पदयात्रियों को पहनाई माला और कहा आपका संघर्ष हमारे लिए बेहद अहम है

जगदलपुर . हमारा जीवन इंद्रावती से जुड़ा हुआ है । आप लोग शहर के है लेकिन हम गांव वालों के लिए सोच रहे हैं । इंद्रावती बचाने के लिए आपके संघर्ष को हमारा सलाम यह बातें सोमवार को बालीकोंटा में वहां के ग्रामीणों के साथ ही कोहकापाल , कालीपुर के ग्रामीणों ने इंद्रावती बचाओ आंदोलन समिति के पदयात्रियों से कही .

दरअसल पदयात्रियों के बालीकोंटा पहुंचने से पहले ही ग्रामीण हाथों में फूल माला लिए खड़े थे । जैसे ही पदयात्री पहुंचे उन्होंने उनका फूल – माला पहनाकर स्वागत किया । इस बीच कुछ समाज सेवियों और शहर के बुद्धिजीवियों ने ग्रामीणों को फूल – माला पहनाने से मना किया । तो ग्रामीणों ने भावुक कर देने वाला जवाब दिया और कहा कि आप लोग हमारे भविष्य के लिए इतना सब कर रहे हैं तो हम इतना कर ही सकते हैं


ये सब इसीलिए किया है । इसके बाद सभी पदायात्रियों ने ग्रामीणों की भावना के अनुरूप फूल – माला पहनी और यात्रा से जुड़ने का आह्वान किया । इस मौके पर तीनों गांव के लोगों ने पदयात्रियों के जलपान की भी व्यवस्था कर रखी थी । सभी ग्रामीणों ने आंदोजन से जुड़ने का संकल्प दोहराया । बालीकोंटा सरपंच तारामणि कश्यप और कालीपुर सरपंच लेखन ध्रुव ने कहा कि सभी ग्रामवासी यात्रा के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे । इधर अभियान से जुड़े कुछ स्वयंसेवी अन्य जलाशय को भी पुनर्जीवित करने आंदोलन का
समर्थन कर रहे हैं ।

चित्र पत्रिका से

पदयात्रा में ये ग्रामीण हुए शामिल : सोमवार को बालीकोंटा तक की पदयात्रा में अनंतराम पटेल , चायमणी बघेल, अरुण बघेल , सोनसिंग कश्यप , देवनाथ , महेश बघेल , रूपचन्द कश्यप , श्रीधर , कश्यप , अनंतराम मौर्य , सुखराम बघेल , रघुनाथ यादव , पीलू कश्यप , लक्ष्मी कश्यपहेमलाल कश्यप , ब्रम्हा कश्यप , मुन्ना बघेल , लक्ष्मण पटेल , जगत बघेल , सुरेश बघेल , लक्ष्मण नागेश , नारायण बेलसरिया , नंदू बघेल , संपत बघेल , बसंती बघेल , महेंद्र बघेल , लक्की बघेल , सुखराम कश्यप , मुन्ना खेल , लहू काश्यप , भगवती कश्यप , दयाराम कश्यप , किशन पटेल , देवराम पटेल , मनोज बघेल , सोमनाथ बघेल शामिल थे ।

छठवें दिन दुर्गम रास्तों से होते हुए साढे सात किमी चले

इंद्रावती बचाओ आंदोलन समिति के बैनर तले पदयात्रा कर रहे यात्री सोमवार को दुर्गम रास्तों से होते हुए पुराने पुल से बालीकोंटा तक चले । आंदोलन समिति के किशोर पारख , मनीष मूलचंदानी , दशरथ कश्यप और उर्मिला आचार्य ने बताया कि यह पड़ाव साढे सात किमी का था । यात्रा का सबसे दुर्गम रास्ता इसे माना गया , क्योंकि इस रास्ते में कई बड़े – बड़े मिट्टी के टीलों की चढ़ाई पदयात्रियों को करनी पड़ी । युवाओं और बच्चों के लिए तो ये ट्रैकिंग के अनुभव जैसा । रहा लेकिन बुजुर्गों और महिलाओं को कठिनाई का सामना करना पड़ा । इसके बावजूद हौसला कायम रहा और सभी पदयात्री तय स्थान पर । पहचे । बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पदयात्रा का हिस्सा बने । 7वें दिन यानी मंगलवार को यात्रा बालीकोंटा से घाटपदमुर तक हो होगी ।

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पत्रिका .काम बस्तर से आभार सहित सभी चित्र पत्रिका से .