अगर मंदिर के लिए लड़ने वाले देशभक्त और राष्ट्रवादी हो सकते हैं, तो अपने जल,जंगल, जमीन के लिए लड़ने वाले आदिवासी भाई बहन नक्सलवादी कैसे हो सकते हैं ? गोडेरास से लौटकर लिंगाराम कोडोपी.

दंतेवाड़ा . 10.05.2019

  दिनांक 8/5/2019 को दन्तेवाड़ा जिले की D.R.G. और S.T.F. पुलिस द्वारा ग्राम पंचायत गोडेरास में पुलिस द्वारा माओवादियों के साथ मुठभेड़ दिखाया गया व पुलिस को बड़ी सफलता मिलने व 30 नक्सली केम्फ ध्वस्त करने का दावा किया गया है।

      कल दिनांक 9/5/2019 को मैं और सोनी सोरी व पत्रकार पंकज भदौरिया के साथ इस घटना की मुआयना करने के लिए गोडेरास ग्राम पहुंचे। गाँव के ग्रामीणों के साथ मिलने पर गांव के ग्रामीणों ने कई आरोप पुलिस प्रशासन पर लगाये हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का माओवादियों के साथ मुठभेड़ झूठा है, माओवादी गाँव में डेरा व केम्फ लगाकर रुके हुए हैं यह बात गाँव के ग्रामीणों को पता नहीं था।गाँव के ग्रामीणों का यह भी कहना है, कि दो बार गोली चलने की आवाज आयी हैं तो मुठभेड़ कैसे हुई? माओवादी को मारे तो मारे साथ-साथ गाँव के दर्जनों आदिवासी भाई बहनों को बेरहमी से पिटाई  किया। मार पीट में बुजुर्ग महिला, बूढ़े, यहाँ तक की बच्चों की माँ तक को नहीं छोड़ा।



     गाँव के ग्रामीणों का कहना हैं कि लड़ाई माओवादियों के साथ हैं फिर गाँव के लोगों के साथ मार पीट करने का क्या अर्थ हैं? क्या सारे गाँव के लोग माओवादी हैं? अगर गाँव के सारे ग्रामीण माओवादी हैं तो सभी को जेल भेजना चाहिए माओवाद के नाम पर मार पीट व हत्या क्यों?

           इस मार पीट को लेकर गाँव के ग्रामीणों में कल पुलिस प्रशासन के प्रति बहुत आक्रोश दिखा। इस गाँव के साथ साथ पूरे क्षेत्र में महा रैली करने की तैयारी हैं। रैली के साथ साथ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग व पेसा कानून, वन    अधिकार कानून के तहत लड़ने की तैयारी हैं। इस घटना को लेकर आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता  सोनी सोरी क्या कहती हैं आप इस विडियो को देखिए।

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