रायगढ़ . 10.05.2019

टीआरएन कंपनी द्वारा बनाया गया डैम आसपास के दर्जन भर किसानों के लिए बर्बादी का सबब बना हुआ है । डैम के पानी से दर्जन भर से अधिक उन किसानों की जमीन प्रभावित हुई है , जिसे अधिग्रहित नहीं किया गया है । ऐसे में किसानों को न तो उस जमीन का मुआवजा मिल रह है और ना ही वह उस जमीन पर खेती कर पा रहे हैं ।

इस बात की शिकायत ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के अलावा जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से की है , लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही ।

भोंगारी में टीआरएन कंपनी स्थापित है । इस कंपनी के द्वारा छह सौ मेगावाट बिजली उत्पादन करने के लिए के लिए प्लांट लगाया गया है । बिजली उत्पादन के लिए पानी की आवश्यकता होती है । ऐसे में कंपनी के द्वारा डैम का निर्माण बनखेती में करवाया गया है । यह बनखेता भेंगारी से करीब चार से पांच किलोमीटर दूर पर संचालित है । बनखेता में डैम निर्माण के लिए कंपनी के द्वारा जमीन आधग्रहित कीगई हैं , लेकिन इस क्षेत्र के आसपास करीब आधा दर्जन गांव के किसानों की जमीन में डैम का पानी भर जाता है । जिस जमीन में जल भराव होता है उसे कंपनी द्वारा अधिग्रहीत नहीं किया गया है ।

इससे उक्त जमीन पर किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं । बताया जा रहा है कि इस बात की शिकायत ग्रामीणों ने पहले कंपनी के अधिकारियों से शिकायत की , लेकिन जब ग्रामीणों की बात नहीं सुनी गई तो ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचे । इसके अलावा जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी शिकायत की गई , लेकिन किसी ने भी समस्या का समाधान नहीं किया हालत यह है कि अधिकारी किसानों व उनके बच्चों से छिन चुका रोटी का सहारा और उनकी दुखद परिस्थिति का भी हान जानने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं ।

डैम का पानी बना सबसे बड़ी समस्या

बनखेता में टीआरएन कंपनी का डैम बनाया गया है। डैम से होने वाले जलभराव के चलते किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं । बारिश के दिनों में यहा बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है । यहां लगे सभी हैंडपम्प रेती से ढक जाते हैं । उनसे पानी नहीं मिकता है । ऐसे में ग्रामीणों को पानी लेने के लिए गुमड़ा तक जाना पड़ता है । ग्रामीण हैंडपम्प लगवाने की मांग कई बार कर चुके हैं , लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी

गांव में पानी की समस्या की जानकारी है । इस समस्या का निराकरण आचार संहिता समाप्त होने के बाद किया जाएगा । इसकी तैयारी भी की जा रही है ग्रामीणों के साथ किसी प्रकार से अन्याय नही होगा

लालजीत सिंह राठिया , विधायक , धरमजयगढ़

डैम के पानी से प्रभावित होने की जानकारी हैं । इस बात को लेकर जल संसाधन के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है । जल संसाधन के द्वारा इसकी जांच करते हुए रिपोर्ट भेजी जाएगी । इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी ।

अशोक मार्बल , एसडीएम , घरघोड़ा

डैम से यहां के ग्रामीण हैं प्रभावित

बनखेता में डेम से बनखेता गांव सहित गुमड़ा , बड़े गुमा सहित बैहामुड़ा व अन्य गांव प्रभावित हुए हैं । इसमें बनखेता गांव के प्रभावित किसानों में सुनचु यादव , शयम यादव , नेहरू यादव , पंचू जेठु यादव , रामरतन यादव , चैतू व अन्य शामिल हैं । इसके अलावा गुमडा के काशी राम राठिया ,पेनकु राठिया , भूखनन्दन राठीया व अन्य प्रभावित हैं । वहीं असून राठीया , भरतू राठिया , धरम सिंह राठिया, चरण सिंह राठीया , कोन्दु राठीया , संतोष कुमार राठिया , जयलाल मांझी की जनीन भी प्रभावित हुई हैं।

टीआरएन पर आदिवासीयों की जमीन जबरन हथियाने का आरोप

टीआरएन उद्योग के लिए लिए अधिग्रहीत जमीन की जांच कराने उठने लगी मांग

रायगढ़ . घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत भेंगारी में स्थित टीआरएन उद्योग के खिलाफ क्षेत्रीय लोगों का रोष बढ़ता ही जा रहा है । यहां के कई आदिवासी परिवार के लोगों ने आरोप लगाया है कि टीआरएन उद्योग लगाने के लिए जो जमीन का । अधिग्रहण किया गया है वह गलत तरीके से किया गया है । यहां के भोले – भाले गरीब आदिवासियों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण में लगे बिचौलियों द्वारा गाली गलौज कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई । इसके बाद उन्हें ले जाकर कम जमीन की जगह अधिक जमीन की राजस्ट्री करा ली गई है । उन्होंने इस मामले की जांच के लिए कलेक्टर से अपील करने की भी बात कही है । पीड़ित विश्वनाथ राठिया पिता भुलऊराम राठिया ने बताया कि वह टीआरएन में काम करता है । वहां लाइजनिग का काम देख रहे केके श्रीवास्तव और पटनायक ने उसके पर जमीन देने का दबाव बनाया था । जब उसने जमीन देने से मना किया तो उनके द्वारा उससे गाली गलौच कर जान से मारने की धमकी दी गई । इसके बाद वह लोग उसे 6 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए घरगोड़ा तहसील ले गए । इसके बाद उन्होंने कूटरचना करते हुए उससे 20 . 79 एकड़ की रजिस्ट्री करा ली और उसने जमीन का पैसा नहीं दिया । विश्वनाथ के भतीजे अमृत राम राठिया पिता घसिया राम राठिया ने बताया कि उनकी जमीन दो टुकड़ों में थी । एक जमीन 8 एकड दुवारी डोली में थी और 12 . 79 एकड़ जमीन चरभोन टिकरा में थी ।

कलेक्टर की अनुमति के बिना नहीं होती रजिस्ट्री

छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार किसी भी आदिवासी की जमीन तो आदिवासी ही खरीदेगा या फिर अन्य दूसरी जाति का व्यक्ति यदि आदिवासी व्यक्ति की जमीन खरीदता हैं तो उसे कलेक्टर से । अनुमति लेनी पड़ती है । बिना कलेक्टर से अनुमति के आखिर आदिवासियों की जमीन कैसे । मनमाने तरीके से रजिस्ट्री करा ली गई . यह अपने आपमें एक बड़ा सवाल है ।

पोधे रोपे नहीं और काट दिए सैकड़ों पेड़

विश्वनाथ राठिया पिता भुलराम राठिया की 20 . 79 एकड़ जमीन की जो जिस्ट्री कराई गई उस जमीन पर सैकड़ों की संख्या में आम , महुवा जामुन , कोसम , चार , साल , नीम , आदि के बड़े – बड़े पेड़ लगे थे । कंपनी ने पर्यावरण विभाग के नियमानुसार पौधरोपण तो किया नहीं और नियमों को ताक में रखते हुए इस जमीन पर लगे सैकड़ों पेड़ को और काट दिया है ।

यदि ऐसा है तो यह गलत हैं । इसकी जांच कराई । जाएगी और यदि ऐसा पाया जाता हैं तो इस पर नियमानुसार कार्यवाही होगी

यशवंत कुमार सिंह , कलेक्टर रायगढ़

मैं अभी मीटिंग में हूँ। इसके बारे में अभी कोई जानकारी नही दे पाउँगा ।

प्रहलाद प्रसाद , जीएम , टीआरएन

( पत्रिका दिनांक 3,4 म ई .2019 के आधार पर तैयार .)