◆ आखिर भड़ैत ही नहीं, उनके सरगना ठेकेदार भी गिरफ्तार.

◆ कामरेड योगेश सोनी पर हमले के खिलाफ संघी बीएमएस को छोड़कर भिलाई में कार्यरत सभी रंग और रंगत के यूनियन एक साथ आये थे, क्योंकि हमला सीटू और यूनियन के नेता पर नहीं, मजदूरों के संगठित होने और संगठन बनाने के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार पर किया गया था. पीयूसीएल जैसे मानवाधिकारों पर काम करने वाले संगठनों ने भी इस हमले के खिलाफ आवाज उठाई थी.

◆ ठेकेदारों पर शक तो तभी हो गया था, जब इस प्राणघातक हमले में योगेश के बचने के बाद कुछ ठेकेदारों ने अपना हाथ होने से, बिना कहे, बिना पूछताछ, इंकार करना शुरू कर दिया था. बीएसपी प्रबंधन का इन ठेकेदारों के साथ मिलीभगत का खुलासा होना बाकी है.

◆ सार्वजनिक क्षेत्र में भी असंगठित मजदूरों को संगठित करना, उनकी रोजमर्रा की मांगों के लिए लड़ना कितना कठिन है, इस हमले से साबित होता है. आखिर मजदूर लड़ेंगे, तो शोषकों की तिजोरियों पर ही चोट जो पहुंचती है!!

◆ #माकपा सभी संगठनों और सहयोगियों का आभार मानती है. भिलाई के मजदूरों का साझा संघर्ष रंग लाया. मजदूरों का हौसला टूटा नहीं, बल्कि लड़ने का जोश और बढ़ गया है. 
#हम_सब_मिलजुलकर_लड़ेंगे_और_जीतेंगे!!

संजय पराते ,राज्य सचिव माकपा छत्तीसगढ़