बिलासपुर @ पत्रिका .

जस्टिस गौतम भादुड़ी की एकलपीठ ने याचिकाककर्ता को मुंगेली की चर्च में प्रार्थना करने की अनुमति प्रदान करते हुए कहा है कि प्रेयर के वक्त या सुबह 11 से 1 बजे के दौरान वे चर्च जा सकते हैं । अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि ये व्यक्ति का विशेषाधिकार है कि उसे किस धर्म या संप्रदाय के मंदिर में प्रार्थना के लिए जाना है , उसे ऐसा करने से किसी भी स्थिति में रोका नहीं जा सकता । एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि किसी धर्म विशेष के अनुयायी को किसी अन्य प्रार्थना स्थल में जाने की
छूट होगी , बशर्ते किसी प्रकार की अप्रिय घटना निर्मित ना हो ।

याचिकाकर्ता केए सवरियाप्पन ने अधिवक्ता अभिजित मिश्रा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई है । इसमें मांग की गई है कि याचिकाकर्ता अपने 50 – 60 साथियों के साथ मुंगेली चर्च में प्रार्थना करने के लिए जाना चाहते हैं पर चर्च के पास्टर उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे रहे हैं जबकि संविधान में सर्वधर्म सम्भाव की बात कही गई है और किसी व्यक्ति को धर्म विशेष के किसी पूजा स्थल पर जाने और प्रार्थना करने की मनाही नहीं है । याचिकाकर्ता को अपने साथियों व समर्थकों के साथ चर्च जाने की अनुमति प्रदान की जाए ।

इस पर जस्टिस भादुड़ी की एकलपीठ ने याचिकाकर्त को मुंगेली चर्च में प्रार्थना के वक्त या सुबह 11 से 1 बजे के दौरान चर्चा जाने की अनुमति प्रदान की है । कोर्ट ने सुको के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आस्था किसी व्यक्ति का नितांत निजी मामला होता है । इसमें किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई जा सकती , बशर्ते उस व्यक्ति की उपस्थिति या किसी हरकत से पूजा स्थल की पवित्रता बाधित होती हो ।
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