झूठे आरोप के तहत गिरफ्तार किये गये सुधा भारद्वाज सहित मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा करने, मानव अधिकारों का हनन , जनआंदोलन पर बढ़ते दमन एवं अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने के खिलाफ एक दिवसीय सम्मेलन , भिलाई .:पीयूसीएल दुर्ग .

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आयोजन स्थान : बी एम जी
मलियालम ग्रन्थालय
सेक्टर 6 साई मंदिर ओर चर्च के बीच, भिलाई .

दिनांक : 9 जून 2019

समय : सुबह 11.बजे से प्रारंभ शाम 6 बजे तक

जहाँ एक ओर प्रदेश में मानव अधिकार दिवस बड़े ताम – झाम से मनाया जाता है वही इसी प्रदेश की जनता की अधिकारों के लिये लड़ने वाले वकील एवं मजदूर नेत्री सुधा भारद्धाज को अन्य मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ फर्जी अपराध कायम कर गिरफ्तार किया जाता है और बिना जमानत दिये जेल में रखा जाता है ।

सुधा भारद्वाज , शंकर गुहा नियोगी के आंदोलन में जुड़कर दल्ली राजा लौह अयस्क खदानों के मजदूरों के आंदोलन में अपनी भूमिका निभाई है । सुधा भारद्वाज ने पिछले 3 दशकों में छत्तीसगढ़ की मेहनतकश जनता के लिये अनगिनत मुकदमें लड़े है मजदूरों को न्यूनतम वेतन और बोनस से लेकर उनके गैर कानूनी रूप में काम से बैठाने के खिलाफ तक , रायगढ़ के आदिवासियों के जमीन का बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा गैर कानूनी अधिग्रहण से लेकर स्मार्ट सिटी के तहत रायपुर में शहरी बस्तियों को उखाड़कर लोगों को विस्थापित होने , सुधा जी ने छत्तीसगढ़ के कोने – कोने हो रही अन्याय के खिलाफ कोर्ट और सड़क दोनों पर अपनी बुलंद आवाज उठाई ।

 अन्याय के खिलाफ और संवैधानिक अधिकार के लिये आवाज उठाना किसी भी लोकतंत्र में मूल अधिकार माना जाता है । मगर भारत के वर्तमान की फासीवादी सरकार के लिये ऐसे आवाज उठाने वाले लोग देशद्रोही बन जाते है ।

सरकार की यह मंशा स्पष्ट रूप से भीमा कोरेगाँव के केस में नजर आता है। भीमा कोरेगाँव का केस एक रूप से राजकीय दमन का एक नया पड़ाव को दर्शाता है । दलितों के एक ऐतिहासिक विजय के जश्न मनाने का एक कार्यक्रम को जबरदस्ती माओवादियों से संबंध बताकर कार्यक्रम की वैधता पर सवाल उठाना दमन का एक नया और खतरनाक चेहरा का प्रतीक है ।

इसी दमन के तहत महाराष्ट्र के 5 मजदूर और विभिन्न राज्यों में पुणे पुलिस द्वारा 10 सामाजिक कार्यकर्ता , वकील , लेखक व पत्रकारों की गिरफ्तारियां हुई और उनके
घरों पर छापा मारा गया । एक लोकतंत्र में होकर भी मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के कानूनी कार्यों को गैर कानूनी घोषित करना यह बहुत ही भयावह लक्ष्य है । कुछ मिडिया द्वारा झूठे प्रचार करवाकर “ राज्य सुरक्षा के नाम पर लोकतांत्रिक विरोध की गुंजाईश को खत्म करना बहुत ही खतरनाक है ।

   जातिगत हिंसा पर आवाज उठाने वाले न जाने कितने आदिवासी और दलित सामाजिक कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज किये गये जो महीनों से बिना ज़मानत मिले जेल में बंद है गौ हत्या और धर्म परिवर्तन के नाम पर जगह - जगह लोगों को गिरफ्तार किया गया धार्मिक अल्पसंख्यकों और आदिवासियों पर हिंदुत्ववादी ताकतों द्वारा हाले जगह जगह बढ़ते गई राज सत्ता की मदद से इनकी अपराधिक गतिविधी दिन ब दिन बढ़ रही है । स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि मुख्य धारा के विपक्षी दलों के सामान्य गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा रही हैं ।

       संविधान को दबाने के ऐसे कदम पर रोक लगाने के लिये और लोकतंत्र के तहत मानवअधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बचाने के लिये हमें ऐसे समय में व्यापक और मजबूत एकता की आवश्यकता है क्योंकि वर्तमान में होनहार आदिवासी डॉक्टर पायल तड़वी को प्रताड़ित कर फांसी पर लटकने के लिये मजबूर किया जाता है देश के कई राज्यों में बीफ रखने के नाम पर अल्पसंख्यकों एवं दलितों को जान से मारा जा रहा है बल्कि उनके ऊपर देशद्रोही का भी केस लगाया जा रहा है संविधान में प्रदत्त कानून के मुताबिक हर इंसान को क्या खायेगें , कैसे रहेगें , क्या पहनेगें वह आजादी मिली है परन्तु आज भयावह जनविरोधी कानुन लाकर मानव अधिकारों को बार - बार कुचलने का काम किया जा रहा है ।

यू . ए . पी . ए . जैसे अमानवीय और गैर लोकतांत्रिक कानूनों को रद्द करने की माँग रखनी होगी । हमें साथ मिलकर साझा मकसद के साथ अपने संघर्षों में एकरूपता लानी होगी , लोकतंत्र पर किये जा रहे हमलों पर रोक लगाने के लिये हमें एक मानव अधिकार बचाने आंदोलन का निर्माण करना होगा । बात केवल एक इंसान के रिहाई की नहीं है । सुधा भारद्वाज के रिहाई की माँग हम सबके मूल लोकतांत्रित अधिकार के मांग के बराबर है । अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के अधिकार के बराबर , असहमति दर्ज करने के अधिकार के बराबर आईये साथ में आवाज उठाकर कहते हैं हम अपने मानव अधिकारों को लेकर ही रहेगें ।

(1 ) फर्जी आरोपों से गिरफ्तार सुधा भारद्वाज सहित सभी मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई की माँग करते है ।

( 2 ) हम अपने जल जंगल और जमीन व अन्य संसाधनों पर अधिकार कार्पोरेट घरानों के हाथ में नहीं मेहनतकश जनता के अधिकार में हो ।

(3) यू . ए . पी . ए . जैसे अमानवीय कानून खारिज करने की माँग करते हैं ।

(4)अपनी असहमति दर्ज करने के अधिकार की माँग करते है ।

पी . यू . सी . एल . इकाई , जिला – दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )

PUCL Durg unit

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