मराठवाड़ा के परभणी ज़िला मुख्यालय से दूर के गांवों तक सूखे के हालात डरा देने वाले हैं…..

मयंक सक्सेना ,मराठवाड़ा से TruthNDareGroundReport के लिये

मराठवाड़ा के परभणी ज़िला मुख्यालय से दूर के गांवों तक सूखे के हालात डरा देने वाले हैं…

मराठवाड़ा के उस गांव में एक बूंद पानी नहीं है, किसान से मजदूर बन गये एक शख्स का 11 साल का बेटा आहात पठान, अपने वालिद के साथ पानी की लाइन में लगा है। पूछने पर मुस्कुराकर कहता है,


‘बड़े होकर कलक्टर बनना चाहता हूं…’

उसके वालिद कहते हैं कि ईद पर इस बार भी बच्चे को नए कपड़े नहीं दिला सके हैं। आहात बीच में बोलता है,
‘पैसे ही नहीं थे अब्बू के पास, तो कैसे दिलाते?’

मैं और अनुज दोनों पसीने के साथ आंसुओं को दौड़ता महसूस करते हैं। सपना बिना पानी और अनाज के भी जिंदा रहता है…कई बार जितनी मुश्किल बढ़ती है, उतना ही बड़ा हो जाता है सपना…मैं आहात पठान की गाड़ी के पीछे भागते बच्चों को देखने लगता हूं…मैं महसूस करने लगता हूं, आहात बनने की आरज़ू लिए कुछ बच्चों की ढिबरियों की रोशनी से काली पड़ती दीवारें…बल्ब की मद्धम पड़ती रोशनी, रेंगते हुए पंखे के बीच अज़ान की आवाज़ और उजला होता आसमान…

इस बीच, आहात का पिता कह उठता है,
‘चाहे ये जिस्म मिट्टी हो जाये, इसकी पढ़ाई नहीं रुकने दूंगा मैं…’

हम मिट्टी हो जाते हैं और कोई हमारे हाथ में एक गिलास पानी देकर चला जाता है…हम उसे पीकर गल तो नहीं जाएंगे?

वो कौन हैं जो मुल्क़ बचाने के नारे लगाते हैं? ये सपने ही तो मुल्क़ हैं…हम पानी पीते हैं और पसीने और आंसुओं से गलते हुए, अपनी मिट्टी, अगले गांव की ओर बढ़ा लेते हैं…

Mayank Saxena

मराठवाड़ा

TruthNDareGroundReport

Anuj Shrivastava

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