साईं बाबा के बहाने चर्चा ; न तो ईश्वर किसी का कुछ बना सकता है और न कुछ बिगाड़ सकता हैं , जो खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकता वो हमारी क्या करेगा, इतनी मोटी सी बात आखिर किसी को समझ में क्यों नहीं आती /

साईं  बाबा के बहाने चर्चा ;
न तो ईश्वर किसी का कुछ बना सकता है और न कुछ बिगाड़  सकता हैं , जो खुद अपनी रक्षा  नहीं  कर सकता वो हमारी क्या करेगा, इतनी मोटी  सी बात आखिर किसी को समझ में क्यों नहीं आती  /
कल रात हमारे मोहल्ले में कुछ लोगो ने मंदिर से साईं बाबा की मूर्ति गायब कर दी , पूरे  देश में पिछले कई महीने से साईं  बाबा को लेकर हल्ला मचा है , बलसाड में बड़ी संख्या में लोग आये और साईं की मूर्ति पे कला कपडा ढँक दिया , दूसरे दिन पूरा शहर बंद रहा , 
मेरी आजतक ये बात समझ नहीं आये की जिन भगवानो पे सारे समाज की रक्षा की जिम्मेदारी है ,वो खुद असहाय हो गए हैं। कोई भी आके उन्हें हटा देता है 
ज्यादा दिन नहीं हुए जब कुछ लोगो ने मस्जिद ढहा  दी थी , कुछ लोगो ने मंदिर पे हमला किया था ,बुद्ध की मूर्ति अफगानिस्तान में तोड़फोड़ डाली गई , मजार तोड़ी गई ,चर्चो पे हमले कोई नई  बात नहीं हैं , पादरियों , मुल्लाओ ,पुजारियों को मारपीट की  जाना आम बात हैं , मूर्तियों की तोड़फोड़ तो हजारो साल से हो रही हैं , दुनिया के बड़े बड़े पूजा घर जलाये गए चाहे वो मस्जिद हो मंदिर हो गिरजाघर हो या बुद्ध के स्थल , तो क्या आपको कभी लगा की इन तोड़ने वाले को किसी ने सजा दी आय उन्ह इसके बुरे परिणाम भुगतना पड़े ,नहीं ना ? हुआ तो ठीक इसका उल्टा ,जिहोने मस्जिद तोड़ी ,मजार फोड़ी ,
गुजरात और देश के दूसरे हिस्सों में कत्ले  किया उन्हें तो उसी ईश्वर ने देश की हुकूमत सौंप दी , जिन्होंने देश और देश  के बाहर आतंकवाद के नाम  निर्दोषो को मारा उन्हें तो  किसी भगवान ने कोई सजा नहीं दी। जिन  प्रभु के बन्दों ने अफगानिस्तान ,इराक़ ,सीरिया ,ईरान ,पाकिस्तानऔर दूसरे अफ्रीकन देशो में पीढ़ी  की पीढ़ी खत्म का दी उन्हें किसने सजा  दी। 
मंदिरो में और दूसरे पूजा स्थलो में करोडो अरबो की संपत्ति जो एकत्रित की गई है वो क्या ईमानदारी से कमाई गई धन राशि हैं ,क्या  तथाकथित भगवान को मालूम नहीं है की समाज के लुटेरो ने ये राशि जनता के हिस्से से लूट के  चढ़ाई हैं ,इन चोरो का क्या हुआ ,
कई बार इन भगवानो के घरो में मानव निर्मित या प्राकर्तिक प्रकोप आता है तब ये सब अपने घर तक की रक्षा  नहीं कर  पाते , केदारनाथ तो एक उदहारण है ,कुछ साल पहले मक्का  में आग लग गई थी जिसमे कई हजयात्री जल के मर गए थे ,हर साल तीर्थ  यात्रा  में दुर्घटनाओ में हजारो लोग मर जाते है ,कोई भगवन उन्हें कभी बचाने तक नहीं आता , अब पाप पुण्य की बात करके बरगलाने की जरुरत नहीं है मरने वालो में एक दो साल के बच्चे  भी  थे ,और सबसे बडा की उनके मंदिर ही खत्म हो गये , जब वे अपनी मूर्ति और रहने की जगह नहीं  बचा पाये तो भक्तो की कोन  कहे। 
हर साल ऐसे  कई किस्से सुनाई देते है की कई भको ने भगवान की भक्ति में अपनी जान देदी ,या अपनी जीभ चढा  दी, अभी कुछ  महीने पहले एक परिवक के आठ लोगो इस आसरे में अपने प्राण  खत्म कर दिए की भगवान शंकर उन्हें स्वयं आके बचा लेंगे ,लेकिन इन्हे बचने कोई नहीं आया ,आई तो सिर्फ पुलिस ,लाशो का पोस्टमार्टम करवाने , क्यों क्या उन्हें भगवान पे भरोसा  नहीं था , यदि था फिर उन्ह ेबचने कोई आया क्यों नहीं ,पुराणो , ग्रंथो में तो ऐसे ढेर सारा उदाहरण भरे पड़े है ,की भगवन प्रकट हो गए ,ये सब क्या इनके साथ धोका नहीं  हैं , 
धर्म के नाम से अलग अलग तरह की धाराए है ,कोई ईश्वरवादी है लोई अनीश्वर वादी है ,कोई एक अल्लाह को मानता है तो कोई कई देवताओ को ईश्वर के समान मानते हैं , आत्मा ,परमात्मा ,एकेश्वर  वादी  है तो कई अवतार को मैंने वाले भी हैं ,तरह तरह की पूजा पद्धति है जो आपस में ठीक उलटी है , एक दूसरे का खंडन है , कोई मॉस को मना करता है कोई शराब को मना करता है   तो कोई दोनों को ठीक मानता हैं।  कोई कहता है की कण कण में भगवान है तो कोई कहता है की सिवाय मेरे  
देखो तक नहीं ,यानि किसी और को मुझमे शामिल मत करो ,बड़ा मुश्किल है ,यदि कोई ईश्वर है भी तो कायो नहो एक बार सरे भगवानो की बैठक बुला के कॉमन मिनिमम सहमति बना ले और हमें बता से की भई  आखिर बेचारा भक्त करे भी तो क्या करे। 
धर्म और ईश्वर के नाम पे इतिहास में भयंकर जनसंघार  हुए , सब  धर्मो में किया और अभी भी कर रहे हैं , यहूदी मारे  गए ,इस्लाम के अनुआई  मारे  गए ,शैव मरे गए , वैष्णव  मरे गए , ईसाई  मारे  गए , बुद्धिष्ट  मरे गए ,कोन  नहीं मारा गया , लेकिन कभी कोई भगवान अपने भक्तो को बचाने नहीं आया , लोग मरे जाते रहे और धर्म के ठेकेदार अपनी दुकान चमकाते रहे। 
सत्य  की खोज का ही सारा दर्शन सनातन धर्म का है। लेकिन हजारो साल में आज तक वो सत्य की ही खोज नहीं कर पाये ,और जो खोज भी उसे वो  साडी दुनिया क्या अपने संप्रदाय तक को कन्वेंस नहीं कर पाये। सारे धर्मो के ईश्वर क्यों नहीं एक बार एक सा विधान एक सा दर्शन तय  नहीं कर देते , जिससे सारे झगडे ही मिट जाये,  समय समय पे पूरी दनिया में संतो फ़कीरो में स्थापित धर्मो को  चेलेंज किया , उनकी किसी ने नहीं सुनी  , यहाँ तक की इन संतो के अलग संप्रदाय बन गए जिन्होंने  बाद में धर्म का रूप ले लिया , जैन ,बुद्ध ,सिख ,इस्लाम में कई मत  बने ,ईसाइयत के टुकड़े हुए ,और तो और बुद्ध के अनुआईयो ने भी अलग अलग पंथ खोल लिए ,जैसे आजकल राजनैतिक दल टूटते है वैसे ही इन भगवानो के दल बन गए ,
और आज किसी एक मोहल्ले में चार घरो के लोग भी एक साथ बैठ जाये तो वे भगवान को लेके एक मत नहीं हो सकते , और तो और एक घर में भी कई विचार  है .
     

 में  अक्सर एक उदाहरण  देता हूँ की बिना अतिरिक्त बल  के दुनिया का कोई भी भगवान एक पत्ता भी नहीं हिला सकता तो वो  कैसे किसी का भला या बुरा कर सकता हैं। तो फिर काहे को इन धर्मो के ठेकेदारो के इशारो पे अपना जीवन दुभार  करते हो , उनकी बात अलग है जी धरम को धंदा बना लिए है ,में तो बाकि सब को कहता हूँ भाई ये साऱी   दुकानदारी है, इसमें उन्हें कुछ नहीं मिलेगा सिवाय अपना चैन खोने के। 

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