उनकी लेखन प्रक्रिया ,अनुभव , चिंताएं और आज के सन्दर्भ में अम्बेडकर वाद ,वामपंथ और गाँधी पर एतिहासिक सन्दर्भ में बातचीत .

सुविधा के लिए इस बातचीत को तीन भाग में बांटा गया हैं.,सीजी बास्केट के लिए बातचीत की हैं रंगकर्मी अनुज श्रीवास्तव ने.

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भाग 1

पहली पुस्तक सफाई कामगार समुदाय लिखने की स्थितियां ,और बिलासपुर में जन्में संजीव के बचपन के उस अनुभव को साझा किया और बताया की की कैसे छोटी उम्र में उनसे ब्राहमण दुकानदार उनसे सामान खरीदने के लिए पैसे लेकर उसे दूर रखवा लेता था बाद में उसे पानी से शुद्ध करके अपने पास रख लेता था ,पहले उन्हें लगा की यह उसकी सामान्य प्रक्रिया है ,बाद में जब उन्होंने अबेडकर को पढ़ा तो उन्हें लगा की यह जातिगत भेदभाव है,

अंबेडकर बाद और वाम विचारधारा पर विस्तार से चर्चा की कैसे बड़े राजनैतिक दल दोनों के बीच दोनों समझ को एकसाथ खड़े नहीं होने देना चाहते है.

संजीव की दूसरी महत्वपूर्ण पुस्तक “ आधुनिक भारत में पिछड़ा वर्ग पूर्वाग्रह और वास्तिविकता “ की रचना प्रक्रिया जिस पुस्तक के पांच खंड प्रकाशित हुए .

आदि आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा …

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भाग -2

प्रधानमंत्री मोदी की सफाई कामगारों के पैर धुलाई के यधार्थ पर बातचीत की उन्हें इतनी ही चिंता थी तो उन्होंने सीवर में लगातार हो रही हत्या पर उन्होंने कभी कुछ क्यों नहीं किया ,जब एक तरफ मंगल गृह पर जाने की बात कर रहे हैं तो क्या कोई मशीन या प्रक्रिया नहीं बन सकती थी जो सीवर में सफाई के लिए बिना मनुष्य के कोई मशीन की जरुरत पूरी की जा सकती .

छत्तीसगढ़ में धार्मिक आधार पर हमले की बात नही की गई की भले ही मिडिया ने इसे ज्यादा तवज्जों नहीं दी हो लेकिन चर्चों पर लगातार हिदूवादी संघठनो ने हमले किये मुस्लिमो पर भी हमले किये गए ,लेकिन इन हमलों पर ज्यादा चर्चा नही हुई जैसी यूपी या राजस्थान की हुई .

सोशल मिडिया पर निगरानी और नियंत्रण की भारी कोशिश की गई .लेकिन इस डर से बाहर निकलने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. हम पर भी ऐसा ही विरोध हुआ लेकिन हमन डर से बाहर निकले .वाम और अमेडकर की विचारधार को किसे एक दुसरे के खिलाफ हमेशा खड़ा रखा जाये इसके निहतार्थ पर भी विस्तार से संजीव जी ने बात की .उन्होंने जय भीम ,लाल सलाम या कामरेड भीम के नारों की जरुरत पर भी जोर डाला और कहा की बिना वर्ण और बिना वर्ग के समाप्त किये दलितों के विकास की बात नहीं की जा सकती. हमें हर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा फिर वह चाहे वह दलित के खिलाफ हो या दुसरे किसी समुदाय के खिलाफ हम हमलों का चुनाव नहीं कर सकते की वह किस के खिलाफ हुए है.

आदि आदि विषय पर चर्चा …

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भाग 3

इस भाग में आरक्षण पर विस्तार से बातचीत हुई ,उन्होंने कहा की आरक्षण का मतलब है प्रतिनिध्व .,हर समय और स्थान पर सभी समुदाय का प्रतिनिध्व होना चाहिए .आरक्षण या प्रतिनिध्व का योग्यता से कोई सम्बन्ध नहीं हैं .आरक्षण तो एक प्रकार का मुआवजा है जो वंचित समुदाय को सदियों से पीड़ा पहुचने के एवज में दिया जाना चाहिये ही . ऐसा सिर्फ हमारे ही देश में नहीं हो रहा है ,ब्रिटेन ,अमेरिका से लेकर सऊदी अरब तक वंचितों को अलग अलग तरह से दिया जाता है.

उन्होंने गाँधी और डा. अमेडकर के संबंधो पर भी चर्चा की और कहा की पूना पेक्ट के गाँधी और उसके बाद के गाँधी एक से नहीं है .पूना पेक्ट के बाद गाँधी में बहुत बदलाव आया .उन्होंने कहा भी के वे समझते थे की वे पुरे भारत का प्रतिनिध्व करते है लेकिन ऐसा हैं नहीं ,वे आदिवासियों अछूतों का प्रतिन्ध्व नहीं कर रहे थे उसके बाद उन्होंने अपने कार्यक्रम बदले और कई प्रोग्राम जोड़े जो दलितों से सम्बंधित थे .

उन्होंने दलित शब्द को हटाने की राजनीती पर भी चर्चा की .उन्हने कहा की हरिजन शब्द गैर दलितों ने दिया था जब की दलित शब्द उसी वंचित समुदाय से आया .उन्होंने यह भी कहा की शब्द ही हटाया जाना है तो ब्राहमण क्यों नहीं. .

संजीव खुद्शाह ने अंत में एक कविता भी सुनाई. “ एक दिन तुम्हे सड़कों पर खदेड़ा जायेगा ..

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