Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

मार्क्सवादी चिंतक ,किसान सभा के नेता तथा सामाजिक कार्यकर्ता नंद कश्यप ने कहा कि ..

इस पर त्वरित टिप्पणी तो यही हो सकता है कि अति कुलीन बौद्धिकता को जनता ने स्वीकार नहीं किया।दूर से गठबंधन जरूर दिखा लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई संयोजन नहीं था.

ठीक इसके विपरीत एनडीए में बहुत सक्षम और ठोस संयोजन था।हम जनता को संबोधित करने की जगह चुटकुले कार्टून और हंसी-मजाक जैसे स्वांत:सुखाए पोस्ट से संतुष्ट थे.

राहुल गांधी राबिन हुड की भूमिका में थे, अमीरों की जेब से निकालकर कर गरीबों को 72000 रुपए सालाना देंगे।यह राहुल गांधी की नहीं उसके सलाहकारों से पूछा जाना चाहिए कि योजनाबद्ध जवाब क्यों नहीं बनाया।

जनता के सामने प्रधानमंत्री के रूप में दो विकल्प थे, मोदी और नो मोदी (राहुल,माया, ममता, अखिलेश, नितीश, लेकिन वह भी हवा में) कांग्रेस यदि राष्ट्रीय स्तर पर यूपीए को नहीं लेकर चली तो साहसपूर्वक राहुल गांधी को प्रधानमंत्री घोषित कर चुनाव लड़ती , इससे बेहतर नतीजे होते.

रही वाम की बात तो इमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता के अलावा आज की परिस्थितियों में उनके पास युवाओं को आकर्षित करने के लिए न तो भाषा है और ना ही कार्यक्रम उसका परिणाम है आजादी के बाद सबसे खराब प्रदर्शन।

लेकिन निराशा वाली बात मुझे नहीं लगता। आगे काम करने की और अधिक संभावनाएं हैं, बशर्ते सामाजिक सरोकार और वैचारिक प्रतिबद्धता हो और आज की तकनीकी विकास के साथ वैचारिकी समायोजित कर कार्यक्रम हो। पढ़ना शोध करना आम कार्यकर्ता तो छोड़िए नेता भी नहीं करते। इसलिए वाम सिमटते सिमटते यहां पहुंच गया.

जीत के बाद मोदी जी ने कहा कि देश में दो ही जाती रहेगी एक गरीब और दूसरी गरीबी दूर करने वाली। इससे सभी सहमत हैं। इसीलिए मोदी सरकार के लिए यह पारी कांटों का ताज है, चुनौतियां बहुत है और अब काम करके दिखाना होगा। गरीबों पिछड़ों ने मोदी को आत्मसात कर वोट किया है उनके विश्वास को बहाल रखना होगा। अराजक भीड़ पर नियंत्रण रखना होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो आशंकाएं व्यक्त किया जा रहा है उसे झुठलाना होगा कि भारत आज भी दुनिया को बुद्ध के पंचशील का संदेश देते हुए विश्व शांति और सौहार्द्र की दिशा में काम करते रहेगा।देश में शांति सौहार्द होगा तभी गरीबी दूर होगी.

समाजवादी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ आनंद मिश्रा

आनंद मिश्रा जी ने कहा कि समाज में समाजवादी और वामपंथी आंदोलन पर इन चुनावों को कोई विपरीत प्रभाव नहीं पडेगा बल्कि और ज्यादा अनुकूल परिस्थिति बनेगी. मोदी समाज के पिछड़े और वंचित वर्ग को यह समझाने में कामयाब रहे कि वे जाति और वर्ण से ऊपर उडकर काम करते है.राष्ट्र वाद का नारे ने आम लोगों को प्रभावित भी किया .वे यह भी समझाने में कामयाब रहे कि देशद्रोह से सबंधित कानून खतम करने का क्या दुष्प्रभाव पडेगा ,हांलाकि यह उनका गलत प्रचार था .
आने वाला समय और सघनता से संगठित होकृ खड़े होने और संघर्ष करने का है.
**

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.