● उत्पादन क्षेत्र की गति सुस्त रहने से औद्योगिक उत्पादन इस साल मार्च में 0.1 फीसदी घट गया है। यह 21 महीने के सबसे निचले स्तर पर है। शुक्रवार को केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2018 में इसमें 5.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। विनिर्माण, खनन और बिजली जैसे तमाम उद्योगों के औद्योगिक सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर औद्योगिक उत्पादन की गणना की जाती है। इससे पहले औद्योगिक उत्पादन 0.3 फीसदी घटने से जून, 2017 में आईआईपी सबसे निचले स्तर पर था।


● वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 3.6 फीसदी रही। वहीं, 2017-18 में यह सालाना आधार पर 4.4 फीसदी की दर से बढ़ा था। 2016-17 में यह 4.6 फीसदी और 2015-16 में 3.3 फीसदी रहा था। इस बीच फरवरी, 2019 के लिए औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर को 0.1 फीसदी से संशोधित कर और कम यानी 0.07 कर दिया गया है।


● आईआईपी में उत्पादन क्षेत्र की हिस्सेदारी 77.63 फीसदी होती है। मार्च में इस क्षेत्र में 0.4 फीसदी की गिरावट रही, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में इसमें 5.7 फीसदी का विस्तार हुआ था। पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन मार्च में 8.7 फीसदी घट गया। मार्च 2018 में भी इसमें 3.1 फीसदी की गिरावट रही थी। बिजली क्षेत्र का उत्पादन मार्च में 2.2 फीसदी धीमा हुआ, जिसमें पिछले साल की समान अवधि में भी 5.9 फीसदी की गिरावट रही थी।


● वहीं, खनन क्षेत्र में भी इस दौरान 0.8 फीसदी की गिरावट देखी गई, जो मार्च 2018 में 3.1 फीसदी बढ़ा था। मार्च, 2019 में प्राथमिक वस्तुओं में 2.5 फीसदी, मध्यवर्ती वस्तुओं में (-2.5 फीसदी) और बुनियादी ढांचा/निर्माण वस्तुओं में 6.4 फीसदी की वृद्धि रही।

बादल सरोज.मार्क्सवादी विचारक