किस ईश्वर को मानते हैं और कैसी अराधना करते हैं यह एकदम निजी मामला है.

नंद कश्यप

भक्त लोग बार बार हिंदू राष्ट्र हिंदू राष्ट्र चिल्लाते हैं लेकिन असलियत क्या है। सच्चाई यह भी है कि भारत विभिन्न राष्ट्रीयताओं का देश रहा है। आज भी छत्तीसगढ़ में बसे उत्तर प्रदेश या बिहार का व्यक्ति अपने घर जाता है तो देस जा रहे हैं कहता है।सभी अपनी अपनी परंपरा और संस्कृति के साथ जीते हैं। कोई छठ मनाता है तो कोई छेरछेरा । हां सभी भारतीय हैं। लेकिन कभी किसी को यह परिचय देते नहीं देखा कि फलां हिंदू आए हैं।

भारत में जन्मे हैं और भारतीय कहलाते हैं, गांव के दलित मुहल्ले में जाइए, ऊंगली दिखा कर बोलेंगे वो हर हिन्दू पारा हे, बाकी लोग जात से पहचाने जाते हैं, आज भी किसी के घर ही आएंगे तो अंदर से पूछा जाएगा कौन है किस काम से आया है यदि काम निजी हुआ चाय नाश्ता या खाना खिलाने की बात आई तो फौरन जाति पूछी जाती है। किसी को हिंदू परिचय देते नहीं देखा, कौन आया है,जी कश्यप है, और पिछले पांच सालों में भाजपा ने एक एक जाति समूह को पैसे देकर उनके भीतर अपना आदमी नेता बनाकर भेजा, महात्वाकांक्षी लोग अब उसी भाजपा को गुर्रा रहे हैं। बाबा साहेब आंबेडकर के बताए रास्ते से ही जातिवाद टूटेगा, आरएसएस जातियों को और प्रकरांतर में सामंतवादी व्यवस्था का पोषण कर रही है। इसे तमाम समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोग समझते हैं।यह भी सच्चाई है कि आज दलित आदिवासी और पिछड़ी जातियों में अधिक प्रबोधन है सवर्णों की तुलना में, इसलिए भी लो आरएसएस के हिंदुत्व के खिलाफ वैज्ञानिक चेतना के साथ एकजुट है।आप पकड़े रहो अपने हिंदुत्व को और उसकी समझदारी को।हमारी पहचान पहले इंसान की और फिर भारतीय है।किस ईश्वर को मानते हैं और कैसी अराधना करते हैं यह एकदम निजी मामला है

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