सीमेंट फैक्ट्री और बन्द पड़ी खदान के लिए हो रहा राख का उपयोग .

पत्रिका से साभार

कोरबा . संयंत्रों से निकला 43 लाख मिट्रिक टन राख की खपत नहीं हो सकी है । सीमेंट फैक्ट्री और बंद पड़े खदानों में नाम के लिए ही राख भरी जा रही है । पिछले एक साल में कोरबा के संयंत्रों से एक करोड़ 13 लाख मिट्रिक टन राख निकली थी । जिसमें सिर्फ 70 लाख मिट्रिक टन राख का ही उपयोग हो सका है ।

कोरबा जिले के पात्र प्लाटों से निकलने वाले राज़ की उपयोगिता कम है । कोत्रा के एसटीपीसी , एचटीपीपी , डीएसपीएम , पूर्व संयंत्र , बालको , एसीबी व लैंको सयंत्र से निकलने वाले राख के सौ फीसदी खपत के लिए कई बार चेतावनी जारी की जा चुकी है । लेकिन उसके बाद भी खपत महज 65 फीसदी के आसपास ही हो रही है ।

केन्द्रीय विद्युत अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2015 से मार्च 2019 तक कोरबा जिले के सभी संयंत्रों से एक करोड़ 13 लाख मिट्रिक टन राख निकली थी । जिसमें से 70 लाख मिट्रिक टन राख का उपयोग इस एक साल में किया गया । लेकिन लगभग 43 लाख मिट्रिक टन राख का उपयोग हो ही नहीं सका पर्यावरण संरक्षण मंडल का निर्देश था कि सीमेंट फैक्ट्रियों व बन्द पड़ी खदानों में राख भरवाया जाए । इससे राख की खपत अधिक होगी , लेकिन ये भी खानापूर्ति तक ही सीमित है । लगातार क्षमता से अधिक राखड़ डेम में राख भरी जा रही है । हर महीने साढ़े लाख मिट्रिक टन राख संयंत्रों – से निकला और खपत महज साढ़े 5 लाख मिट्रिक टन की हो सकी है

ट्रांसपोर्टिंग पड़ रही भारी इसलिए आनाकानी

प्रदेश के सीमेंट फैक्ट्रियों को राख कोरबा से ट्रांसपोर्टिग कर ले जाना भारी पड़ रहा है । इसलिए ले जाने में आनाकानी कर रहे हैं । प्रदेश के लगभग सभी सीमेंट फैक्ट्री कोरबा से 150 किमी से दूर है। इसलिए फैक्ट्री संचालक महज दिखाने के लिए ही कुछ मात्रा में ही राख संयंत्र के लिए ले जाते हैं । पिछले एक साल में सिर्फ एक लाख 12 हजार मिट्रिक टन राख का ही ट्रांसपोर्टिग कर सीमेंट फैक्ट्री में उपयोग किया गया ।

कोरबा जिले से प्रदूषण कम होने का नाम नही ले रहा है । हल्की सी हवा चलते ही शहर में राख की परत बिछ जाती हैं । तमाम दावें पर्यावरण संरक्षण मंडल कर लें । लेकिन सच्चाई है कि संयंत्रों व राखड़ डेम के आसपास काफी अधिक प्रदूषण के दायरे के लोग रह रहे हैं । खपत पूरी नहीं हो पा रही हैं ।

प्लांटों से उत्सर्जित राख को अधिक से अधिक उपयोग हो इसके लिए प्रयास किया जा रहा है । बंद पड़ी खदान में राख भरने के लिए अनुमति में विलंब हो गया था । सबसे अधिक राख का इस्तेमाल इसी जगह पर किया जाएगा । इस पर निगरानी रखी जा रही हैं


आर . पी . शिदे क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी