सिम्स बिलासपुर ः अनैतिक भृष्ट कारनामों के उजागर करने के फलस्वरूप डा.नितिन की बर्खास्तगी और प्रताड़ना के खिलाफ़ संघर्ष का संकल्प .काबिज गिरोह के विरुद्ध कार्यवाही की मांग .

सीजीबास्केट के लिये प्रिंयंका शुक्ला की रिपोर्ट .

बिलासपुर .9.06.2019

यह मामला सिर्फ़ किसी होनहार डाक्टर के भविष्य का ही नहीं हैं यह शासकीय चिकित्सा लयों में पनप रहे भृष्टाचार और उनपर सरंक्षक रहे गिरोह के पर्दाफाश का हैं कि किस प्रकार निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाने के लिये गरीब और जरूरत मंद समाज के लोगो के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा हैं . यह मामला भृष्ट और जन विरोधी अमानवीय व्यवस्था के खात्मे के लिये उसी चिकित्सा बिरादरी के डा . नितिन का नैतिक विद्रोह है ,जिसका किसी निर्णय पर पहुचना ही न्याय है.

डा. नितिन कहते है कि यह सवाल सिर्फ़ मेरी नौकरी या मेरे साथ किये गये अपमान का नहीं है अब मेरी लड़ाई मेरे प्रोफेशन की नैतिकता की है जो भृष्ट और जनविरोधी बन गया हैं. इस लडाई को में परिणाम तक पहुचाना चाहता हूं इसके लिये में कुछ भी कुर्बानी के लिये तैयार ह़ूं. डा.नितिन ने कहा कि में.सड़क से लेकर कानून के सभी प्रावधानों का स्तेमाल करूंगा. अभी में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री से मिला हूं.उन्होंने आश्वासन दिया हैं कि वे कार्यवाही करेंगे .मुझे भरोसा हैं कि कुछ न कुछ होगा नहीं हुआ तो हम अपनी लड़ाई कानून और नैतिक रूप से जारी रखूंगा .


डा. नितिन ने प्रधान मंत्री से लेकर सभी छोटे बड़े अधिकारियों , मुख्यमंत्री से लेकर सभी प्रशासनिक तब़को को लिखा वे मिले और अभी पिछले दिनों राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव से मिले ,जहाँ उन्हें लगता हैं कि शायद कुछ कार्यवाही हो सकती हैं.

वे सारे कागजात मुझे भी उन्होंने दिखाये यद्यपि हम उनके सही या गलत होने की पुष्टि नहीं कर सकते .लेकिन डा.नितिन के कहे और लिखे गये पत्रों के आधार पर किसी निष्पक्ष समिति से जांच कराये जाने की लोकतांत्रिक और संवैधानिक मांग का जरूर समर्थन करते हैं.
डा. नितिन ने विभिन्न स्तरों पर लिखा है कि

डा. नितिन से प्रिंयंका ने बात की .

12 अप्रेल 2018 को सिम्स अधिष्ठाता की अनुपस्तिथि में मुझे सिम्स प्रबंधन के अधिकारी डॉ रमनेश मूर्ती द्वारा बिना स्पष्टीकरण मांगे सेवा समाप्ति का पत्र थमा दिया गया था , व समाचार पत्रों में मरीजों को लामा कर निजी अस्पतालों में दाखिल कराने का आरोप लगाते हुए यह खबर प्रकाशित कर मुझे अपमानित किया गया .

उन्होंने सिम्स के तीन वरिष्ठ डाक्टर का नाम लिखा है कि जो पिछले 19 वर्षों से सिम्स को अपनी निजी संपत्ति समझकर अपनी मनमर्जी करते रहे । संविदा चिकित्सकों की भर्ती या अन्बंध नवीनीकरण ये अपनी मर्जी से करते , शासकीय आयुर्विज्ञान संसथान को 19 वर्षों तक प्राइवेट लिमिटेड संस्था जैसा चलाया गया , चिकित्सक रुपी दलालों को ये अपने वार्ड में भर्ती करते थे जो इनके बताये अनुसार काम किया करता , अतः सिम्स में इलाज हेतु आये मरीजों को निजी अस्पतालों में दाखिल करवाने पर इन तक अच्छी खासी रकम पहुंचाई जाती थी .

भारतीय चिकित्सा परिषद की दिशा निर्देश में लामा रजिस्टर नामक कोई दस्तावेज नहीं होता , पूरे विश्व की सिर्फ यही एक मात्र संस्था ” छतीसगढ़ आयुर्विज्ञान संसथान में रखा गया है , जिसकी जांच करने की लिए नितिन ने हर शिकायत पत्र में निवेदन किया है , परन्तु अब तक किसी भी जांच अधिकारी ने रुचि नहीं ली , और शिकायत को नजरअंदाज किया गया .

पत्र में एक घटना का उल्लेख किया हैं कि 27 अप्रेल 2018 को जरहाभाठा , मंदिर चौक , बिलासपुर स्थित S . K . B अस्पताल के कर्मचारी विकास चतुर्वेदी द्वारा मुझे कहा था
डा. ….. ने आपसे सत्तर हजार रुपये की मांग की है न हो पा ने आपके रजिस्टर रद्द करने के पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिये है. आप उनसे मिल लीजिए . मैंने पैसे देने से कर दिया था . पूर्व में भी मुझे इस प्रकार इन सब गोरखधंधे में शामिल होने के लिए कहा गया था , मुझसे यह सब कराने की

मैं इस शिकायत को लेकर सिम्स अधिष्ठाता डॉ पात्रा से मिलने गया , परन्तु मुझे उनसे मिलने नहीं दिया गया , अधिकांश वह छुट्टी पर रहा करते हैं , मैंने उन्हें व्हाट्सप्प पर सन्देश भी भेजा , परन्तु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया .

4 अप्रेल को डॉ रमनेश मूर्ती दवारा मुझे चेतावनी दी गयी थी की मैं प्रबंधन की गतिविधियों के बीच न आऊ , वे मुझे मरीजों को परामर्श देने के लिए मना करते हुए कहा गया था की इलाज हेतु आये मरीजों को वार्ड में दाखिल करा दिया जाये जिससे की उनके दलाल निर्णय ले सकें की मरीज को किस निजी अस्पताल दाखिल कराया जाये ।

रेफेरल सेंटर से मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में इलाज हेतु आये मरीजों को सुपरस्पेशलिटी उपचार न होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर भेजा जाता है , परन्तु इससे प्रबंधन को कोई फायदा नहीं होता था .

108 एम्बुलेंस से आये मरीज के सिम्स परिसर आते ही निजी अस्पताल की एम्बुलैंस उसके पीछे पीछे आ जाती , निजी अस्पतालों के दलाल जो इन तक कमिशन पहुँचाया करते थे , वह जानवरों जैसे मरीज के पीछे लग जाते . उनसे बहस करो तो कभी डॉ लखन सिंह या कभी डॉ रामनेश मूर्ती द्वारा तरह तरह की धमकियां सुननी पड़ती थी .

बिलासपुर संभाग के एक मात्र सिम्स जैसी संस्था जहाँ सारे उपकरण होते हुए भी मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता , यह सब जानते हुए भी असहाय पीड़ित मरीज यहाँ उपचार की उम्मीद लेकर आता है , जिसे मौत का भय दिखाकर निजी अस्पतालों में बेच दिया जाता है , वह लाखों खर्च कर पैसों के अभाव में फिर से सिम्स आता है , मरीज के आते ही डॉक्टर रुपी दलाल के कानों यह खबर पंहचा दी जाती है , ताकि वह मरीज व उसके परिजन उस दलाल को पहचान न सके , यह गोरखधंदा वषों से चला आ रहा है . इससे एकत्रित की गयी दलाली की रकम अधिकारी से लेकर डीन तक पहुंचाई जाती है .

उक्त कार्यवाही व मुझे सेवा से हटाए जाने की जांच हेतु , मैं अपनी पीजी की पढाई छोड़कर एक वर्ष से मंत्रियों व अधिकारीयों की चक्कर लगा रहा । मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी तो मेंने. माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखा. प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश पर संचालक चिकित्सा शिक्षा दवारा टीम गठित कि गयी थी , जिन्होंने 23 फरवरी 2019 को सिम्स अधिष्ठाता कार्यालय में बुलाकर मुझे पुनः लिखित में बयान प्रस्तुत करने को कहा था, जिसे मैंने उनके समक्ष प्रस्तुत भी किया आज 3 माह से अधिक हो गए परन्तु अब तक इसका कोई समाधान व किसी भी प्रकार का जवाब नहीं मिला .

मुझे दिनाँक 12 अप्रेल 2019को सेवा समाप्ति का पत्र दिया गया जिसमे मैंने सूचना के अधिकार की तहत जानकारी मांगी थी कि सिम्स की स्थापना से लेकर आज तक कितने चिकित्सकों की सेवा समाप्ति की गयी , जवाब में सिर्फ मेरी सेवा समाप्ति का पत्र संलग्न किया गया कि 10 वर्षों में बिना स्पष्टीकरण मांगे सिर्फ मुझे सेवा समाप्ति का पत्र दिया गया .
आखिर मैंने ऐसा कौन सा असन्तोषपूर्वक कार्य किया था . इसकी जांच का आग्रह करते हुए आज़ में एक वर्ष से । अधिक समय से लड़ रहा परन्तु शासन से अब तक मुझे कोई जवाब नहीं मिला .

अक्टूबर 2018 में मरीजों को लामा किये जाने की खबर जो की समाचार पत्रों में मुद्रित हुई थी जिसमे की सिम्स के अधिकारीयों ने 102 मरीजों को सिर्फ एक माह में निजी अस्पतालों में दाखिल कराया था , समाचार पत्रों में मुद्रित खबर की वास्तविकता जानने के लिए मैंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी जो की अब तक प्राप्त नहीं हुई . जब प्रथम अपील का भी जवाब न दिया गया . मैंने राज्य सूचना आयोग पर शिकायत दर्ज की , उसे भी आज 4 माह हो गए सूचना अयोग की ओर से भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

डा. नितिन कहते है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि सिम्स की स्थापना से लेकर आज तक सिर्फ मुझे बिना स्पष्टीकरण मांगे अधिष्ठाता की अनुपस्तिथि में हटा दिया गया .

डा. नितिन ने सभी कागजात स्वप्रमाणित हस्ताक्षर करके मुझे उपलब्ध कराये हैं और स्वास्थ्य मंत्री को मेरी उपस्थिति में सोंपे हैं.

यह पूरा प्रकरण बेहद संवेदनशील और प्रतिभा के साथ खिलवाड़ का है.डा.नितिन इस लड़ाई को अंजाम तक पहुचाना चाहते है इसके लिये सभी लोकतांत्रिक और कानूनी प्रावधान का उपयोग करने के लिये तैयार है।

नोट – सीजीबास्केट तथ्यों की पुष्टि नहीं करता , उपलब्ध कराये गये दस्तावेज के आधार पर तैयार रिपोर्ट .


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