आदिवासी त्योहार के लिए ले जा रहे थे शराब, पुलिस ने तस्कर बता भेजा जेल

बोधघाट पुलिस की कार्रवाही पर नैननार के ग्रामीणों ने उठाए सवाल कहा – पुलिस ने बस्तर की आदिवासी संस्कृति पर किया है प्रहार .

पत्रिका .काम से

जगदलपुर . बोधघाट पुलिस की कार्यप्रणाली पर नैननार के ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं । दरअसल गांव में आंबुस त्योहार था । इस त्योहार का जश्न मनाने ग्रामीणों ने दो युवकों को अंग्रेजी शराब लाने जगदलपुर भेजा था । युवक शराब लेकर आ रहे थे तभी बोधघाट पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया । शुक्रवार रात पकड़े गए दोनों आदिवासी युवकों में एक को तस्कर बताकर पुलिस ने आबकारी एक्ट के तहत न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया ।

इसके बाद ग्रामीणों में पुलिसिया कार्रवाई को लेकर आक्रोश बढ़ गया । पुलिस ने दो युवकों को पकड़ा था लेकिन जब ग्रामीण इन्हें छोड़ने की मांग को लेकर सीएसपी के पास पहुंचे तो एक युवक के पास से बरामदगी दिखा दी गई । गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस झूठ बोल रही है । मामले को बढ़ाचढ़ाकर बताया जा रहा है । ग्रामीणों का कहना है कि बस्तर की संस्कृति में त्योहार के दौरान शराब का सेवन होता है । उत्सव मनाने के लिए लाई जा रही शराब पकड़कर पुलिस ने आदिवासी संस्कृति पर प्रहार किया है ।

मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की मामले की

जानकारी देते हुए बोधघाट टीआई प्रशिक्षु डीएसपी भावेश समरथ ने बताया कि लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के ग्राम नयननार निवासी मासो बैग में 70 पौआ शराब लेकर गांव जाने के लिए निकला था तभी मुखबिर ने पुलिस को सूचना दी कि वह शराब का अवैध परिवहन कर रहा हैं , बताए गए हुलिया के आधार पर पुलिस ने आरोपी को शराब दुकान से कुछ ही दूरी पर गिरफ्तार कर लिया ।

बड़ा सवाल – एक को पकड़ा तो दूसरे को क्यों छोड़ा ?

पुलिस की कार्रवाई पर इसी बात से सवाल उठने लगे हैं कि बोधघाट के अमले ने जब दो युवकों को शराब के साथ पकड़ा तो एक युवक को किस आधार पर छोड़ दिया । ग्रामीणों का आरोप है कि युवकों ने त्योहार की जानकारी पुलिस को दी थी लेकिन पुलिस ने उनकी बात की पुष्टि किए बगैर उन्हें रातभर थाने में बिठाया इसके बाद एक को जेल भेज दिया । बोधघाट पुलिस ने दूसरे युवक को मामले में गवाह बना दिया है .

**