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कल रात राजनैतिक और सामाजिक कार्यकर्ता नंद कश्यप और उनके बेटे अमित कश्यप पर गुंडो ने हमला कर दिया जिससे उनके बेटे के सिर ,नाक और चेहरे पर गंभीर चौट आई है.नंद कश्यप को भी दांत क्षतिग्रस्त हुआ है।
यह भी ज्ञात हुआ है कि आरोप है कि गुंडो का गिरोह ने इकठ्ठे होकर हमला किया है .यह गुंडो का गेंग जगह जगह छोटे मोटे मामलोँ में भी गिरोह बनाकर लाठी और अन्य हथियारों से हमले करते है.
पुलिस का इनपर कोई नियंत्रण नहीं हैं कभी कभी तो पुलिस कि सरंक्षण भी रहता हैं. फिलहाल पुलिस ने कुछ लोगो को गिरफ्तार किया है.

बिलासपुर के विभिन्न जन संगठन ,कर्मचारी संगठनों ने इस हमले की भत्सर्ना की है और वे कलेक्टर ,एस पी से मिलकर कार्यवाही की मांग करेंगे तथा इस प्रकार की गुंडा संस्कृति पर रोक लगाने की मांग करेंगे .

नंद कश्यप से बात करने के बाद संपूर्ण घटना क्रम यह मालुम हुआ हैं.

घटनाक्रम इस प्रकार है, नंद कश्यप के पड़ोस के नर्सिंग होम में कोई आया था कार में जो अपनी गाड़ी बीच सड़क पर रखा हुआ था। ,नंद कश्यप के सत्तर वर्षीय भाई और भाभी अपनी गाड़ी से आ रहे थे तो बीच सड़क खड़ी कार हटाने हार्न बजाया तो कार में बैठे दो युवकों ने उनके साथ गाली-गलौच शुरू कर दिया। उनके बेटे अमित ने उन युवकों से बदतमीजी नहीं करने और गाड़ी हटाने कहा तब उनमें आपस गाली-गलौच हुई फिर उन दोनों लड़कों ने अमित के सिर और मुंह पर प्रहार कर दिया। जिससे उसके नाक और सिर से खून बहने लगा।

आवाज़ सुन कश्यप जी नीचे उतरे तो अमित के सिर से खून बहता देख उसे हास्पिटल ले जाने भाई साहब की गाड़ी में बैठाया और डाक्टर और उन लड़कों पर चिल्लाया कि गुंडागर्दी करते हो, लेकिन उन लड़कों ने अपने साथियों को पहले ही फोन कर बुला लिया था, अमित को अस्पताल ले जाने गाड़ी एकाध मीटर आगे बढ़ी होगी कि चार पांच गाड़ियों में हाकी स्टिक और बेसबाल बैट से लैस 15-20 गुंडे उतरे और अमित को गाड़ी से उतारकर बहुत मारा और कश्प जी को भी जमीन पर गिराकर चार पांच गुंडों ने लात मुक्कों से मारा। वे अमित को लेकर घर वापस भागे तो वो लोग वहां भी आकर उन्हें और उनके छोटे लड़के और भाई भतीजों से मारपीट किया। उनके परिजनों ने एफ आई आर करवाया है।

प्रदीप शर्मा ,रुचिर गर्ग और सतीश वर्मा जी तक बात पहुंची तो अटल श्रीवास्तव घर आए और थाने तक गये। वहां पता चला कि ये गुंडे किसी नेता के संरक्षण में है। खैर अटल श्रीवास्तव साथ रहे । अमित अभी अपोलो में है। नंद कश्यप को चोट चौतरफा लगा है हां गंभीर नहीं है ऐसा लगता है।
सबसे बुरी बात यह कि डाक्टर यदि तुरंत पुलिस को फोन करता तो यह घटना नहीं होती परंतु खुद डाक्टर खड़े खड़े देख रहा था।शहर में छोटे मोटे झगड़ों आजकल फोन कर गैंग बुलाकर मारपीट आम होते जा रहा है।

अभी 15 दिन पहले रवी बेनर्जी सेक्रेटरी सीपीएम के साथ भी ऐसा ही हुआ था।वो तो गैग के एक दो लड़के उन्हें जानते थे तो मामला ठंडा हो गया। अखबारों में आए दिन इस तरह की खबरें आ रही हैं। ये एक नया कल्चर बन रहा है और इसे सत्ता का संरक्षण मिल जाता है।कल रात में बीस के आसपास कांग्रेस के छुटभैय्ए नेता इन गुंडों को बचाने सिविल लाइंस थाने में जुटे हुए थे। ये प्रवृत्ति घातक है।हल्के फुल्के बहस मारपीट के बाद इस तरह गैंग के रूप में घर तक मे घुसकर मारपीट को किसी भी हालत में जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। ये तो पूरे समाज को अपराधियों के हाथों सौंपने जैसा होगा।

यह जरूर है कि निजी तौर पर यह राजनीतिक हमला नहीं है। लेकिन इस तरह के गुंडागर्दी को संरक्षण बहुत बड़ी माफिया राजनीति है। कांग्रेस सरकार को और शासन प्रशासन को इस गैंग संस्कृति के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि युवा अपराधी न बन सकें।

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