उत्तम कुमार ,संपादक दक्षिण कोसल

भिलाई इस्पात संयंत्र में टीएंडडी के अंतर्गत वर्क स्टेशन में कार्यरत ठेका मजदूरों ने 3 माह से तनख्वाह नहीं मिलने के कारण काम रोक दिया है। ठेका श्रमिकों ने बताया है कि फरहद खान नामक ठेकेदार ने उनकी तीन माह का वेतन पूरी दादागिरी के साथ रोक रखा है। इतना ही नहीं दस वर्षों से राइट कंपनी द्वारा मिल रहे चिकित्सा व भविष्य निधि की सुविधा इनकी खत्म कर दी गई है। तीन माह से तनख्वाह नहीं मिलने से 150 से अधिक ठेका मजदूरों की घर की आर्थिक हालात चरमरा गई है। लोग राशन के अभाव में भूखे काम करने को मजबूर हैं। और अब राशन के दुकानदारों, दूध वाले, बिजली वाले, नगर निगम के साथ चिकित्सा और बच्चों के स्कूलों की फीस सहित तमाम क्षेत्र में इनकी देनदारी बन गई है। जो लोग किराए के मकान में निवास कर रहे हैं मकान मालिकों ने उन्हें घर खाली करने की धमकी लगातार दे रहे हैं।

हाल के दिनों में एशिया के सबसे बड़े इस्पात संयंत्र भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका श्रमिकों की हालात बद से बदतर हो गई है। उनके सारी सुविधाएं और उनके जीवन की सुरक्षा ताक पर रखकर उनसे काम लिया जा रहा है। जब आवाज उठाया जाता हैं तो उन्हें तत्क्षण काम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। आज इस लौह संयंत्र में लगभग 16 से 17 हजार नियमित श्रमिक कार्यरत हैं। इस आंकड़ें से पूरे प्लांट का कामकाज नहीं चलता है।एक साजिश के तहत दिन प्रतिदन नियमित श्रमिक या तो रिटायर हो रहे हैं या फिर व्हीआरएस लेकर काम छोडऩे मजबूर हैं उनके बदले में ठेका श्रमिकों से कम तनख्वाह और बिना सुविधाओं के काम लिया जाता है। बहरहाल नियमित श्रमिकों की भर्ती नहीं हो रही है और कोशिश भी है कि नियमित श्रमिकों की भर्ती रोककर इन कुशल श्रमिकों के कार्य को ठेका श्रमिकों से करवाया जाए।

स्थिति यह है कि पूरे प्लांट में लगभग 25 हजार ठेका श्रमिक कार्यरत हैं जो इस विश्वव्यापी संयंत्र के धडक़न कहलाते हैं। लेकिन इन श्रमिकों के साथ अछूतों की तरह व्यवहार किया जाता है। ये सारे श्रमिक काम वही करते हैं जो नियमित श्रमिक करते हैं लेकिन इन्हें नियमित श्रमिकों की तरह तनख्वाह या सुविधाएं नहीं दी जाती है। इनके साथ श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन होता है। जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी है वह भी इन्हें नहीं मिलता है। ठेका श्रमिकों को सुरक्षा की सुविधा नहीं देने से दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं या फिर उनकी मौत हो जाती है। जिसकी कोई गारंटी संयंत्र प्रबंधन, कंपनी या फिर ठेकेदार नहीं लेते हैं ना ही पीएफ की सुविधा इन्हें प्राप्त है और ना ही चिकित्सा की सुविधा। निविदा के बाद जैसे ही कम्पनी बदलती है श्रमिकों के सुविधाओं को वह हड़प कर ले जाता है। पूर्व में राईट कम्पनी ने भी इनका पीएफ का देय पैसा नहीं लौटाया है।

टीएंडडी के वर्क स्टेशन में कार्यरत ठेका श्रमिक संयंत्र में रेलवे की मालगाड़ी चलाते हैं। लोहे से वस्तुओं के निर्माण के बाद गणतव्य स्थान तक पहुंचाना इन ठेका श्रमिकों का काम है। पहले राईट कम्पनी यहां 10 साल तक काम कर चुका है। मजदूरों ने बताया कि यह कम्पनी इनका पीएफ और अन्य सुविधाएं ना देकर काम समेट लिया है। क्योंकि अब मालगाड़ी को चलाने का ठेका कलकत्ता की कम्पनी एनबीसीसी को कम बोली पर दे दिया गया है वह अपनी जिम्मेदारी पेटी ठेका एचएससीएल को दे रखा है। एचएससीएल पहले संयंत्र में ठेका लेकर तमाम निर्माण संबंधित कार्य करता था। आज उसकी माली हालात यह हो गई है कि वह अब ठेकेदारों की तरह सिमट कर प्लांट में मजदूरों की सप्लाई का काम करता है। बताया गया कि पहले पैसा एनबीसीसी के खाते में कलकत्ता जाता है वहां से एचएससीएल को पैसा मिलता है और एचएससीएल फरहद खान जैसे ठेकेदारों के दादागीरी के साएं में मजदूरों से काम लेता है।

यानी कुलमिलाकर ठेका श्रमिकों से आप काम तो ले रहे हैं और उनका शोषण करते हुए लगातार सुविधा में कटौती कर रहे हैं और अब आपने उनका तनख्वाह रोकने का काम शुरू कर दिया है। इस पर यदि मजदूर आंदोलन करते हैं तो आप उन पर लाठियां बरसाएंगे और उन्हें जेलों में ठूंसने का काम करेंगे। या फिर उन पर हमला किया जाएगा या आवाज उठानेवालों की हत्या कर दी जाएगी। और इसे आप विस्फोटक स्थिति कह कर साजिश के तहत श्रमिकों के अधिकारों और उनके आंदोलनों को कुचलने के काम को अंजाम देते रहेंगे। इस प्रकार एक सोचे समझे साजिश के तहत मैनेजमेंट और चेयरमेन एसी रूम में बैठकर तमाशबिन की तरह शोषण और अत्याचार को अंजाम देते रहते हैं।इस तरह की डर को फैलाते हुए संयंत्र प्रबंधन मूकदर्शक बन ठेका श्रमिकों के ऊपर हो रहे शोषण को देखता रहता है लेकिन जब कोई आवाज उठाता है तो उस पर कार्यवाही करने में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाती है।

कुछ दिन पहले श्रमिक नेता योगेश सोनी पर ठेका श्रमिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के कारण हमला बोल दिया गया था। इससे पहले भी संयंत्र चेयरमेन ने इसलिए सोनी को सस्पेंड कर दिया था कि उन्होंने इन ठेका श्रमिकों के हक और अधिकारों की बात प्रमुखता से उठाई थी। सफाई कर्मियों के लिए लंबे समय से संघर्षरत जयप्रकाश नायर ने कहा है कि संयंत्र में ठेका कर्मियों के साथ भेदभाव होता है। उन्हें सुविधाएं तो दूर न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दिया जाता है। प्रबंधन, ठेकेदार, कंपनियों और दलाल श्रमिक नेताओं की दलाल गठजोड़ मजदूरों के जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं। श्रमिकों से काम तो लिया जाता है लेकिन उन्हें वक्त पर तनख्वाह और उनकी जायज सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।श्रमिकों ने कहा है कि फरहद खान का खौफ पूरे संयंत्र में व्याप्त है। यह ठेकेदार तमाम ठेका श्रमिकों से दादागिरी के साथ काम लेता हैं और तनख्वाह तथा सुविधाओं की बात करने पर काम से निकाल देने की धमकी देता घूमता हैं।

जानकार मानते हैं कि जो दादागिरी नहीं कर सकता वह संयंत्र में ठेकेदारी क्या करेगा? लिहाजा संयंत्र में ठेका श्रमिकों के लिए कोई गारंटी या लिखापढ़ी नहीं है कि फलाना मजदूर फलाना कंपनी में काम करता है। परिचय पत्र से लेकर पीएफ की तमाम सुविधाओं से इन्हें वंचित रखा जाता है। अगर किसी की मौत हो जाती है तो उसकी लीपापोती कर दी जाती है और संयंत्र के बाहर कुछ भी पता नहीं चल पाता है। श्रमिकों ने बताया कि जब तक उन्हें तीन माह का तनख्वाह, चिकित्सा सुविधा, पीएफ की सुविधाओं नहीं दे दी जाती तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। बहरहाल देखना बाकी हैं आंदोलनरत श्रमिकों के हक में कौन सा श्रमिक संगठन न्यायोचित लड़ाई लड़ता है या फिर कौन सा श्रमिक संगठन कंपनी और मैनेजमेंट के साथ बैठकर दलाली खाता है।

उत्तम कुमार ,संपादक दक्षिण कोसल

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