुल परियोजना डिपॉजिट 14 11 उत्खनन व दीगर कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है । खदान में न उत्खनन हो रहा और ही लोडिग आदि के काम हो पा रहे हैं जानकारी के अनुसार किरंदुल के माइंनिग एरिया 11 सी , 11बी और डिपोजिट 14 में प्रतिदिन करीब 50 हजार टन लौह अयस्क का उत्खनन होता है । इस आंदोलन से अब तक करीब 200 करोड़ रूपये का नुकसान हो चुका है । यदि आंदोलन आगे जारी रहा तो नुकसान का आंकड़ा लगातार बढ़ता जाएगा .

पहाड बचाने के लिए आदिवासियों का आंदोलन पांचवें दिन भी जारी रहा हजारों ग्रामीण चेकपोस्ट के पास डटे हुए हैं । आंदोलन का समर्थन करने मंगलवार को सुकमा जिले से बड़ी संख्या में कांग्रेसी सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में पहुंचे थे । उन्होंने आदिवासियों की मांग को जायज बताया और पूरा समर्थन देने की बात कही । हरीश कवासी ने कहा कि सरकार का फैसला जो भी हो , वह आदिवासियों के समर्थन में खड़े रहेंगे । साथ ही भाजपा सरकार पर आरोप लगाते कहा कि यह सब उनकी करनी है । तत्कालीन राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर पहाड़ को अडानी के हवाले कर दिया
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