केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पारित किया नया श्रम कानून

मालिकों के ‘अच्छे दिन’, मजदूरों के और ‘बुरे दिन’ शुरू
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पारित किया नया श्रम कानून

भी देश की मजदूर आबादी कुछ समझ भी पाती कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने उस पर बड़ा हमला बोल दिया। केंद्रीय मंत्रिामंडल ने बीते 31 जुलाई को ‘अच्छे दिन’ के सौगात के तौर पर मालिकों के हित में श्रमकानूनों में बदलाव का प्रस्ताव पारित कर दिया। उसने आनन-फानन में लोक सभा में भी इसे पेश कर दिया। हालात ये हैं
कि संशोधन की प्रतियां भी सांसदों को उपलब्ध नहीं कराई गईं। फिलहाल कारखाना अधिनियम -1948, श्रम विधि विवरणी देने व रजिस्टर रखने से कतिपय स्थानों में छूट अधिनियम 1988, प्रशिक्षु अधिनियम 1961 में कुल 54 संशोधन पारित हो गये। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से 5 जून को फैक्ट्री अधिनियम 1948 में 17 जून को, न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948, 23 जून को श्रम विधि विवरणी देने व रजिस्टर रखने से कतिपय स्थानों में छूट अधिनियम, 1988 के साथ ही अपरेंटिस अधिनियम 1961 व बाल श्रम निषेध एवं नियमन अधिनियम 1986 में भारी संशोधन का नोटिस जारी किया था। यही नहीं, देश के महत्वपूर्ण ऑटो इंडस्ट्री के क्षेत्र को आवश्यक सेवा में लाने का भी प्रस्ताव आ चुका है। ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 व औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में भी पफेरबदल की कोशिशें जारी हैं।

[ ganesh tiwari bsp ]

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