“आधुनिक जीवन की विडंबना को दर्शाती कहानीयाँ ” पर पाठक मंच बिलासपुर में चर्चा .

बिलासपुर 20 मई 2019

पाठक मंच बिलासपुर के  इंदु चौक ,जरहाभाठा बिलासपुर कश्यप कॉम्प्लेक्स में आयोजित “ब बाय” शीर्षक कृष्ण बिहारी कथाकार की कहानी संग्रह की गोष्टी में प्रमुख वक्ता प्रमुख साहित्यकार एवं  कहानीकार शितेंद्रनाथ चौधरी, बिलासपुर एवं गोष्ठी की अध्यक्षता प्रोफेसर कृष्णा सोनी , गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय हिंदी विभाग ने की.

 सर्वप्रथम संचालन कर्ता शाकिर अली ने स्वागत करते हुए चर्चित कहानी संग्रह “ब-बाय …’ कृष्ण बिहारी कथाकार का परिचय देते हुए संग्रह की कहानियों पर संक्षिप्त समीक्षा करते हुए चर्चा का प्रारंभ किया उन्होंने कहा कि कथाकार ने इस संग्रह की आठ कहानियों में स्त्री विमर्श तथा शिक्षा जगत की समस्याओं ,  अव्यवस्था  एवं भ्रष्टाचार  जैसे परिस्थितियों का मूल्यांकन करते हुए मानवीय मूल्यों ,विशवासो के क्षरण का सहज भाषा मे चित्रण किया है। यही कारण है कि कहानी  पाठकों में लोकप्रिय हैं, उनके द्वारा किया गया प्रभावशाली चरित्र चित्रण पाठकों को बांध लेता है। शिर्षक कहानी में भी कथाकार सभी पात्रों का विवरण देते हुए प्रमुख पात्र के जीवन मूल्यों एवं संघर्ष शीलता को उभारकर प्रभाव पूर्ण ढँग से पुरूष की तुलना में स्त्री के मानवीय , दृढ चरित्रिक मूल्यों को पाठकों के सामने रखा है!

प्रमुख वक्ता प्रोफ़ेसर  शितेंद्रनाथ चौधरी जी ने बताया कि कहानीकार 1971 से कहनियां लिख रहे है लेकिन उनकी भागीदारी स्तर – अस्सी के दशक के कहानी आंदोलन में दिखाई नही देती है। उन्हें 1996  में हंस में छपी दो औरत ” शीर्षक कहानी से ज़्यादा प्रसिद्धि व पहचान मिली , उनकी अधिकांश कहानियाँ हंस ” में  प्रकाशित हुई आठ प्रसिद्ध कहानी इस संग्रह में प्रकाशित है। उन्होंने इस संग्रह की आठो कहानियों का विस्तार से अलग – अलग वर्णन करते हुए अपनी गहरी समीक्षा दृष्टि का परिचय देते हुए बताया कि इनकी कहानियाँ प्रभावशाली तो है, लेकिन अधिकांश कहानियों में मानव जीवन के द्वंदात्मक  पहलुओं पर ज्यादा ध्यान नही दिया गया हैं। कृष्ण बिहारी की कहानियों में आधुनिक जीवन प्रणाली के कारण मूल्यों के क्षरण गिरावट , अव्यवस्था  भ्रष्टाचार मेहनतकशो की उपेक्षा का विवरण जरूर मिलता है जो पाठकोँ में उन्हें लोकप्रिय बनाता है। पूरी हकीकत पूरा फसाना ” कहानी में आजादी के बाद 50 वर्ष पूरा होने पर होने वाले स्कूल के समारोह में नाटक , वादविवाद , भाषणों में आज़ादी के अन्तर्विरोध  को उभारते हुए कहानीकार ने अपना प्रतिरोध प्रतिवाद स्वरूप दर्शाया है, यह उनकी  सफलतम कहानी मानी जायेगी इस संग्रह की,

 कहानी की चर्चा के दौरान हस्तक्षेप करते हुए  नन्द कश्यप  ने भी कहानीकार की सफल चित्रण कला की प्रसंशा करते हुए वक्ताओँ के द्वारा समय- सीमा का ध्यान रखने हेतू सुझाव दिया ताकि पाठक मंच के सभी उपस्थित सदस्य चर्चा में भाग ले सकें एवं चर्चा कार्यकर्म  सार्थक हो सके।

गोष्ठी परिचर्चा के मुख्य अंश

कर्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर सोनी जी ने कथाकार के सफल चित्रण को बताते हुए कहानी के क्षेत्र में आलोचकों का ध्यान न दिए जाने की चर्चा की जिसका खामियाजा कृष्ण बिहारी जैसे प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय कथाकार को भी भुगतना पड़ा।।

गोष्ठी   में  नन्द कश्यप  लाखन सिंह , कपूर वासनिक,  धर्मेन्द्र कुमार,  संतोष सहगल , प्रियंका शुक्ल  ,संपा सिकदार ,  निलोत्पल शुक्ला ने भी उपस्थित होकर भागीदारी की 

अंत मे पाठक मंच के संयोजक शकीर अली ने धन्यवाद ज्ञापन कर गोश्ठी के समापन किया .

यह भी पढिये –

शाकिर अली ,संयोजक .पाठक मंच बिलासपुर

छत्तीगसढ़ प्रदेश हिंदी सहित्य सम्मेलन पाठक मंच बिलासपुर

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