राजकुमार सोनी/ अपना मोर्चे .काम के लिये .

रायपुर. छत्तीसगढ़ के आठ जिलों में लगभग दस हजार से ज्यादा आदिवासी जेलों में बंद है. सरकार ने फिलहाल चार हजार से ज्यादा आदिवासियों की रिहाई का सैद्धांतिक फैसला कर लिया है. इस फैसले पर आचार संहिता हटने के बाद पक्की मुहर लग जाएगी.गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बेकसूर आदिवासियों को रिहा करने करने की बात कही थीं.

नई सरकार के गठन के साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महाधिवक्ता कनक तिवारी और राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा को आदिवासियों की रिहाई को लेकर ठोस योजना पर विचार करने को कहा था. महाधिवक्ता कनक तिवारी और राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायमूर्ति  एके पटनायक से प्रारंभिक चर्चा की थी. चूंकि श्री पटनायक छत्तीसगढ़ बिलासपुर उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस भी थे सो उन्होंने आदिवासियों की रिहाई के लिए बनाई गई कमेटी का अध्यक्ष बनना स्वीकार कर लिया.

सोमवार 13 मई को इस कमेटी की पहली बैठक स्थानीय सर्किट हाउस में रखी गई. बैठक में कुल 1141 प्रकरणों के चार हजार सात आदिवासियों की रिहाई को लेकर विचार-विमर्श किया गया. बैठक में माओवादी होने के झूठे आरोप में फंसाए गए  340 प्रकरण के 1552 आदिवासी भी जल्द ही रिहा कर दिए जाएंगे.

इन जिलों के आदिवासी होंगे रिहा

फिलहाल कमेटी ने बस्तर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर, सुकमा, कोंडागांव और राजनांदगांव की जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई को लेकर विचार-विमर्श किया है. कमेटी के सदस्य पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी, आदिम जाति विभाग के सचिव डीडी सिंह, जेल महानिदेशक गिरधारी नायक, बस्तर आईजी पी सुंदराज, बस्तर आयुक्त ने यह माना है छत्तीसगढ़ की जेलों में कही जंगल से जलाऊ लकड़ी बीनने के आरोप में आदिवासी सजा काट रहे हैं तो कही अत्यधिक मात्रा में शराब निर्माण करने की सजा भुगत रहे हैं. कई बेकसूर आदिवासी माओवादी होने के आरोप में लंबे समय से बंद है. उनके आगे-पीछे कोई नहीं है तो वे जमानत भी  नहीं ले पा रहे हैं.

फिलहाल कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके पटनायक ने सोमवार को सभी सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी. महाधिवक्ता कनक तिवारी को रिहाई के मसले पर कानूनी नोट्स तैयार करने को कहा गया है. कमेटी के सभी सदस्यों को 15 जून तक रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है. कमेटी की अगली बैठक 22 जून को होगी.

इधर बैठक उधर इस्तीफे की खबर

इधर आदिवासियों की रिहाई के लिए बनी कमेटी की सर्किट हाउस में बैठक चल रही थीं उधर कुछ चुनिंदा पत्रकारों को कतिपय लोग फोन कर यह जानने का प्रयास कर रहे थे कि क्या महाधिवक्ता कनक तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रदेश में पिछली सरकार के कतिपय बड़े रसूखदारों लोगों को उच्च न्यायालय से मिली राहत के बाद सूबे में यह चर्चा कायम हो चली है कि आखिरकार घाघ आरोपियों को कोर्ट से राहत कैसे मिल रही है. क्या पुलिस की कार्रवाई या कागज-पत्री में कोई कमी है. या फिर अधिवक्ताओं की लंबी-चौड़ी फौज के बीच किसी तरह का मनमुटाव है. कौन किसको राहत दिलाने में जुटा है इसे लेकर अलग-अलग तरह की अलग कहानियां हवा में तैर रही है जनसामान्य के बीच यह चर्चा कायम है कि पुलिस अफसरों और कानून के जानकारों का एक गुट अब भी पुरानी सरकार की चाकरी में लगा हुआ है. अब तक एक भी रसूखदार की गिरफ्तारी न होने से जनता के बीच यह चर्चा भी चल रही है कि पैसों में बड़ी ताकत होती है. कानून सिर्फ गरीब आदमी के लिए होता है. चर्चा में यह बात भी शामिल है कि दिल्ली में बैठे हुए दो अफसर रिमोट कंट्रोल के जरिए सब कुछ मैनेज कर रहे हैं. घाघ लोग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फेल करने की साजिश रच रहे हैं.