क्या तुम ये मान बैठे हो कि सूरज रोज करता है सफर : शैफाली की कविता .

Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

( जिस हिसाब से ये लगातार उत्कृष्ट से उत्कृष्टतर, श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर लिख रही हैं, कह दिन दूर नहीं है जिस दिन हम अभिमान के साथ कहा करेंगे कि ; शेफाली Shefali Sharma – शेफाली जी को हम जानते है । वे भी हमे पहचानती हैं ।
तब तक पढ़ें उनकी आज अभी की कविता । : बादल सरोज .

शैफाली शर्मा

क्या तुम ये मान बैठे हो
कि सूरज रोज करता है सफर
पूरब से पश्चिम का
या तुम्हें विश्वास है उस पर जिसने
पहली बार 
पृथ्वी के घूमने की बात की थी ।

तर्क के साथ खड़े रहने वाले जानते हैं 
कि अंधेरे के समय में रौशनी तक
चलकर जाना होगा
जाना होगा वहाँ तक
जहाँ रौशनी पहुँचती हो ।

तर्क करते ये लोग निकल आते हैं 
सड़कों पर अंधेरे समय में 
ऐसे अंधेरे समय में जब 
साफ-साफ दिखाई दे भविष्य के रास्ते में उगी गाजर घास
जो न उखाड़ी तो
बोझिल हो जाएंगी साँसें 
अपने नाखूनों में अपनी ही चमड़ी भरी होगी ।

ये लोग सड़कों पर निकलकर चलते हैं 
चलते हैं कि 
न दब जाए कोई आवाज़ ,
सुरक्षित रहे अभिव्यक्ति 
इल्ज़ाम लगे भी तो 
सड़कों पर न हों फैसले ।

चलते हैं कि न सो जाए कोई भूखा
न लटके हों किसी पेड़ पर लाशों के फल
न मार दिया जाए कोई इंसान 
इंसान होने के लिए 
व्यवस्थापिकाएं संदेहों, शंकाओं से मुक्त हों ।

चलते हैं कि न भूल जाए कोई वादे
सवालों का डर बना रहे
डर बना रहे जनादेश का
चलते हैं कि आने वाली नस्लों को भी
बेखौफ़ चलना है सड़कों पर।

 #शेफ़ाली_शर्मा 
छिंदवाड़ा/भोपाल

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

CG Basket

Next Post

Wed May 15 , 2019
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins. तमाम रडार और ईमेल की डिजिटल बेवकूफियों के बीच इस चुनाव अभियान का सबसे बेहतर इंटरव्यू !! समकालीन भारतीय पत्रकारिता में प्रणय रॉय का संभवतः सबसे उम्दा योगदान। आप मोदी-राहुल-प्रियंका-बहनजी-गाय-बैल को देखने में बिजी होंगे, बने रहिये। फिलहाल इसे सेव करके […]

Breaking News