डॉ . संदीप उपाध्याय patrika . com के लिये .आभार सहित .

रायगढ़ . सारंगढ़ विकासखंड अंतर्गत गोमर्डा अभ्यारण के घने जंगलों के बीच बसे 28 गांव के किसान नया राज्य बनने के बाद भी केन्द्र व राज्य सरकार के बेरुखी का दंश 18 साल से झेल रहे हैं । इनकी पीड़ा एवं व समस्या को दूर करने का प्रयास इन सरकारों ने अब तक नहीं किया है । हालत यह है कि अब यहां के किसान गरीबी और भुखमरी का जीवन जीने को मजबूर हैं । उन्हें न तो वन विभाग की एक भी योजना लाभ दिया जा रहा है और न ही विस्थापन के लिए राज कोई प्रयास किया जा रहा है।दरसल मध्यप्रदेश शासन काल में राज्य सरकार ने 1975 में सारंगढ़ विकासखंड के गोमर्डा वन परिक्षेत्र को वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये अभ्यारण घोषित किया था .

शुरूआती समय अभयारण्य की सीमा के अंदर 11 गांवों को शामिल किया गया था । अधिसूचना जारी होने के बाद इसे
गोमर्डा अभ्यारण के नाम से वन्य प्राणी अभ्यारण के रूप में स्थापित कर दिया । इसके बाद इसका विस्तार करते

हुए इसमें 17 नए गांव को और जोड़ा गया । प्रारम्भ में यहां किसी भी किसान को जमीन खरीदी बिक्री का पंजीयन कराने कोई दिक्कत नहीं थी , लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य बनने के लगभग 8 महीने पहले तत्कालीन मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन ने गोमर्डा अभ्यारण के किसानों की निजी जमीन के क्रय विक्रय पर रोक लगा दी। उनके द्वारा जारी वह आदेश छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 18 साल भी उसी स्थिति में लागू है । छत्तीसगढ़ में शुरूआती तीन साल कांग्रेस ने और उसके बाद 15 साल तक भाजपा ने राज किया । वर्तमान में फिर से कांग्रेस की सरकार आ गई है , लेकिन किसान हितैषी होने के ढोंग करने वाली सरकारें किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए कोई पहल नहीं कर रही हैं । सरकार की इस गलत नीति से यहां सिर्फ किसान ही नही बल्कि अन्य ग्रामीण भी गरीबी का दंश झेल रहे हैं ।

तेंदूपत्ता था जीवकोपार्जन का साधन वह भी छीन लिया

गोमर्ड अभ्यारण के अंतर्गत आने वाले सभी 28 गांव के लोगों के लिए तेंदूपत्ता संग्रह । जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन था लेकिन सरकार ने वह हक भी छीन लिया है । इसके साथ । ही यहां हर परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में मिलने वाली दो हजार की सहायता राशि भी नहीं दी जा रही है । यहां के लोगों को वन विभाग से मिलने किसी भी योजना का नहीं मिल रहा है ।

क्षेत्र के आदिवासियों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है । गोमड अभयारण्य में तेंदूपत्ता तोड़ने पर रोक इसलिए लगाई गई ताकि वन्य प्राणियों को भोजन की कमी न रहे ।
मनोज पांडे , डीएफओ रायगढ़ वन मंडल

वनवासियों के कल्याण की हैं दर्जनों योजना

कहने को तो वन विभाग जन श्री बीमा योजना , छात्रवृत्ति योजना , तेंदूपत्ता बोनस दर्जनों योजना । वनवासियों के कल्याण के लिए । संचालित कर रही है , लेकिन । अभ्यारण की सीमा के अंदर बसे 28 गांव के लोगों को किसी भी । योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि यदि सरकार इन 28 गांव को । विस्थापित करना चाहती है तो विस्थापन नीति तैयार करने में समय बर्बाद क्यों कर रही है ? किसानों । को हतोत्साहित क्यों कर रही है । ?

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