गीत कुमार भिलाई की रिपोर्ट

भिलाई में एक निजी आई टी आई जिसकी परीक्षाएं पिछले महीने ही सम्पन्न हुई हैं। सभी छात्र परीक्षा खत्म होने के बाद अच्छे नतीजों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। उनके इस इंतेज़ार को तगड़ा झटका तब लगा जब नतीजें सामने आए जोकि अत्यंत चौकाने वाले थे। फिटर विभाग में अध्ययनरत 84 छात्रों में सिर्फ 7 छात्र ही उत्तीर्ण हुए जिनमे से भी लगभग 5 कृपाउत्तीर्ण हैं। शेष सभी विद्यार्थी अनुपूरक या अनुतीर्ण हैं। हालात सिर्फ यहां ही खराब नही है इलेक्ट्रिशन विभाग का भी यही हाल है। यह घटना शिक्षा के नाम पर हो रहे व्यापार को खुले पर्दे में प्रस्तुत करता है। मेरा एक दोस्त भी इसी कॉलेज में अध्ययनरत है जिससे मुझे ये जानकारी मिली।


प्रबंधन द्वारा छात्रों को कहा गया कि चूंकि आप सब अनुपूरक हैं तो आप सभी 700 रुपये प्रति विषय के हिसाब से पैसे जमा करिये जिससे कि जल्द ही आपके अनुपूरक परीक्षा का आयोजन हो सके। नतीजो में संसोधन का हवाला देते हुए एक और खेल खेला गया , कहा गया 19 मई को संशोधित नतीजे आएंगे पर अनुपूरक परीक्षा के फॉर्म भरने की अंतिम तारीख 18 मई रखी गयी ताकि सभी विद्यार्थियों से पैसे वसूले जा सके । इस तरह खुले तौर पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहाँ पढ़ने वाले तमाम छात्र भी वही लोग हैं जिन्हें माता पिता कड़ी धूप, बरसात में जी तोड़ मेहनत करते हैं। शिक्षा का व्यापार उन मेहनतकशो की कमाई को लूटने का एक कारगर साधन बन कर उभरा है।ये कोई नई घटना नही है। ऐसे सैकड़ो घटनाएं भारत मे रोज़ देखने को मिलती है।


ऐसे कॉलेज में ऐसी घटनाओं के शिकार भी उसी तबके/वर्ग के बच्चे होते हैं जिनका चयन प्रतियोगी परीक्षा (entrance exam) में नही हो पाता और अंततः उन्हें मजबूरी में ऐसी लूट मचाने वाली संस्थानों में दाखिल होना पड़ता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल ना हो पाने का बड़ा कारण टटोलने पर यह पता चलता हैं कि चूंकि इन बच्चों की पारवारिक हालात इतनी अच्छी नही होती कि वे महँगे कोचिंग सेन्टर में कोचिंग ले सके और अंत मे वो शिकार होते हैं इस बुरी व्यवस्था का। जब तक इन चीज़ों को खुद युवा वर्ग समझकर, अध्ययन कर संघर्ष के लिए मैदान में नही उतरेगी तब तक बात नही बनेगी।