कविता : आदिवासी-वन निवासी, कब तक हाथी से मरते रहोगे? जब तक जल जंगल जमीन को अपने अधीन नहीं करोगे. याकूब कुजुर .

आदिवासी-वन निवासी जागो

आदिवासी-वन निवासी, कब तक हाथी से मरते रहोगे?
जब तक जल जंगल जमीन को अपने अधीन नहीं करोगे।

आदिवासी-वन निवासी, कब
तक हाथी से मरते रहोगे?
जब तक पेसा, वन अधिकार कानूनों को नहीं अपनाओगे।

आदिवासी-वन निवासी,कब
तक हाथी से मरते रहोगे?
जब तक अपने गॉव की पारम्परिक सीमा को अपने
अधिकार में नहीं करोगे।

आदिवासी-वन निवासी, कब
तक हाथी से मरते रहोगे?
जब तक अपने वन का प्रबंधन स्वयं नहीं करोगे।

आदिवासी-वन निवासी, कब
तक हाथी से मरते रहोगे?
जब तक सरकार और वन विभाग पर भरोसा करते रहोगे।

आदिवासी-वन निवासी, कब
तक हाथी से मरते रहोगे?
जब तक अपनी रक्षा तुम स्वयं
नहीं करोगे।

याकूब कुजूर

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